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प्रोफेसनल कोर्स परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए 36 फीसदी अंक लाना जरूरी

कुविवि के प्रशासनिक भवन में व्यवसायिक पाठयक्रमों की बैठक में मौजूद प्रोफेसर
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के समन्वयकों की बैठक
नैनीताल।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में कुलपति प्रो. डीके नौडियाल के निर्देशों के क्रम में व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के समन्वयकों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक मेें प्रोफेसनल कोर्स नियमावली-2018 के तहत परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए 36 फीसदी अंकों के एक समान मानक समेत अन्य बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि विद्यार्थियों को लिखित और प्रयोगात्मक दोनों परीक्षाओं में पास होने के लिए अलग-अलग 36 फीसदी अंक लाने होंगे। विवि के प्रभारी परीक्षा नियंत्रक डॉ. रितेश साह ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में संचालित हो रहे पाठ्यक्रमों में परीक्षा उत्तीर्ण करने के मानक एक समान नहीं थे, जिसकी वजह से परीक्षाफल तैयार करने में परेशानी आती थी। बताया कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रोफेसनल कोर्सेज को लेकर संशोधित नियमावली तैयार की गई थी। डॉ.साह ने बताया कि व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अब मानक निर्धारित कर दिए गए हैं। डा. साह के मुताबिक अब लिखित परीक्षा के लिए 70 और प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 30 अंक का नियम इसी सेमेस्टर से परीक्षा से लागू कर दिया गया है। बताया कि वहीं विद्यार्थियों को लिखित और प्रयोगात्मक दोनों परीक्षाओं में पास होने के लिए अलग-अलग 36 फीसदी अंक लाने होंगे और इसी के अनुसार परीक्षा घोषित किया जाएगा। बताया कि बीएड, विधि और फार्मेसी पाठ्यक्रम के मानक देश के अन्य शिक्षण संस्थानों के अनुरूप ही रहेंगेे, जिसे लेकर इन पाठ्यक्रमों के समन्वयकों से नियमावली मांगी गई है। बैठक में प्रो.आरएस पथनी, प्रो. गंगा बिष्ट, प्रो. बीना पांडे, प्रो. लता पांडे, प्रो. अतुल जोशी, प्रो. एससी जोशी, डॉ. अमित जोशी, डॉ. महेेंद्र राणा, पूनम बिष्ट, डॉ. निधि वर्मा, डॉ. नवीन भट्ट आदि मौजूद थे। कुमाऊं विवि के प्रशासनिक भवन में सोमवार को एक दूसरी बैठक कुलसचिव डा. महेश कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में तय किया गया कि अगर किसी छात्र ने इंटरमीडिएट की परीक्षा ग्रामीण मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान नई दिल्ली बोर्ड से उत्तीर्ण की हो तो उस छात्र-छात्रा कुमाऊं विवि की ओर से किसी भी दशा में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बताया गया है कि यह संस्थान उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद समेत यूजीसी के मानकों में भी नहीं आता है। बैठक में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष आदि मौजूद थे।

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