अल्मोड़ाउत्तराखंड

अल्मोड़ा: बाल कहानी व बाल कविता लेखन कठिन कार्य— नौटियाल, कार्यशाला में हुआ ‘बच्चों की ऑनलाइन कहानी लेखन’ विषयक मंथन

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
बालप्रहरी तथा बाल साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित ‘बच्चों की ऑनलाइन कहानी लेखन’ विषयक कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं संदर्भ व्यक्ति प्रख्यात बाल साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने कहा कि बाल कहानी एवं बाल कविता लेखन बहुत कठिन कार्य है। इसके लिए पहले खुद बच्चा बनकर बच्चों के मनोविज्ञान को समझना होता है। कार्यशाला आनलाइन हुई। जिसमें बाल कहानी लेखन पर कई अहम् बातें सामने आईं।
बा​ल ​साहित्यकार मुकेश नौटियाल का कहना था कि इतिहास लेखन और कहानी लेखन में काफी अंतर है। एक अच्छी कहानी में सभी तत्वों का समावेश होने से ही कहानी को अच्छा कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कहानी में वास्तविक या कल्पना का वर्णन होता है। कहानी को किसी आयु वर्ग में नहीं बांटा जा सकता है, परंतु जहां बड़ों की कहानी में राजनीति, धर्म, सामाजिक विसंगतियां तथा हिसां जैसे असीमित विषय हैं, वहीं बाल कहानी का क्षेत्र बच्चों की आयु व उनके परिचित संसार तक सीमित होता है।
इससे पहले बालप्रहरी के संपादक तथा बाल साहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने कार्यशाला की रूपरेखा रखते हुए बच्चों को एक कहानी सुनाई। द्वितीय सत्र में कहानीकार मुकेश नौटियाल ने बच्चों को ‘चलता पत्थर’ तथा ‘एक दो तीन’ दो कहानी सुनाई। उसके बाद बच्चों ने खुले सत्र में अपने विचार रखे। आयकर विभाग से सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त श्याम पलट पांडेय (अहमदाबाद) ने बच्चों को रचनात्मक कार्यो की ओर अग्रसर करने के लिए कार्यशाला को उपयोगी बताया। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहानीकार खुशाल सिंह खनी ने कहा कि आज के दौर में बच्चों के लिए अवैज्ञानिक तथा अतार्किक कहानी के बजाय वैज्ञानिक सोच आधारित तर्कसंगत कहानी लिखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, धर्म तथा संप्रदाय के नाम पर बांटने वाली कहानियां बच्चों के लिए नहीं परोसी जानी चाहिए। आनलाइन कार्यशाला में सुधा भार्गव, श्याम पलट पांडेय, अशोक नेगी, मीरा सिंह ‘मीरा’, हरीश सेठी ‘झिलमिल’, उद्धव भयवाल, रीतू देवी, महेश रौतेला, डॉ. गीता नौटियाल, प्रभा उनियाल, पूरन लोधी, दीपा पंत ‘शीतल’, इंद्रा पांडे, कनक जोशी, भैरवदत्त पांडेय, नीलम राना, प्राची मल्होत्रा, किरन पाठक, चंद्रशेखर कांडपाल, दीपिका किरौला, जगत सिंह बिष्ट, विमल त्रिपाठी, कमलेश शक्टा, गीता जोशी, गीता कन्नौजिया, दीपाली विश्वास, निधि चतुर्वेदी सहित लगभग 8 दर्जन अभिभावकों तथा साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया।

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