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खनून ग्राम सभा के ग्रामीण गुलदार के खौफ से बच्चों को नही भेज रहे स्कूल, दशहत के पर्याय बन चुके गुलदार को पकड़ने की उठाई मांग

गुलदार के हमले से घायल नीमा देवी
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गुलदार के सहमें गाॅव में पसरा सन्नाटा
अल्मोड़ा। हवालबाग विकासखण्ड के ग्रामीण गुलदार की दहशत के साए में जीने को मजबूर है। बीते कुछ माह से गुलदार ने खूनन ग्राम सभा के अंतर्गत कई मवेशियों को अपना निवाला बना चुका है। आलम यह है कि ग्रामीण दिन में भी अकेले बाहर निकलने में सहम जाते है। ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले गांवों के ग्रामीण अब अपने पाल्यों को स्कूल भेजने में भी हिचक रहे है। इधर ग्रामीणों ने वन विभाग से हमलावर गुलदार को पकड़ने की गुहार लगाई है। उल्लेखनीय है कि बीते ग्यारह अप्रैल को हवालबाग विकासखण्ड के खनून में गुलदार ने एक महिला नीमा देवी पर हमला किया था। जिसका बेस अस्पताल में उपचार करने के बाद हालत में सुधार हुआ। राजकीय इंटर कालेज कमलेश्वर के प्रधानाचार्य नीरज पंत ने बताया कि खनून गांव के करीब 15 बच्चे पढ़ने के लिए उनके विद्यालय में आते हैं। गांव से विद्यालय पांच से छह किमी की दूरी पर है। उन्होंने बताया कि खनून की महिला नीमा देवी के दो बच्चे उनके कक्षा 10 व 7 के छात्र हैं। लेकिन आज कल गुलदार की दहशत से गांव के बच्चे स्कूल आने में कतरा रहे है। गांव में गुलदार का आतंक इस कदर हावी है कि वहां पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है। खनून के ग्राम प्रधान रमेश सिंह बिष्ट ने बताया कि गुलदार पिछले 2-3 सालों से गांव के इर्द गिर्द सक्रिय है। उसने इससे पहले 5-6 बकरियां व एक गाय मार दी। लेकिन पहली बार किसी मनुष्य पर हमला किया है। अब गांव वाले अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं। महिलाओं का पशुओं के लिए चारा लाना तक मुश्किल हो गया हैं। उनका कहना है कि गुलदार को शीघ्र पकड़ा जाय ताकि गांव का माहौल पुनः शांतिमय हो सके। गौरतलब है कि खनून गांव पाखुरा ग्राम सभा के अंतर्गत आता है जो तीन गावों (पाखुड़ा, मलेरा व खनून) की संयुक्त ग्राम सभा हैं। जिसके ग्राम प्रधान रमेश सिंह बिष्ट हैं। इधर गांव चलो अभियान के तहत राइंका कमलेश्वर की चार टीमों ने ग्रामसभा का मुआयना कर ग्रामीणों की समस्यायें सुनीं। साथ ही ग्रामीणों से उनके पाल्यों को स्कूल भेजने का आग्रह किया गया। इस टीम में प्रधानाचार्य नीरज पंत के साथ रेनू मेहरा आदि शामिल रहे।

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