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दिल के अरमां आंसुओं में बह गये : धरी रह गई भाजपा के बागियों की बैक डोर एंट्री की कोशिश, जोड़—जुगत पर विरोधी पड़े भारी

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उत्तरकाशी। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा से बगावत करने वाले कुछ लोगों की भाजपा में वापसी के लिए जोड़—जुगत काफी हाथ-पैर मारने के बावजूद काम नहीं आ पाई। बैक डोर से एंट्री की जुगत में यह लगे रहे, लेकिन पार्टी के अंदर बागियों की एंट्री तो दूर उनके नाम से भी परहेज करने वालों के विरोध से उन लोगों के सारे अरमान धरे रह गये। चुनाव के दौरान भाजपा से रूठ बागी उमीदवार के साथ हो लिए दर्जनों लोगों मे से कुछ ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि चुनाव के दौरान पार्टी से अलग होकर उनसे बड़ी गलती हुई और उसका उन्हें अब एहसास हो रहा है। इधर राजनीतिक सूत्र यह भी बताते हैं कि तब बागी हुए लोगों मे एक शख्स ने तो प्रदेश के एक मंत्री से भी पार्टी मे अपने कुछ साथियों को लेकर घुसने के लिए जोड़—तोड़ की सिफारिश की। बताया जा रहा है कि यह शख्स मंत्री का करीबी है, लेकिन पार्टी में विधानसभा चुनाव के दौरान हुए बाग़ियों की किसी भी घुसपैठ की हवा भर लगने की संभावना पर भारी विरोध को देखते हुए मंत्री ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि बैक डोर से एंट्री का मकसद आने वाले निकाय,पंचायत चुनावों में कहीं पार्टी से भागीदारी मिल जाये इसको लेकर भी था। इधर भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं की सुने तो उनका साफ कहना है कि ठीक चुनाव के दौरान पार्टी व पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ जाने वालों की एंट्री का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता और यदि थोड़ी भी इस तरह की सुगबुगाहट हुई तो उसका विरोध होगा।

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