ओपीडी के साथ यूजेज चार्जेज की आमदनी गिरी
— अल्मोड़ा से वरिष्ठ संवाददाता चंदन नेगी की रिपोर्ट —

कोरोना महामारी के चलते हर जगह कुछ ना कुछ समस्याएं हैं। इसका असर जिला अस्पताल अल्मोड़ा पर भी है। लॉकडाउन के बाद से अस्पताल की ओपीडी लगभग 50 फीसदी कम हो गई। जिससे अस्पताल को यूजेज चार्जेज से प्राप्त होने वाली आमदनी में काफी गिरावट दर्ज हुई है। इसका सीधा प्रभाव अस्पताल के नये कार्यों या व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
कोरोना के संकटकाल में हर कोई कुछ न कुछ समस्या झेलने को मजबूर हुआ है। भले ही समस्या बड़ी या छोटी हो सकती है, मगर है सबके सामने। जिला अस्पताल कोरोना महामारी को देखते हुए चौकन्ना है और अस्पताल के डाॅक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी अपनी अपनी ड्यूटियों पर मुस्तैद हैं। इस सबके के बावजूद समस्या से अस्पताल भी अछूता नहीं है।

शहर के मध्य स्थित इस अस्पताल पर न केवल शहर के ही मरीजों का दबाव है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी अधिसंख्य उपचार को यहां पहुंचते हैं। लॉकडाउन से पूर्व तक अस्पताल की ओपीडी करीब करीब 600 प्रतिदिन थी। जिससे अस्पताल को यूजेज चार्जेज से अच्छी आमदनी होती है और इस आमदनी से अस्पताल की कई व्यवस्थाएं अस्पताल प्रबंधन समिति मरीजों की सुविधा के लिये करती है।
लाकडाउन के बाद से आम मरीजों का अस्पताल पर दबाव काफी कम हो गया। बहुत जरुरी होने पर ही लोग चेकअप या इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी करीब 50 फीसद गिर गयी। स्वाभाविक रुप से इसका असर यूजेज चार्जेज की आमदनी पर पङा है।


इस संबंध में अस्पताल के पीएमएस डाॅ. आरसी पन्त ने बताया कि लाकडाउन में ओपीडी 50 फीसदी से भी कम हो गयी। जो पहले की तुलना घटकर ढाई सौ से तीन सौ के बीच सिमट गयी। उन्होंने बताया कि इनमें भी कई वे गरीब लोग शामिल हैं, जो यूजेज चार्जेज से मुक्त हैं। ऐसे में यूजेज चार्जेज की आमदनी काफी कम हो चुकी है। उन्होंने बताया यूजर चार्ज से उन कर्मचारियों का मानदेय दिया जाता, जो प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न कार्यों के लिये रखे गये हैं और कुछ धन अस्पताल की अन्य जरुरी व्यवस्थाओं में लगाया जाता है। मगर यूजेज चार्जेज में कमी से परेशानी आना स्वाभाविक है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनके द्वारा उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। गौरतलब है कि अस्पताल में प्रबंधन और उपनल से 37 कर्मचारी रखे गये हैं। फिलहाल समस्या को हल करने के प्रयास चल रह हैं।

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