अल्मोड़ाउत्तराखंड

अल्मोड़ा: होम्योपैथी ने बरकरार रखा है अपना दम, आंकड़े बोलते हैं पैथी में रूझान व विश्वास कायम

डा. पी.के. निगम

चन्दन नेगी, अल्मोड़ा। भले ही बीमारियों के उपचार की सभी पैथियों में ऐलोपैथी का वर्चस्व है, मगर इसका आशय ये कदापि नहीं कि लोगों ने अन्य पैथियों से दूरी बना ली है। आंकड़े बताते हैं कि होम्योपैथी से इलाज के लिए लोगों का अच्छा-खासा नाता है। होम्योपैथी उपचार के प्रति लोगों का रूझान संकेत देता है कि यह पैथी में बेहद दमदार व विश्वसनीय है। अकेले जिला अस्पताल अल्मोड़ा की होम्योपैथी विंग में हालिया वर्षों में उपचार कराने वाले लोगों की संख्या औसतन 8000 से 11000 के मध्य प्रतिवर्ष है और सभी अस्पतालों का आंकड़ा देखा जाए, तो यह संख्या कई गुना ज्यादा है।
मौजूदा भागदौड़ की जिंदगी में फुर्सत की कमी और फौरी उपचार की तमन्ना के कारण लोगों का आज एलोपैथिक उपचार की तरफ रूझान अत्यधिक है। दूसरा ये कि एलोपैथी में उपचार की समय के साथ-साथ नई-नई तकनीकें आ रही है। इसका असर भले ही उपचार की अन्य पैैथियों पर पड़ा। मगर इससे यह नहीं माना जा सकता कि होम्योपैथी या अन्य पैथियों के उपचार में कोई कसर है। इतना जरूर है कि इन पैथियों में एलोपैथ की तुलना में उपचार कुछ लंबे समय तक चलता है। मगर कई लोगों का कहना है कि होम्योपैथी से उपचार कराने में रोग का जड़ से ही खात्मा होता है। यह पैथी आज भी कारगर इलाज कर रही है और आज भी इसी पैथी से उपचार कराने में तमाम लोग पूर्ण विश्वास रखते हैं। ऐसा आंकड़े बताते हैं। अकेले अल्मोड़ा जिले की बात करें, तो जिले में कुल 17 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। अकेले जिला अस्पताल अल्मोड़ा की होम्योपैथी विंग का पिछले तीन सालों आंकड़ा है कि वर्ष 2017-18 में 11807, वर्ष 2018-19 में 8742 तथा वर्ष 2019-20 में 8131 लोगों ने अपने अलग-अलग रोगों का होम्योपैथिक उपचार कराया। अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले के सभी 17 अस्पतालों का आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा होगा और पूरे प्रदेश में होम्योपैथिक उपचार लेने वाले लोगों की संख्या लाखों में है। जिससे स्पष्ट है कि इस पैथी में उपचार का दम है।
क्या कहते हैं प्रभारी होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी:- जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा के होम्योपैथी विभाग के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. पी.के. निगम का कहते हैं कि गठिया, त्वचा रोग, गुप्त रोग समेत लगभग सभी बीमारियों का कारगर इलाज होम्योपैथी में है। यहां तक गठिया, सुराईसिस जैसी बीमारी का पूर्ण इलाज सिर्फ होम्यापैथी में है। इस पैथी में हर बीमारी तह में जाकर उसे जड़ से मिटाया जाता है। कतिपय भ्रांतियों के कारण कुछ लोग होम्योपैथिक उपचार से परहेज करते हैं। जो उचित नहीं है, हालांकि ऐसे लोगों की संख्या भी हजारों में है, जिन्हें होम्योपैथी उपचार पर पूर्ण विश्वास है और वह उपचार के लिए आते हैं। उनका कहना है कि भ्रांतियों से दूर रहकर मरीजों को होम्योपैथी उपचार के लिए निःशंकोच आना चाहिए।
डाक्टर नहीं मिलने से इस बीच घटी ओपीडी:- जिला अस्पताल की होम्योपैथिक विंग में मार्च के बाद से ओपीडी में गिरावट दर्ज हुई हैं। बताया जा रहा है कि प्रभारी होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी की कोरोना काल के चलते बने मेडिकल कंट्रोल रूम में ड्यूटी लगी है। इस कारण इस विंग में उपचार में आने वाले मरीजों को समय-समय पर प्रभारी होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

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