यहां तो कोरोना संक्रमित District Judge को भर्ती करने से मुकर गया Private Hospital, CMO की भी जब नही सुनी, गरीबों की कौन सुनेगा ? जरूर पढ़िये Corona काल में Hospitals की मनमानी की यह News…..

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सांकेतिक फोटो

कोरोना महामारी के दौर में निजी अस्पतालों की भूमिका पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बड़ा सवाल यह है कि यह अस्पताल कोरोना पीड़ितों के लिए क्या थोड़े से भी संवेदनशील हैं या सिर्फ महामारी के दौर को अपने लिए रूपया कमाने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देख रहे हैं। दरअसल, उप्र. के कानपुर में घटे एक वाक्ये ने सबको चौंका दिया है। यहां कोरोना संक्रमित जिला जल को भर्ती करने से एक प्राइवेट अस्पताल ने साफ इंकार ही नही कर दिया, बल्कि अस्पताल के मालिक ने ‘जो चाहे सो कर लो’ की धमकी स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख यानी सीएमओ को दे डाली। हालांकि अब अस्पताल प्रशासन व मालिक के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अनुत्तरित प्रश्न यह है कि जब निजि अस्पताल एक जिला जज के साथ ऐसा सलूक कर सकते हैं तो आम आदमी की क्या दशा हो रही होगी ?

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आइये यह मामला अब विस्तार से आप भी जान लीजिए। चाहे आप किसी भी राज्य या शहर से हों, लेकिन यह खबर आपके लिए जरूर महत्वपूर्ण होगी। हुआ यूं कि बुधवार को कानपुर के जिला जज आर.पी सिंह कोरोना संक्रमित पाए गए। उन्हें पनकी स्थित कोविड प्राइवेट हॉस्पिटल नारायणा में भर्ती कराने के लिए सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने कागजी कार्रवाई पूरी की। फिर वे सिंह को लेकर अस्पताल पहुंचे। लिफ्ट से वे सिंह को फर्स्ट फ्लोर पर ले जा रहे थे। यह बंद हो गई। 15 से 20 मिनट फंसे रहने के बाद वे किसी तरह बाहर निकले। जहां जिला जज को भर्ती होना था, वहां न तो डॉक्टर था और न ही कोई अटेंडर। इसके बाद सीएमओ ने अस्पताल के मैनेजमेंट को फोन किया।

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इस दौरान कई मरीजों ने रोते हुए अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं की जानकारी दी। फोन करने के बाद भी मैनेजमेंट ने कोई सही जवाब नहीं दिया। तब उन्होंने हॉस्पिटल के मालिक अमित नारायण को फोन किया और अस्पताल के हालात की जानकारी दी। इस पर अमित भड़क गए। उन्होंने सीएमओ से कहा- ‘‘मेरा अस्पताल सीज करा दो। मुझे जेल भेज दो, जो चाहे वह कर लो’’ इसके बाद सीएमओ सीधे पनकी थाना पहुंचे।

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अस्पताल के प्रबंधक और डॉक्टरों व कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अलबत्ता पुलिस ने अब प्रबंधक अमित नारायण, डॉक्टरों व कर्मचारियों के खिलाफ धारा-166 बी, 269, 270, 188, 506 और महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिर भी सवाल यही है कि निजि अस्पताल किस तरह का रवैया कोरोना काल में अपना रहे हैं। यह अस्पताल मरीजों की तकलीफों को कतई समझने को तैयार नही हैं। देश पर क्या बीत रही है इससे इनका कतई कुछ लेना-देना नही है।

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