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हुक्मरानों, जागो : सो रहा विभाग, मौन साधे प्रतिनिधि, खामोश है अधिकारी वर्ग ! अल्मोड़ा—हल्द्वानी एनएच पर दुर्घटनाओं का सबब बने सड़क पर बने गड्ढे !

सुयालबाड़ी से अनूप सिंह जीना की रिपोर्ट —
शासन, प्रशासन व संबंधित विभाग की उदासीनता का यदी जीता—जागता उदाहरण देखना हो तो अल्मोड़ा—हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग की दशा पर गौर फरमाया जाना चाहिए। यहां नैनी पुल से कतियागाड़ तक जगह—जगह बने गड्ढे दुर्घटनाओं का आमंत्रित करते प्रतीत होते हैं। शायद ही कोई ऐसा सप्ताह जाता हो, जब इस खस्ताहाल सड़क मार्ग पर कोई दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल न हुआ हो। बावजूद इसके संबंधित जिम्मेदार विभाग है कि उसकी नींद ही नही खुलती है। फिर सिर्फ विभाग को ही क्यों दोष दें, जनता के वोट बैंक से जीतने वाले जन प्रतिनिधि और यहां रोजाना गुजरने वाले उच्चाधिकारी भी तो सब कुछ देख—सुन कर मौन साधे रहते हैं।
आपकों बता दें कि इस सड़क मार्ग में बने गढ्ढों में अकसर बरसात का पानी जमा हो जाता है। जिस कारण वाहन चालकों को इनका भान नही हो पाता है और अकसर दुर्घटनाएं हो जाती हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है वह कई बार एनएच विभाग को इस बावत शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सड़क के सुधारीकरण की कार्रवाई शुरू नही की जा रही है। उल्लेखनीय है कि यह सड़क मार्ग से अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ की ओर से आने वाले वाहन गुजरते हैं। यही मार्ग अल्मोड़ा व नैनीताल जनपद को आपस में जोड़ता है। व्यापारिक मंडी हल्द्वानी से राशन, सब्जी आदि की सप्लाई ट्रक व निर्माण सामग्री से भरे भारी वाहन भी इसी मार्ग का आवागमन के लिए उपयोग करते हैं। यही कारण है कि इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के रखरखाव के लिए भी विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। किंतु इसके बजाए संबंधित विभाग पूरे साल आंख मूंदे बैठा रहता है। सड़क मार्ग पर गड्ढे पड़ते रहते हैं, डामर उखड़ता रहता है और मानसून का इंतजार किया जाता है। जब मानसून आता है तो खस्ताहाल सड़क मार्ग की वजह से आपदाओं का सबब बन जाता है। अलबत्ता इस विषय में विभाग की कार्यशैली तो संदेह के दायरे में है ही, उससे भी अधिक उन जन प्रतिनिधियों की चुप्पी खलती है, जिन्हें जनता अपने वोट देकर यह सोचकर जीत का सेहरा पहनाती है कि वह उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार और संबंधित विभागों के बीच सेतु का काम करें। इसके बावजूद यही जनप्रतिनिधि उनकी सड़क संपर्क मार्गों के सुधारीकरण जैसे मांग की अनदेखी कर दिया करते हैं। वहीं इससे भी अधिक हैरानी की बात तो यह है कि अल्मोड़ा—हल्द्वानी राष्ट्रीय राज मार्ग से रोजाना दोनों जनपदों के उच्च पदों पर आसीन प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते हैं, लेकिन बड़े अफसोस का विषय है कि नैनी पु​ल से आगे की ओर कई किमी तक सड़क पर पड़े इन गढ्ढों और खस्ताहाल, दुर्घटना का सबब बने सड़क मार्ग की दुर्दशा की ओर उनका ध्यान ही नही जाता है। लगता है कि इस मार्ग पर शासन—प्रशासन व विभगा को किसी बड़ी दुर्घटना का बेसब्री से इंतजार है।

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