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आपकी बात : बसों का किराया बढ़ने पर पाठकों के विचार आमंत्रित हैं, तुरंत… इस लिंक को रिफ्रेश करते रहें

हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कैबिनेट की आज संपन्न हुई बैठक में रोडवेज की बसों का किराया बढ़ा दिया गया है। अब साधारण व सेमी डीलक्स बसों में सवारी करने वाले लोगों को पहले से दो गुना और वाल्वों में सफर करने वालों को तीन गुना किराया चुकाना होगा। आपको भी इस विषय में कुछ कहना है तो आप हमें 7895783639 पर व्हाट्सअप कर सकते हैं। स्मरण रहे कि आपकी टिप्पणी हिंदी में लिखी होनी चाहिए और किसी तरह से आपत्तिजनक भाषा का उपयोग न करेंं, टिप्पणी में नीचे अपना नाम व पता अवश्य लिखें, और यह भी लिखें की आप क्या काम करते हैं। मसलन व्यापारी हैं, राजनीतिक पार्टी से हैं या फिर प्राइवेट या सरकारी नौकरी करते हैं। आपकी टिप्पणी इसी लिंक पर अपलोड की जाएगी। इसलिए लिंक को बार रिफ्रेश करते रहें।

आज जैसा माहौल है, यह देखते हुए राज्य सरकार का रोडवेज परिवहन के किराए को दोगुना करना बिल्कुल ही गलत है। जहां एक ओर आम जनता चाहे व्यापारी हो अथवा नौकरी पेशा, बेरोजगार हो या मजदूर या फिर किसी अन्य वर्ग का का इंसान आर्थिक स्थिति से सक्षम नहीं है। पहले ही आम जनता पर कोविड-19 की मार पड़ी हुई है। उस पर दिन पर दिन बढ़ने वाली महंगाई और इस तरह से किराए में वृद्धि। हम माननीय मुख्यमंत्री से पूछना चाहेंगे कि आज के समय को देखते हुए आपने किराया तो दोगुना कर दिया है परंतु आज से कुछ समय बाद जब सारी स्थितियां पहले की तरह हो जाएंगी और पहले की तरह ही यात्रियों को ठूंस—ठूंस कर भरा जाएगा, क्या उस समय यह बढ़ा हुआ किराया पहले की तरह सामान्य हो जाएगा? आज हम सब जानते हैं एक बार किराया बढ़ गया तो सरकार 1 रुपया भी कम नहीं करती। ऐसे में हमारी यही विनती है कि सरकार अपने इस फैसले को वापस ले।
पवन कुमार
व्यापारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता, हल्द्वानी

मेरा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से निवेदन है की इस महामारी के समय आप ने रोडवेज बसों का किराया दुगुना करने की बात की है, जबकि एक गरीब परिवार का सदस्य या गरीब परिवार से किसान रोडवेज बसों में आवाजाही करता है। तो इस आपदा के समय आप ने एक गरीब किसान की मदद करने के बजाय रोडवेज बसों का किराया दुगुना करने का निर्णय लिया है। में खुद एक गरीब परिवार का किसान हूं। आपका यह निर्णय बहुत गलत है। आप पहाड़ के गरीब जनता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उत्तराखंड की जनता सब समझ चुकी है, मेरी मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना है कि आपका जो रोडवेज बसों का किराया दुगुना करने का निर्णय लिया है कृपया इस फैसले को वापस लेने की कृपा करें। आप इस मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का कष्ट करें।
जयपाल सिंह अधिकारी
किसान,द्वाराहाट जिला, अल्मोड़ा

मैं माननीय मुख्यमंत्री महोदय से (इस cne न्यूज चैनल के माध्यम से)
अनुरोध करना चाहूंगा कि जो भी लोग सरकारी बसों या किसी भी तरह के अन्य वाहनों का उपयोग करते हैं वह ज्यातर गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
और इस प्रकार (जब किसी के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। अकस्मात किराया बढ़ाने में सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।चाहे वह विधार्थी हों या कोई किसान। मैं मुख्य्मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि इस पर एक बार पुनः विचार किया जाए।

विनोद पनेरू
विधार्थी
गल्पा पदमपुर (नैनीताल)

देश की स्थिति वैसे ही खराब है। ऐसे में आम लोगों पर किराये का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से और कमजोर करेगा। सरकार का फैसला गलत है उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
तनुज
सभासद, कपकोट नगर पंचायत, बागेश्वर

पूरे देश में आर्थिक स्थिति देश में खराब है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार सरकारी बसों का किराया बढ़ा रही है। सरकार को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए वर्ना हम आम आदमी के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे।
दिनेश मोहनीय
प्रदेश प्रभारी, आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड

सरकार को जनता की परेशानी से कोई मतलब नहीं है। क्वारेंटाइन सेंटर में लोग मर रहे हैं। लोग सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं और सरकार उसके कंधों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। सरकार को बढ़े हुए बसों के रेट वापस लेने चाहिए, वर्ना लोग सड़कों पर उतर आएंगे।
दीपक पांडे
प्रदेश कोषाध्यक्ष, आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड

सरकारी बसों में वही चलता है जो अपने वाहन का बोझ सहन नहीं कर पाता। और ऐसे में सरकारी साधन में भी किराया बढ़ा दिया जाए तो आम आदमी कैसे सफर करेगा। मेरे विचार को सरकार को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए।
सुरेश खेतवाल
नगर पालिका अध्यक्ष, बागेश्वर

मैं माननीय मुख्यमंत्री और परिवहन अधिकारी महोदय से ये अनुरोध करता हूं कि आर्थिक संकट झेल रहे लोगों पर इस समय किराये को बढ़ाना बहुत ही गलत हैं। जो कि आपातकाल के इस कठिन समय में जनता को राहत देने की बजाय किराये को बढ़ाने का निर्णय कर रही है। बसों में सफर एक मध्यम व निम्न वर्ग का परिवार ही यात्रा करता है। अगर इस महामारी में ये निर्णय लिया जाता हैं बहुत गलत निर्णय है। में पुनः आपसे अनुरोध करता हूं कि अपना निर्णय वापस लीजियेगा और गरीब परिवारों को राहत दीजिए।
कैलाश महरा
भारतीय सेना,चोरगलिया

सरकारी बसों की आवश्यकता उसे पड़ती है जिसके पास अपने वाहन नहीं है। खासकर ग्रामीण इलाकों में सरकारी या निजी बस यातायात का बहुत ही प्रभावी साधन है। सरकार को यदि निजी बस मालिकों को राहत ही देनी है तो उनकी ईएमआई, उनपर लगने वाले टैक्स को कम कराना चाहिए। न कि किराया बढ़ाकर लोगों के कंधों पर बोझ लादना चाहिए। इसके परिणाम आने वाले समय में गलत निकलेंगे। सरकार को चाहिए कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को राहत देती और किराया पहले से आधा करती लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है।
एडवोकेट डीके जोशी
हाईकोर्ट, नैनीताल

रोडवेज ने बसों का जो किराया वर्तमान समय में दोगुना किया गया है, वो तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए न्यायसंगत है। किराया जस्ट डबल करने का आशय इस महामारी के दौर में जनता पर बेवजह भार डालना नहीं है, बल्कि उनके जीवन की रक्षा करना है। किराया अत्यधिक बढ़ाने से वे ही लोग यात्रा करेंगे, जिनके लिए अति आवश्यक होगा। इससे सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे रोडवेज को भी लाभ होगा और कोरोना वायरस से लड़ने में भी मदद मिलेगी।
रवि शर्मा
वरिष्ठ साहित्यकार, हल्द्वानी

बसों के संचालन का निर्णय कैबिनेट में लेकर बीच का रास्ता निकाला है। इससे जहां बस मालिकों को आय होगी, वहीं चालक व परिचालक को रोजगार मिलेगा। साथ ही जो यात्री अब तक वाहन बुक करके लंबी यात्रा कर रहे थे। उन पर आर्थिक बोझ कम होगा, वर्तमान की स्थिति को देखते हुए बीमारी से बचने के लिए सख्त निर्णय लेना सरकार के लिए आवश्यक हो गया है, ताकि जनता की जान बची रहे रहे। वह स्वस्थ हो कोरोना पर विजय प्राप्त करें। जब स्थिति सामान्य होगी और बस या अन्य वाहन अपनी क्षमता के अनुसार पूरी सवारियां लेकर जाएंगे तो किराया भी सामान्य हो जाएगा।
शिव सिंह
जिलाध्यक्ष, भाजपा, बागेश्वर

सरकार द्वारा इस कठिन दौर में बसों का किराया दोगुना कर आम आदमी की कमर तोड़ दी। सरकार द्वारा अपने फैसले को वापस लेकर जनता का मनोबल बढ़ाना चाहिए। इस तरह किराया बढ़ा तो आम जनमानस का सफर करना बहुत कठिन हो जाएगा।
मुकुल महरा
सामाजिक कार्यकर्ता, चोरगलिया, नैनीताल

उत्तराखंड में रोडवेज बसों और पब्लिक वाहनों का किराया बढ़ाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के द्वारा एक बेहद गलत कदम बढ़ाया गया है।जहाँ कोरोना काल में आदमी दो वक्त की रोटी के लिए परेशान हो रहा है। लोगों के रोजगार छीन रहे हैं ऐसे समय में आम छात्र – छात्राओं जो पढ़ने के लिए रोजाना घर से पब्लिक वाहनों का प्रयोग करते हैं। उन पर दोहरी मार पड़ना तय है। जो लोग रोजाना मजदूरी करने के लिए एक जगह से दूसरी जगह पहुँचने के रोडवेज बसों का प्रयोग करते हैं, उन पर भी दोगुने किराए की दोहरी मार पड़ना निश्चित है। उत्तराखंड सरकार के द्वारा वर्तमान स्थिति में लिया गया फैसला दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है, सरकार को इस बारे में दोबारा सोचने की आवश्यकता है ।
खिमेश चन्द्र पनेरू
नेटवर्क मार्केटिंग, हल्द्वानी

प्रदेश सरकार द्वारा रोडवेज व वॉल्वो बसों का किराया बढ़ाये जाने का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गत 22 मार्च से वर्तमान तक जनता बेहद परेशानी की हालत में है और आर्थिक संकट को झेल रही है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार जनता के ऊपर और अधिक आर्थिक भार डालती जा रही है। यदि लॉक डाउन में बसें चल नही पायी तो उसका भार जनता पर डालना बेहद गलत फैसला है। रोडवेज का किराया पूर्ववत होना चाहिए। सरकारी आधी सवारी व डबल किराये की जो बात कह रही है वह भी व्यवहारिक नही है। आर्थिक संकट का भार सरकार अपने कन्धे पर डालने की बजाए आम जनता पर डाल रही है।
त्रिलोचन जोशी
संयोजक, जन अधिकार मंच अल्मोड़ा

कोरोना महामारी काल और लॉकडाउन के दौरान आम जनता पर आर्थिक मुसीबतों का पहाड़ टूटा है। इन हालातों में जनता को राहत देने की बजाए रोडवेज व वॉल्वो बसों का किराया बढ़ाना बहुत की गलत फैसला है। उक्रांद सरकार से मांग करता है कि रोडवेज व वॉल्वो की बसों में पूर्व से निर्धारित किराये को मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल आधा किया जाये। इसके अलावा सरकार को हर जगह रोडवेज बसों का संचालन भी शुरू करना चाहिए, जिससे आम जनता को इधर—उधर यात्रा करने में निजि वाहनों को बहुत अधिक किराया न चुकाना पड़े।
शिवराज बनौला
जिला अध्यक्ष, उत्तराखंड क्रांति दल,अल्मोड़ा

सरकार को यह समझना होगा कि रोडवेज की बसों में मध्यम और सबसे गरीब तबके का आदमी सफर करता है। लॉकडाउन के दौरान जहां लोगों की कमाई शून्य में पहुंच गयी और प्राईवेट व्यवसाय करने वालों के हालात बद से बदतर हो चुके हैं, ऐसी स्थिति में कैबिनेट बैठक में रोडवेज बस का किराया दोगुना किया जाना बहुत ही निंदनीय है।वॉल्वो बसों में अमीर लोग सफर करते हैं यदि उसका किराया बढ़ा भी दिया जाये तो कोई बात नहीं, लेकिन सरकार ने रोडवेज बसों का किराया दोगुना कर मध्यम और गरीब तबके की जनता की मजबूरियों का मजाक उड़ाया है।
अभय साह
अध्यक्ष, हिंदू जागरण मंच अल्मोड़ा

सरकार द्वारा एकदम बसों और टैक्सियों यानी सभी प्रकार के पब्लिक वाहनों का किराया बढ़ाया जाना बहुत ही दुखद है। मसलन जो छात्र रोजाना स्कूल कॉलेज जाते हैं। व्यापारी या कामगार मजदूर रोजाना बसों से सफर करते हैं। अपने दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें अपना घर भी चलाना है और बस का किराया भी देना है, ऐसे में गरीब आदमी की जेब पर बोझ बढ़ना निश्चित है। हमारा सरकार से आग्रह है कि यह परिवहन खर्चे से गरीबों के जेब में बोझ ना डाला जाए।
योगेश भट्ट
छात्र, हल्द्वानी

मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को मीडिया के माध्यम से अवगत कराना चाहता हूं कि जो भी बसों में सफर करता है, वह अधिकतर गरीब परिवार या मध्यम वर्गीय परिवार का होता है। जिसकी कि अभी लॉकडाउन के चलते कोई आमदनी नहीं है, तो वह कहां से 2 गुना और 3 गुना किराया देगा। इस पर दोबारा विचार करना चाहिए और बसों का किराया पूर्व निर्धारित दरों पर भी होना चाहिए।
मदन परगाँई
समाजसेवी,ओखलकांडा

यह सरकार की महंगाई बढ़ाने की एक साजिश है। सरकार किराया बढ़ा कर समाज के हर वर्ग पर बोझ बढ़ाना शुरू कर रही है। आने वाले दिनों में इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे। प्रवासियों के साथ स्थानीय लोगों को भी सरकार के इस जनविरोधी फैसले से परेशानी होगी। लोगों पर आर्थिक संकट झेल रहे लोगों पर एक बोझ और बढ़ेगा।
ललित फर्स्वाण
पूर्व विधायक कपकोट, बागेश्वर

रोडवेज का किराया दोगुना कर के उत्तराखण्ड सरकार आर्थिक आपातकाल के इस कठिन समय में जनता को राहत देने की बजाय लूटने का निर्णय कर रही है? जब सरकार खुद लूट में शामिल होगी तो बाजार की लूट से जनता को कौन बचाएगा ? कौन दे रहा है सरकार को ऐसा जनविरोधी निर्णय लेने की सलाह ? जनहित में यह निर्णय तुरन्त वापस हो !
जगमोहन रौतेला
स्वतंत्र पत्रकार, देहरादून/हल्द्वानी

1 Comment

  1. में माननीय मुख्यमंत्री और परिवहन अधिकारी महोदय जी से ये अनुरोध करता हु की आर्थिक संकट झेल रहे लोगो पर इस समय किराये को बढ़ाना बहुत ही गलत हैं । जो कि आपातकाल के इस कठिन समय में जनता को राहत देने की बजाय किराये को बढ़ाने का निर्णय कर रही है बसों में सफर एक मध्यम वर्ग का परिवार ही यात्रा करता है अगर इस महामारी में ये निर्णय लिया जाता हैं बहुत गलत निर्णय है
    में पुनः आपसे अनुरोध करता हु की अपना निर्णय वापस लीजियेगा और गरीब परिवारों को राहत दीजिए
    कैलाश महरा
    भारतीय सेना
    (चोरगलिया)

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