सीएनई रिपोर्टर, देहरादून

मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे छात्र—छात्राओं के लिए एक अच्छी ख़बर है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करना अब आसान हो जायेगा। सरकार ने कोर्स की फीस कम करने का निर्णय लिया है। आगामी कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि गत दिवस स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में इस फैसले से अवगत कराया है। उन्होंने बकायदा महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को इसका प्रस्ताव तैयार करने के आदेश भी जारी कर दिये हैं। उन्होंने अन्य राज्यों का अध्ययन करके राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स का शुल्क करने की बात कही है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उनकी इस संबंध में सीएम पुष्कर सिंह धामी से भी वार्ता हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भी एमबीबीएस छात्रों के शुल्क को अन्य राज्यों के समान रखने पर सहमति दी है।


स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत

हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जायेगा। यही नहीं, मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों की आयु सीमा में संशोधन एवं पर्वतीय जनपदों में स्थित मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी को वहां पर तैनाती के दौरान विशेष भत्ता दिये जाने संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाने के निर्देश जारी किये गये हैं। शिक्षा मंत्री ने Director General Medical Education C. Ravi Shankar को श्रीनगर, देहरादून एवं हल्द्वानी मेडिकल कॉलेजों का भ्रमण कर छात्रावासों में पेयजल एवं भोजन व्यवस्था तथा साफ-सफाई आदि का निरीक्षण करने के आदेश भी जारी किये।

अन्य प्रस्तावों में डॉ. धन सिंह रावत ने मेडिकल कॉलेजों में libraries को 12 से 14 घंटे खोले जाने, sports activities को बढ़ावा देने तथा कॉलेजों में खेल संबंधी सामाग्री उपलब्ध कराने के साथ ही वर्ष में एक बार Inter College Sports Competitions आयोजित कराने के भी निर्देश भी दिये हैं। मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में रिक्त assistant professors के पदों की जानकारी भी उपलब्ध करायें। ताकि ​नई नियुक्तियों के लिए State Medical Services Selection Board को आदेशित किया जा सके। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एमबीबीएस करने वालों की एक बहुत बड़ी संख्या है। कॉलेजों में यदि फीस कम हो जाये तो समझा जा रहा है कि हर तबके के योग्य छात्र—छात्राओं का डॉक्टर बनने का सपना साकार हो सकेगा। जिससे जहां चिकित्सकों की संख्या में इजाफा होगा, वहीं प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर होगी।

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