सांकेतिक फोटो

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कोयले की पर्याप्त उपलब्धता होने के दावे के बावजूद दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में कोयले की कमी का संकट पैदा हो गया है जिसके कारण बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है और बड़े पैमाने पर बिजली की कटौती की जा रही है।

दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली टाटा पावर कंपनी ने लोगों से बिजली का उचित इस्तेमाल करने का आग्रह हुए कहा है कि कोयले की कमी के कारण ऊर्जा उत्पादन बाधित होने से बिजली आपूर्ति में कटौती की जा सकती है। दिल्ली के कई इलाकों में पर्याप्त बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

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दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन इस संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक भी की है जिसमें केंद्र सरकार से दिल्ली के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने की मांग कोयला मंत्रालय से की गई है। दिल्ली को एनटीपीसी से कोयले की आपूर्ति की जाती है। दिल्ली के पास कम से कम एक महीने का कोयला स्टॉक रहता था लेकिन अब यह घटकर एक दिन का हो गया है जिससे दिल्ली में बिजली संकट गहरा सकता है।

दिल्ली में बिजली की आपूर्ति करने वाले टाटा पावर का कहना है कि कोयले की कमी का उसे भारी संकट झेलना पड़ रहा है जिसके कारण उत्तर तथा उत्तर पश्चिम दिल्ली में बिजली आपूर्ति में दो से छह घंटे की कटौती की जा सकती है। दिल्ली के अन्य इलाकों में भी बिजली कटौती की जा सकती है।

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उत्तर प्रदेश में बिजली संकट और गहराया गया है और वहां 14 संयंत्र काम नहीं कर रहे जिनमें से आठ संयंत्रों में कोयले की कमी के कारण उत्पादन नहीं हो पा रहा है। दिल्ली से सटे नोएडा में पिछले दो दिनों से लोगों को दो से पांच घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड का कहना है कि उसके पास 20 से 25 फ़ीसदी तक कोयले की कमी हो गई है जिसके कारण ऊर्जा संयंत्र नहीं चलाए जा रहे हैं और क्षेत्र में बिजली का भारी संकट पैदा हो सकता है। खबरें वही जो समय पर मिले, तो जुड़िये हमारे WhatsApp Group से Click Now

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उत्तर प्रदेश में बिजली का संकट किस कदर गहराया है, इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि राज्य में 17000 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन वहां सिर्फ 15000 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन किया जा रहा है जिससे कई घंटों तक बिजली कटौती करनी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश के गांवों में सात-सात घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है जबकि तहसीलों में तीन से साढ़े तीन घंटे की बिजली कटौती करनी पड़ रही है।

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