अल्मोड़ाउत्तराखंड

अल्मोड़ा न्यूज: 12वां तीन दिनी राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुरू, चार कुमाऊंनी रचनाकार सम्मानित, कुमाऊंनी भाषा के विकास पर मंथन

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

कुमाऊंनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति अल्मोड़ा के बैनर तले यहां जीबी पंत राजकीय संग्रहालय के सभागार में तीन दिवसीय 12वां राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुरू हो गया है। पहले दिन वक्ताओं ने कुमाऊंनी के विकास और इसके अधिकाधिक प्रयोग के लिए एकजुट प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस मौके पर चार रचनाकारों को अलग—अलग सम्मानों से सम्मानित किया गया।
इस दफा कोविड—19 के दौर के चलते सम्मेलन सीमित तौर पर चल रहा है। पहले रोज मुख्य वक्ता गरूड़ (बागेश्वर) के शिक्षक एवं अनुवादक मोहन चंद्र जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि आज कुमाऊंनी में अनुवाद का कार्य व्यापक स्तर पर हो रहा है। कुमाऊंनी में रामायण व महाभारत से लेकर आधुनिक समय के ‘कामायनी’ जैसे महाकाव्यों के अनुवाद उपलब्ध हो चुका है। उन्होंने अन्य भाषाओं के श्रेष्ठ ग्रंथों का कुमाऊंनी में अनुवाद करने पर जोर दिया। इससे पहले दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का श्रीगणेश हुआ और जै नंदा लोक कलाकारों लता पांडे, विमला बोरा, शीला पंत, चंदन बोरा ने शकुनांखर व सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कहा कि कुमाऊंनी का विकास तभी संभव है, जब कुमाऊंनी अपने घर—परिवार में बोलें और कुमाऊंनी में अधिकाधिक साहित्य सृजन करें, जबकि कार्यक्रम का संचालन करते हुए कुमाऊंनी पत्रिका ‘पहरू’ के संपादक डा. हयात सिंह रावत ने कहा कि हमारे जन प्रतिनिधियों को भाषा—साहित्य के विकास पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार की साहित्य के प्रति उदासीनता उचित नहीं कही जा सकती है। श्री रावत ने जोर देकर कहा कि कुमाऊंनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति अल्मोड़ा द्वारा कुमाऊंनी भाषा—साहित्य के विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी रखा जाएगा, चाहे कोई सहायता मिले या नहीं।
सम्मेलन के पहले दिन कुमाऊंनी रचनाकार नवीन चंद्र जोशी को पान सिंह चम्याल स्मृति कुमाऊंनी भाषा सेवी सम्मान, त्रिलोक सिंह सतवाल को केएन जोशी अनुवाद लेखन पुरस्कार, डा. पवनेश ठकुराठी को गंगा मेहता स्मृति कुमाऊंनी कविता पुरस्कार और कृपाल सिंह शीला को बचुली देवी स्मृति इंटरव्यू लेखन पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में प्रो. सुंदर सिंह पथनी, आनंद सिंह बगडवाल, गोपाल चम्याल, आनंद बल्लभ जोशी आदि ने विचार रखे। इस मौके पर ललित तुलेरा, महेंद्र ठकुराठी, शशि शेखर जोशी, सुंदर सिंह सतवाल, रूप सिंह बिष्ट, शंकर पांडेय, गिरीश चंद्र मल्होत्रा, गीता मेहरा, किशन जोशी, सुंरेंद्र सिंह, पूरन चंद्र तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, राजेश अधिकारी, चंद्रमणि भट्ट, नरेंद्र नाथ, प्रताप सिंह सत्याल आदि कई लोग मौजूद रहे।

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