टमाटर फसल को हानि पहुंचाने वाले प्रमुख कीटों पर नियंत्रण कैसे करें यह बता रहे हैं डा. राजेंद्र कुकसाल

  1. सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई)- इस कीट के शिशु व वयस्क दोनों ही पत्तों की निचली सतह से रस चूसते हैं जिस कारण पत्तियां ऊपर की ओर मुड़नी शुरू होजाती है व पीली पड़ने लगती हैं साथ ही इनके द्वारा बनाये गए मधु बिन्दु पर काली फंफूद आ जाती है, जिससे पौधे का प्रकाश संश्लेषण कम हो जाता है| यह कीट वायरस जनित ‘पत्ती मरोड़क’ बीमारी भी फैलाता है|
  2. टमाटर फल छेदक (होलीयोथिस)-
    इस कीट की सुंडियां फलों में छेदकर इनके गूद्दे को खाती हैं और आधी फल से बाहर लटकती नजर आती हैं| एक सुंडी कई फलों को नुकसान पहुंचाती है| इसके अतिरिक्त ये पत्तों को भी हानि पहुंचाती हैं|
  3. तम्बाकू की इल्ली, कैटरपिल्लर, स्पोडोप्टेरा)- इस कीट की इल्लियां पौधों के पत्तों व नई कोंपलों को नुकसान पहुंचाती हैं| अधिक प्रकोप की अवस्था में पौधे पत्ती रहित हो जाते हैं| ये फलों को भी खाती हैं|
  4. पत्ती सुरंगक कीट (लीफ माइनर)- इस कीट के शिशु पत्तों के हरे पदार्थ को खाकर इनमें टेढ़ी-मेढ़ी सफेद सुरंगे बना देते हैं| इससे पौधों का प्रकाश संश्लेषण कम हो जाता है| अधिक प्रकोप से पत्तियां सूख जाती हैं|

जैविक विधियों से कीटों का नियंत्रण-

  1. खडी फसल का समय-समय पर निरीक्षण करें पौधों पर कीड़ों के अंडे, सूंडियों,प्यूपा तथा वयस्क यदि दिखाई दें तो पौधे के उस भाग को हटा कर एक पौलीथीन की थैली में इकट्ठा कर नष्ट करें।
  2. प्रकाश प्रपंच की सहायता से रात को कीड़ों को आकर्षित कर तथा उन्हें नष्ट करते रहना चाहिए। प्रकाश प्रपंच हेतु एक चौडे मुंह वाले वर्तन ( पारात,तसला आदि ) में कुछ पानी भरलें तथा पानी में मिट्टी तेल मिला लें उस बर्तन के ऊपर मध्य में विद्युत वल्व लटका दें यदि खेत में लाइट सम्भव न हो तो बर्तन में दो ईंट या पत्थर रख कर उसके ऊपर लालटेन या लैंम्प रख दें। साम 7 से 10 बजे तक बल्व, लालटेन या लैम्प को जला कर रखें। वयस्क कीट प्रकाश से आकृषित होकर बल्व, लालटेन व लैम्प से टकराकर वर्तन में रखे पानी में गिर कर मर जाते हैं। बाजार में भी प्रकाश प्रपंच/ सोलर प्रकाश प्रपंच उपलब्ध हैं।
  3. कीड़ों को आकर्षित करने के लिए फ्यूरामोन ट्रेप का प्रयोग करना व उन्हें नष्ट करना।
    फेरोमोन ट्रैप को गंध पाश भी कहते हैं। इसमें एक प्लास्टिक की थैली पर कीप आकार की संरचना लगी होती है जिसमें ल्योर ( गंध पाश ) लगाने के लिये एक सांचा दिया होता है। ल्योर में फेरोमोन द्रव्य की गंध होती है जो आसपास के नर कीटों को आकर्षित करती है। ये ट्रैप इस तरह बने होते हैं कि इसमें कीट अन्दर जाने के बाद बाहर नहीं आ पाते हैं। बीज दवा की दुकानों में फ्यूरेमोंन ट्रेप उपलब्ध रहते हैं।
  4. पीली एवं नीली स्टिकी ट्रैप का प्रयोग- स्टिकी ट्रेप पतली सी चिपचिपी शीट होती है। स्टिकी ट्रैप शीट पर कीट आकर चिपक जाते हैं तथा बाद में मर जाते हैं। जिसके बाद वह फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। स्टिकी ट्रैप कई तरह की रंगीन शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। इससे फसलों पर आक्रमणकारी कीटों से रक्षा हो जाती है और खेत में किस प्रकार के कीटों का प्रकोप चल रहा है इसका सर्वे भी हो जाता है। स्टिकी ट्रैप बाजार में बनी बनाई आती हैं और इन्हें घर पर भी बनाया जा सकता है। इसे टीन, प्लास्टिक और दफ्ती की शीट से बनाया जा सकता है। अमूमन यह चार रंग के बनाए जाते है, पीला, नीला, सफेद और काला। इसे बनाने के लिए डेढ़ फीट लम्बा और एक फीट चौड़ा कार्ड बोर्ड, हार्ड बोर्ड या टीन का टुकड़ा लें। उन पर सफेद, काला,नीला व पीला चमकदार रंग लगा दें रंग सूखने पर उनपर ग्रीस , अरंडी तेल की पतली सतह लगा दें। इन ट्रैपों को पौधे से 30 – 50 सेमी ऊंचाई पर लगाएं। यह ऊंचाई कीटों के उड़ने के रास्ते में आएगी। टीन, हार्ड बोर्ड और प्लास्टिक की शीट साफ करके बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि दफ्ती और गत्ते से बने ट्रैप एक दो बार इस्तेमाल के बाद खराब हो जाते हैं। ट्रैप को साफ करने के लिए उसे गर्म पानी से साफ करें और वापस फिर से ग्रीस लाग कर खेत में टांग सकते हैं। एक नाली हेतु दो ट्रेप प्रयोग करें। हर कीट किसी विशेष रंग की ओर आकर्षित होता है। सफेद मक्खी, ऐफिड और लीफ माइनर जैसे कीटों के लिए पीला स्टिकी ट्रेप बनाया जाता है। नीला स्टिकी ट्रैप थ्रिपिस कीट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  1. एक चम्मच डिटर्जेन्ट/ साबुन , प्रति दो लीटर पानी की दर से घोल बनाकर कर स्प्रे मशीन की तेज धार से कीटों से ग्रसित भाग पर छिड़काव करें। तीन दिनों के अन्तराल पर दो तीन बार छिड़काव करें।ध्यान रहे , छिड़काव से पहले साबुन के घोल को किसी घास वाले पौधे पर छिड़काव करें यदि यह पौधा तीन चार घंटे बाद मुरझाने लगे तो घोल में कुछ पानी मिला कर घोल को हल्का कर लें।
  2. एक लीटर , सात आठ दिन पुरानी छांच/ मट्ठा को छः लीटर पानी में घोल बनाकर तीन चार दिनों के अन्तराल पर दो तीन छिड़काव करने पर भी कीटों पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  3. एक कीलो लकडी की राख में दस मिली लीटर मिट्टी का तेल मिलाएं । मिट्टी का तेल मिली हुई लकड़ी की राख प्रति नाली 500 ग्राम की दर से कीटों से ग्रसित खड़ी फसल में बुरकें।
  4. पौधों पर राख बुरकने हेतु राख को मारकीन या धोती के कपड़े में बांध कर पोटली बना लें, एक हाथ से पोटली को कस्स कर पकड़े तथा दूसरे हाथ से डन्डे से पोटली को पीटें जिससे राख ग्रसित पौधों पर बराबर मात्रा में पढ़ती रहे।
  5. एक लीटर, आठ दस दिन पुराना गौ मूत्र का छः लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। गौमूत्र जितना पुराना होगा उतना ही फायदेमंद होगा। 10 दिनों के अन्तराल पर फसल पर गौमूत्र का छिड़काव करते रहें।
  6. कटवर्म , गुबरैला कीट के उपचार हेतु व्यूवेरिया वेसियाना ( जैविक कीटनाशक फफूंद ) 5 ग्राम एक लीटर पानी में घोल बनाकर सायंकाल में पौधे की जड़ के पास की भूमि को तर करें।
  7. नीम पर आधारित कीटनाशकों जैसे निम्बीसिडीन निमारोन,इको नीम या बायो नीम में से किसी एक का 5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर सांयंकाल में या सूर्योदय से एक दो घंटे पहले पौधों पर छिड़काव करें। घोल में सैम्पू या डिटर्जेंट मिलाने पर दवा अधिक प्रभावी होती है।
  8. फ्रुट फ्लाई कीट नियंत्रण हेतु ट्रेप फसल के रूप में गेंदें के पौधों का रोपण करें।
    ट्रेप फसल के रूप में टमाटर की 16 लाइनों के बाद गेंदें की एक लाइन लगायें। गेंदें की पौध बीज बुवाई के 45 दिनों तैयार हो जाती है जबकि टमाटर की पौध 30 दिनों में रोपण लायक हो जाती है अतः गेंदें बीज की बुवाई नर्सरी में टमाटर बीज बुवाई से 15 दिन पहले करें।
    गेंदें में फूल खिलने की अवस्था में फल भेदक मादा कीट गेंदें के फूलों की ओर आकृषित होकर गेंदें के फूलों पर अंडे देते हैं जिस कारण टमाटर की फसल को कम नुकसान पहुंचता है साथ ही गेंदें के पौधों की जड़ें भूमि में उपस्थित नीमेटोड को आकर्षित करते हैं जिससे टमाटर के पौधों का नीमेटोड के संक्रमण से बचाव होता है।

मोबाइल नंबर – 9456590999


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