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ब्रेकिंग न्यूज : जब दुनिया घरों में दुबकी थी तब निम के पर्वतारोही लांघ रहे थे पहाड़, कल ही वापस लौटी टीम ने फतह किए तीन अनारोहित चोटियां

देहरादून। जब पूरी दुनिया कोरोना के खौफ से घरों में दुबकी बैठी थी तब नेहरू पर्वतारारोहण संस्थान, उत्तरकाशी के पर्वतारोही हिमालय की ऐसी चोटियों को लांघ रहे थे जिन पर आज तक न तो कोई चढ़ सका है और न उनका नामकरण ही किया जा सका है। तीन पर्वतारोहियों का यह दल अपने रिकार्ड बनाकर कल शाम ही वापस लौटे हैं।


कोविड-19 काल में जब लगभग सभी बाहरी क्रियाकलापों पर रोक लगी हुई थी, संस्थान ने नियमों का पालन करते हुए उत्तरकाशी में स्थित अनाम व अनारोहित पर्वत शिखरों पर आरोहण करने का निश्चय किया। जिससे एक सकारात्मक संदेश देश विदेश के साहसिक क्रियाकलापों में रूचि रखने वाले लोगों को मिल सके।

इससे उत्तराखण्ड में साहसिक पर्यटन
को प्रोत्साहन मिलेगा। इसी क्रम में संस्थान अत्यन्त दुर्गम क्षेत्र निलांग घाटी में स्थित तीन प्रमुख शिखरों नागा (4790मीटर), कू (5871मीटर) व अनाम शिखर (5616मी) के आरोहण के लिये 27अगस्त का अभियान का आरम्भ किया। विदित है कि इन पर्वत शिखरों पर अभी तक
किसी दल ने आरोहण नहीं किया है। संस्थान के तीन सदस्य पर्वतारोहण दल ने उक्त पर्वत शिखर को 31 अगस्त और एक सितंबर को रिकाॅर्ड अवधि 06 दिनों में इन चोेटियोंका आरोहण किया तथा इन पर्वत शिखरों से सम्बन्धित सभी आवश्यक जानकारी जुटाई।


अभियान दल का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने एल्पाइन स्टाइल में किया। दल के अन्य सदस्य नायब सूबेदार गिरिश सिंह नेगी, तथा हवलदार अनिल कुमार थे। और यह अभियान दल कल सफलतापूर्वक वापस आ गया।


उत्तराखण्ड़ हिमालय में उत्तरकाशी जिले को साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण में अव्वल स्थान में लाने को निम प्रतिबद्ध है। इस दिशा में विगत 2 वर्षों निम द्वारा अनाम व अनारोहित पर्वत शिखरों पर पहली बार सफलापूर्वक चढ़ने का रिकाॅर्ड बना चुका है। प्रधानाचार्य ने इन पर्वतों के विषय में सभी जानकारियां इंण्डियन माउंटेनियरिंग फाउण्डेशन और उत्तराखण्ड़ टूरिज्म में दर्ज करा दी जायेगी।

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