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पंजाब के लाइसेंस पर लिए गये असलाह बन सकते है चुनाव में सिर दर्द

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सितारगंज(नारायण सिंह रावत)—लोक सभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो जाने के बाद लाइसेंसी असलाह जमा करने का क्रम शुरू हो गया हैं। हालांकि अभी तक इसकी गति काफी धीमी हैं। अब तक दर्जन भर लाइसेंसी असलाह ही जमा हो पाये हैं। जबकि परगना क्षेत्र में लाइसेंसी असलाह की संख्या 975 हैं। क्षेत्र में पंजाब के लाइसेंस पर लिए गये असलहों की भी भरमार हैं। इन असलहों की संख्या कितनी हैं यह जानकारी पुलिस को भी नहीं। ऐसे में चुनाव के दौरान इन असलाह को जमा करारा संभव नहीं हो पाता। दस जनवरी को लोस चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद से ही पुलिस शांति व्यवस्था बनाये के लिए लाइसेंसी असलाह जमा कराती हैं। हालांकि पुलिस ने लाइसेंसधारकों से शस्त्र जमा कराने को कहा हैं। कहा गया है ​कि यदि शीघ्र शस्त्र जमा न कराये तो कार्यवाही की जायेगी। दूसरी तरफ देश की आजादी के बाद हुये विभाजन के बाद वर्तमान पाकिस्तान से आये लोगों को तराई में बसाया गया था। ये लोग पूर्व में पंजाब में भी रहे हैं। इनमें कई लोगों ने पंजाब में भी शस्त्र लाइसेंस बना रखे हैं। वहां के लाइसेंस पर तीन असलाह तक लिये जा सकते हैं। जबकि उत्तराखंड में एक लाइसेंस पर एक ही असलाह लेने का नियम है। ऐसे में जिनकी पंजाब में भूमि या संपत्ति हैं वे वहीं से लाइसेंस लेना बेहतर समझते हैं। बाद में वे असलाह को उत्तराखंड लाने की अनुमति लेकर यहां ले आते हैं। नियमानुसार ऐसे असलाह व लाइसेंस को जिले में दर्ज कराया जाना चाहिये। साथ ही इसकी जानकारी कोतवाली पुलिस को भी होनी चाहिये लेकिन ऐसा होता नहीं हैं। लेकिन पंजाब के लाइसेंसों पर लिए गये कुछ ही असलाह कोतवाली में दर्ज हैं। ज्यादातर के बारे में पुलिस को पता ही नहीं। चुनाव के दौरान भी ये असलाह जमा नहीं कराये जाते। यह बेहद गंभीर मामला हैं। राजनीतिक दलों में भी आपराधिक प्रवृति के लोगों की खासी पैठ हो चुकी हैं। इससे चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा बना रहता हैं। इधर कैलाश नदी में रेता बजरी के खनन के दौरान भी विभिन्न गुटों में विवाद होते रहते हैं। वहां भी ऐसे असलाह के प्रयोग की आशंका बनी रहती हैं।

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