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ब्रेकिंग न्यूज : तो क्या ले ऑफ ले सकती है सेंचुरी?

हल्द्वानीकोरोना महामारी के कारण बाजार में आई गिरावट के चलते तमाम उद्योग धंदे बंदी के कगार में है। ऐसे में एशिया की प्रमुख पेपर कंपनियों में सुमार सेंचुरी पेपर मिल भी मंदी की मार से अछूता नही है। हालांकि मिल के कर्मचारियों के हित को देखते हुए मिल प्रबंधन जैसे तैसे मिल को चला रही है, लेकिन पूरे विश्व मे स्कूलो के बंद रहने व सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काफी कम काम होने के कारण पेपर की डिमांड लगातार गिरती जा रही है। यही नही बाहरी देशों से भी सेंचुरी को पेपर के ऑर्डर नहीं मिल रहे है। इसके अलावा वर्तमान मे मिल की कुछ यूनियनें मिल पर श्रमिक उत्पीड़न का आरोप लगाकर दुष्प्रचार कर रही है। 👉 व्हाट्सएप ग्रुप click now 👈

मिल के सूत्रों की माने तो इन सब बातों के चलते मिल प्रबंधन हालात सामान्य होने तक ले ऑफ लेने पर विचार विमर्श कर रही है। सुत्रो की माने तो ले आउट के लिए मिल प्रबंधन द्वारा श्रमिक संगठनों से प्रथम चरण की वार्ता भी जा चुकी है। ऐसे में अगर मिल ले ऑफ में जाती है तो हजारों ठेकाकर्मियों के बेरोजगार होने के साथ ही मिल से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लाखों लोगों पर ले ऑफ का सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा घर बैठ कर 50 फीसदी सैलरी ले रहे श्रमिको को 25 फीसदी ही सैलरी मिलेगी। 👉 व्हाट्सएप ग्रुप click now 👈

मिल के लिए फायदे का सौदा है आठ घण्टे का नियम

कोविड 19 के नियमों के अनुसार मिल प्रबंधन को वर्करों से 12 घंटे की ड्यूटी करवानी पड़ रही है ताकि प्लांटों में आवश्यक भीड़ से बचने के साथ ही कोरोना संक्रमण से बचा जा सके। मिल प्रबंधन जिस काम के लिए आठ घंटे में तीन वर्करों से काम लेता था वर्तमान में मिल प्रबंधन श्रम विभाग की गाइड लाइन के अनुसार उसी काम को दो वर्करों से 12 घंटे काम ले रहा है। जबकि तीसरे श्रमिक की घर बैठे आधा वेतन देने के साथ ही 12 घंटे की ड्यूटी करने वाले श्रमिकों को ओवर टाइम भी दिया जा रहा है। सीधा मतलब है कि मिल प्रबंधन को 12 घंटे के बजाय आठ घंटे की ड्यूटी करवाने में कम वेतन देना पड़ेगा। लेकिन कोविड 19 के नियमो व मिल कर्मचारियों व आसपास के क्षेत्र को कोरोना संक्रमण से रोकने के लिए मिल के लिए 12 घंटे के नियम को लागू करना जरूरी है। 👉 व्हाट्सएप ग्रुप click now 👈

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