⏩ लगातार बढ़ रही बंदरों की तादात, आतंक से कोई मोहल्ला अछूता नहीं

⏩ फल-सब्जी उत्पादन तो दूर, किचन गार्डनिंग भी संभव नहीं

⏩ आतंक के चलते पैदल घूमना भी हुआ दूभर


सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

नगर व आस-पास के इलाकों में बंदरों की तादात में लगातार इजाफा हो रहा है। हालत इतनी बुरी है कि बंदरों के झुंड के झुंड लगभग नगर के हर मोहल्लों में दिखाई देने लगे हैं। इनकी आतंक से स्कूली बच्चों व राहगीरों का सुरक्षित निकलना तक मुश्किल हो चुका है और फल-सब्जी उत्पादन पूरी तरह चौपट हो चुका है। वहीं बंदरों द्वारा बीएसएनएल व अन्य केबल वायरों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

हाईवे में सड़क पर लटक वाहनों से उलझ रहे केबल वायर

बंदरों के उत्पात के चलते यहां नगर के धारानौला क्षेत्र में बीएसएनएल के केबिल वायर सड़क पर लटक रहे हैं और संभावित दुर्घटनाओं को निमंत्रण देने लगे हैं। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे में लगे विद्युत पोल से सड़क के बीचों-बीच लटकी केबल साफ देखी जा सकती हैं। यह लटकी हुई केबल वायरिंग पर मार्ग से गुजनने वाले ट्रक, बस, क्रेन व जेसीबी मशीन कई बार उलझ रही हैं, जिससे कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। ज्ञात रहे कि इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन व स्थानीय लोगों का आवागमन होता है। रात के समय किसी बड़े वाहन से यह बीएसएनएल की केबल उलझने से कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

नागरिक बोले, ”जीना दुश्वार किया बंदरों ने”

इधर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बंदर इन केबलों पर अकसर झूलते हैं, जिससे बार-बार केबिल हवा में तैरते हुए सड़क तक पहुंच जाती हैं। यही नहीं, पहले क्षेत्र में लोग अपने घर के आहते में आडू, खुमानी, अमरूद, लोकी, कद्दू आदि फल सब्जी उगाया करते थे, लेकिन बंदर इतना नुकसान कर रहे हैं कि लोगों ने किचन गार्डनिंग तक बंद कर दी है। आम नागरिकों का कहना है कि ऐसा अंदेशा है कि बाहरी इलाकों से लाकर भी बंदर अल्मोड़ा में छोड़े जा रहे हैं। यही कारण है कि इनकी तादात लगातार बढ़ रही है। यहां तक कि सुबह-शाम लोग सुरक्षित ढंग से घूमने तक नहीं निकल पा रहे हैं। नागरिकों ने जिला प्रशासन, वन विभाग व पालिका प्रशासन से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई सार्थक पहल करने की मांग की है।

टीम सहित गांव-गांव पहुंची डीएम अल्मोड़ा वंदना सिंह, दिये यह निर्देश

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