लोहाघाट। लॉक डाउन में काम धंधे तो सभी के प्रभावित हुए लेकिन ऐसे कम ही लोग हैं जो बुरे वक्त के सामने हाथ खड़े करने के बजाए उनके सामने सीना तान के खड़े हो गए और बुरे वक्त को भी अच्छे से काटने में सफल हुए।
ऐसा ही एक मामला है लोहाघाट के उमेश चंद्र चौबे और धीरज चंद्र चौबे का। दोनों सगे भाई हैं और लॉक डाउन से पहले तक लोहाघाट में मिठाई की दुकान चलाते थे। दुकान ठीक ढंग से चल रही थी तो दोनों भाइयों का दस लोगों का परिवार का पालन भी ठीक ढंग से चल रहा था। अचानक कोरोना की वजह से लॉक डाउन लगा और सारे बाजार की तरह उनकी दुकान भी बंद हो गई। कई दिनों तक दोनों भाई घर बैठे रहे और भविष्य को लेकर चिंता में ही दिन बीतने लगे।
इस बीच उनके संपर्क में आई सामाजिक कार्यकत्री रीता गहतोड़ी। दोनों भाइयों ने अपनी परेशानी उनके साथ शेयर की तो रीता ने उन्हें सलाह दी कि वे पुराने काम के दोबारा शुरू होने का इंतजार न करें। बलिक ऐसा काम करें जो लॉक डाउन में भी चल सके। चौबे बंधुओं ने उनसे सलाह ली तो उन्होंने बताया कि गांवों में सब्जी उगाने वाले किसानों को अपनी सब्जियां बेचनी कठिन हो रही हैं। यदि वे यही काम करने लगें तो किसानों की सब्जियां ​भी बिक सकेंगी और लोहाघाट में अपनी दुकान में बेचकर ज्यादा न सही कुछ कमाई वे भी कर सकेंगें। चौबे बंधुओं ने उनकी सलाह को अंगिकार करते हुए खेतों से लाकर अपनी दुकान के सामने ही सब्जी की दुकान लगा ली। दखेते ही देखते उनकी दुकान चलने लगी और लॉक डाउन के दौरान भी उनकी आर्थिक स्थिति चिंताजनक रूप से गिरी नहीं।
अब उमेश और धीरज लोगों को कोरोना से बचने के उपायों के प्रति जागरूक तो कर ही रहे हैं, दुकान पर आने वाले खरीददारों को भी वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवा रहे हैं।

Advertisement
Advertisement

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here