Indian Spitz Dog
Indian Spitz Dog

⏩ जा​निये खूबियां और कमियां, कीमत, प्रॉब्लम के साथ सब कुछ

अगर आप कुत्ता पालने के शौकीन हैं, लेकिन आप एक छोटे फ्लैट या फिर किराये के मकान में रहते हैं तो कुत्ते का चुनाव बड़े सोच-विचार कर कीजिए। अकसर लोग समाज में अपनी शान दिखाने को बड़ी साइज के और विदेशी नस्ल के महंगे कुत्ते पाल लिया करते हैं, लेकिन उन्हें इसका कतई अनुभव नहीं होता कि इन बड़ी प्रजाति के कुत्तों को घूमने-फिरने और खेलने के लिए विशाल इलाका भी चाहिए। यदि हमसे पूछे कि भारत के किसी भी राज्य में सबसे आसानी से कम खर्चे में पलने वाला कुत्ता कौन सा है तो इंडियन स्पिट्स (Indian Spitz Dog| का कोई मुकाबला नहीं है।

तो आइये इस प्रजाति के कुत्ते के बारे में हम विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं। इंडियन स्पिट्स आम तौर पर पॉमेरियन (Pomeranians) नस्ल के कुत्ते से काफी मिलते-जुलते हैं, लेकिन वास्तव में यह पॉमेरियन से एक अलग प्रजाति है। बचपन में इनमें और पॉमेरियन नस्ल में फर्क करना आसान नहीं है, लेकिन लगभग 7-8 माह में इनमें पॉमेरियन से अलग फर्क साफ महसूस हो जाता है। यह Indian Spitz Dog पॉमेरियन की तुलना में आकार में न केवल अधिक बड़े, बल्कि ज्यादा ताकतवर भी होते हैं। जहां पॉमेरियन जल्दी बीमार पड़ता है, वहीं इंडियन स्पिट्स (Indian Spitz Dog) की यदि उचित देखभाल की जाये तो यह अन्य किसी भी नस्ल के कुत्तों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं।

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इंडियन स्पिट्स (Indian Spitz Dog) का इतिहास

विकीपीडिया के अनुसार इन कुत्तों को पहली बार 19 वीं शताब्दी के दौरान अंग्रेज भारत लेकर आये थे। यह भारत में जर्मन स्पिट्ज के उत्तराधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। दरअलस, ब्रिटिसर्स भारत में कुत्तों की एक ऐसी नस्ल तैयार करना चाहते थे, जो यहां के मौसम के अनुसार ढल सकें। साथ ही उनमें जर्मन नस्ल के कुत्ते की तरह बुद्धिमत्ता भी हो। ऐसे में बेहतरीन प्रजनन के बाद यहां इंडियन स्पिट्स कुत्तों ने अपनी आबादी बढ़ायी। 1980 और 1990 के दशक में भारत सरकार द्वारा आयात नियमों में जब कुछ प्रतिबंध लगाए तो भारतीय स्पिट्ज लोकप्रिय हो गये। जब विदेशी कुत्तों का आयात बंद हुआ तो भारतीयों ने स्वदेशी और स्थानीय नस्लों की ओर रुख किया। यह कुत्ते हर जलवायु के अनुकूल हैं और छोटे अपार्टमेंट और बड़े, खुले घरों में समान रूप से आराम से रह लेते हैं।

ऐसे रखें अपने प्यारे Indian Spitz Dog को स्वस्थ –

Indian Spitz Dog भोजन के नियम –

⏩ इस नस्ल के कुत्तों को जब लगभग चार-पांच माह तक हल्का गीला भोजन दिया जाना चाहिए। नमक और मीठे से ताउम्र परहेज रखना है। चार माह तक यह बाजार में मिलने वाले सेरोलक (cerelac) पर निर्भर रह सकते हैं।

⏩ चार माह बाद इन्हें आप घर में बनी दूध में मिली चपाती और मलाई दे सकते हैं, लेकिन याद रखें अधिक मात्रा में दूध नहीं देना है। सबसे बेहतरीन उपाय यह है कि बाजार में उपलब्ध पेडीग्री सूप (pedigree) का प्रयोग शुरू कर दें।

⏩ बाजार में पेडीग्री या किसी अन्य ब्रांड का रेडीमेट सूप का पैकेट 35 से 40 रूपये में उपलब्ध है। आठ माह तक इन्हें आधा पैकेट रोटी में मिला और आधा कप गर्म पानी मिला दें। आठ माह बाद एक पैकेट दो से तीन रोटियों के बारीक टुकड़ों के साथ गर्म पानी मिला यही सूप दें।

⏩ इंडिन स्पिट्स हो या किसी भी अन्य प्रजाति का कुत्ता इन्हें नमक, मिर्च-मसाले वाला इंसानी भोजन कतई नहीं दे। बाजार से बिस्कुट, टॉफी, चॉकलेट से भी परहेज करें।

⏩ बहुत से लोग इंडियन स्पिट्स को मटन, चिकन, अंडा, मछली जैसा भोजन देने लगते हैं, लेकिन यह भोजन इस प्रजाति के लिए अमूमन उचित नहीं है। यदि नॉनवेज दे रहे हैं तो हड्डी रहित दें और सप्ताह या फिर 15 दिन में सिर्फ एक बार सीमित मात्रा में ही दें। एक दिन में दो अंडे से अधिक भूलकर भी नहीं दें।

⏩ वैसे इस प्रजाति के कुत्तों के लिए सबसे बेहतरीन भोजन यही होगा कि सुबह के समय आप इनके बॉउल में पेडीग्री दाना और शाम को पेडीग्री सूप दें। यदि आप इनका नियमित भोजन यही करें तो यह बहुत कम बीमार पड़ेंगे और इन्हें तमाम पोषक तत्व भी मिलेंगे।

व्यायाम का महत्व –

⏩ हर प्रजाति के कुत्तों को एक्सरसाइज की जरूरत होती है। डॉग एक्सपर्टस का कहना है कि आलसी लोगों को कतई कुत्ते नहीं पालने चाहिए। यदि आप अपने कुत्तों के साथ खेलते नहीं है या सुबह-शाम सैर पर नहीं ले जा सकते तो आपको कुत्ते पालने ही नहीं चाहिए।

⏩ इंडियन स्पिट्स पर भी य​ह नियम लागू होता है। यदि आप इन्हें कसरत नहीं करायेंगे तो यह स्वभाव से चिड़चिड़े और आक्रमक हो सकते हैं तथा उदास-बीमार भी रहने लगेंगे। इन्हें रोज मध्यम व्यायाम की आवश्यकता होती है।

Indian Spitz Dog जीवन काल –

⏩ इंडियन स्पिट्स का जीवन काल 12 से 15 साल के बीच होता है। यदि इनकी सही तरीके से देखभाल हो और भोजन-व्यायाम आदि का सही अनुपात रहे तो यह 18 साल तक की आयु तक भी जी जाते हैं। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपका सबसे अच्छा मित्र, साथी आपके साथ लंबे समय तक रहे तो उसकी बहुत देखभाल करें।

स्नान व टीकाकरण –

⏩ इंडियन स्पिट्स डॉग को रोज स्नान नहीं कराना चाहिए, खास तौर पर सर्दियों में। 15 दिन या माह में एक बार इन्हें नहलाया जाना चाहिए, वह भी धूप में और गुनगुने पानी में। इससे इनके शरीर पर कीड़े नहीं पड़ेंगे और य​ह अधिक चुस्त रहेंगे। हां, कीड़ों से बचाने के लिए आप अपने वेटनरी डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। पैदा होने के लगभग तीन माह बाद आप पशु चिकित्सक के पास जायें वह आपको एक टीकरण का चार्ट देंगे, उसे फॉलो करें।

सौंदर्य और देखभाल –

इस नस्ल के कुत्ते खुद को साफ रखना पसंद करते हैं। अतएव इनके लंबे बालों को अच्छी स्थिति में रखने के लिए नियमित रूप से ब्रश करने की जरूरत पड़ती है। जब भी नहलायें तो एक कंघी से इनके फर की ब्रशिंग करें, जिससे इनके अनावश्यक बाल गिर जायेंगे और अच्छे बाल सलामत रहेंगे। इनके कोट डबल स्तरित हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि आपके पास डबल-पंक्ति ब्रश है ताकि आप मोटे अंडरकोट तक पहुंच सकें।

व्यवहारगत अच्छाई और बुराई –

⏩ इंडियन स्पिट्स में कुछ व्यवहारगत अच्छाई व बुराई यह है। अच्छाई यह है कि यह अपने मालिक से बहुत प्यार करते हैं और बेहद वफादार होते हैं। इसके अलावा यह काफी फ्रेंडली होते हैं। अगर आप इन्हें अच्छी शिक्षा बचपन से देंगे तो यह किसी को नहीं काटेंगे और घर पर सभी सदस्यों के साथ खूब खेलेंगे। साथ ही यह बहुत अच्छे वॉच डॉग भी हैं। जरा सी हल्की आहट भी सुन लेते हैं और भौंक कर आपको सतर्क कर देते हैं कि कोई आपके भवन के परिसर में दाखिल हो गया है। यदि आप घर पर डोर बेल नहीं भी लगायें तो यह भौंक-भौंक कर आपको सतक कर देंगे।

⏩ इनकी यदि बुराई की बात करें तो सिर्फ यही है कि यह भौंकते बहुत ज्यादा है। दरअसल, यह इतने अलर्ट होते हैं कि घर पर यदि कोई अपरिचित दाखिल हो जाये तो यह आपके चुप कराने पर भी जोर-जोर से भौंकते रहेंगे। यह अपने परिसर की सीमा रक्षा के लिए इतने चौकन्न होते हैं घर के पास से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर भौंकते हैं। इससे कई बार आप परेशान हो सकते हैं। इसके अलावा एक दिक्कत और है कि यह जब अपने मालिक के साथ होते हैं तो अपने को किसी शंहशाह से कम नहीं समझते और बड़े आकार के खतरनाक कुत्तों से भी लड़ जाते हैं। ऐसे में आपको विशेष सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि बड़ी नस्ल के कुत्ते इन्हें लड़ाई होने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

आप शायद यह भी जानना चाहें –

⏩ इंडियन स्पिट्ज वही बन जाता है जो इसका मालिक इसे बनाना चाहता है। कुत्तों की यह नस्ल जल्दी सीखने की काबिलियता के कारण जानी जाती है। इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह खेलना पसंद करती है और खेलते समय बहुत खुश हो जाते हैं। यह कुत्ता गृह रक्षक और अभिभावक की तरह काम करता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह बड़े होकर वही बन जाता है, जो आप इसे बनाना चाहते हैं। यानी अगर आप इसे हिंसक और आक्रमक बनायें तो बन जायेगा और अगर आप चाहें कि यह सबके साथ दोस्ताना संबंध बनाये तो यह आपकी ट्रेनिंग पर ही निर्भर है। हालांकि, अजनबियों पर शक करना और भौंकना तो इसकी स्वाािविक प्रवृत्ति है तथा घर की रखवाली करना इसका स्वभाव है। हां, एक बड़ी बात यह अलगाव पसंद नहीं करता। जिसका मतलब यह है कि अगर यह आपसे बहुत लगाव रखता है तो आप इसे छोड़कर कहीं चल जायें तो यह कभी खुश नहीं रहेगा। यानी, अगर आप इंडियन स्पिट्स को घर ला रहे हैं तो यह जान लीजिए कि जिस सदस्य से यह प्यार करता है वह कभी इसे छोड़कर नहीं जाये।

कीमत सबसे सस्ती –

⏩ वैसे कीमतों के बारे में बात करें तो इस प्रजाति के कुत्तों के गुण ज्यादा हैं और कीमत सस्ती। आप इसे अपने शहर के किसी भी डॉग ब्रीडर से महज 03 से 06 हजार में खरीद सकते हैं। यदि आप पहली बार कुत्ता पाल रहे हैं तो यह देख लेना जरूरी होता है कि कुत्ते की फैमली हिस्ट्री क्या है। यानी जिसके वहां इसने जन्म लिया है उसकी मां का किस ब्रीड के डॉग के साथ संपर्क होने पर यह पैदा हुआ है, क्येांकि कुत्तों में ब्रीड बहुत महत्व रखती है। इसके अलावा अपने ब्रीडर से इसकी सही जन्मतिथि और अब तक हुई वैक्सीनेशन की भी जानकारी भी खरीदने से पहले प्रमाण सहित ले लीजिए। देखा गया है कि अधिकांश डॉग ब्रीडर केवल पैसा कमाने तक सीमित रहते हैं और एक बार यदि आपने उनसे कुत्ता खरीद दिया तो वह आपको कुछ नहीं बतायेंगी। इसलिए खरीदने से पूर्व ही कुत्ते के बारे में पूरी जानकारी अवश्य ले लीजिए.

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