सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर

कत्यूरघाटी की ईष्ट देवी कोट भ्रामरी में नंदाष्टमी को श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। मां नंदा के डोले को भक्तों ने नम आंखों के साथ विदाई दी। मेलाडुंगरी के ग्रामीणों ने डोला विसर्जित किया। इधर, नुमाइशखेत मैदान में नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में प्राणप्रतिष्ठा हुई। इधर, बागनाथ मंदिर परिसर में आयोजित गणेश महोत्सव का मूर्ति विसर्जन के साथ समापन हो गया है। उधर, बिलौनासेरा में गणेश महोत्सव की धूम मची हुई है।


कोट भ्रामरी मंदिर में मंगलवार को मेला क्षेत्र में मां नन्दा का डोला निकाला गया। डोले में हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की। इस मौके पर महिलाओं ने डोले में चावल व रुपये भी चढ़ाए। मेलाडुंगरी के ग्रामीणों ने मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया। इस मौके पर हजारों लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।इस दौरान मां नन्दा संगठन मेलाडुंगरी के संयोजक दीवान सिंह भंडारी, सह संयोजक बलवंत सिंह भंडारी, सुंदर सिंह, प्रताप सिंह, दरवान भंडारी, गोपाल सिंह, केदार सिंह आदि मौजूद थे।
देवी के ननौल गाए


कोट भ्रामरी मेले की दूसरी रात्रि को द्यौनाई व भगरतोला के बोरा बंधुओं ने मां नन्दा के ननौल गाए। इस दौरान विधायक चंदन राम दास, भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, ननौल गायक केदार सिंह बोरा, रणजीत सिंह बोरा, कैलाश सिंह, सुंदर सिंह आदि मौजूद थे।
भगनौलों ने मन मोहा

बुजुर्ग लोक गायकों द्वारा गाए भगनौल मेले का खास आकर्षण रहे। वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल दत्त पाठक का कहना है कि यहीं मेले का पौराणिक व वास्तविक स्वरुप है। उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। कौतिक देखने के लिए दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से महिला कौतिक्यार डंगोली पहुंचे थे। मेले में बच्चों, युवाओं व महिलाओं का उत्साह देखने लायक था।कौतिक में इस बार खासी जनभागीदारी देखने को मिली।
गणेश मूर्तियां सरयू में विसर्जित

बागनाथ मंदिर में आयोजित गणेश महोत्सव का मंगलवार शाम समापन हो गया है। गणेश भगवान की मूर्तियों को सरयू नदी में विसर्जित किया गया। इस दौरान विनोद वर्मा, अमित रस्तोगी, गोरखनाथ, प्रशांत रस्तोगी, अर्जुन, उदित रस्तोगी, ईशान वर्मा आदि मौजूद थे।

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