अल्मोड़ाउत्तराखंड

ऐसे कैसे चलेगा :: लेखा—जोखा की पारदर्शिता परखने वाला पैमाना भोग रहा अपंगता के हालात, आडिट विभाग का हाल, संघ बेहद नाखुश

अल्मोड़ा, 14 अगस्त। तमाम सरकारी महकमों व निकायों के लेखे—जोखे में पारदर्शिता बनाने और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य का जिम्मा संभाले आडिट विभाग मैन पावर से अपंगता जैसी स्थिति भोग रहा है। लेखे—जोखे की पारदर्शिता परखने वाले इस पैमाने की दयनीय दशा से आडिट कार्य और अनियमितता पर सवाल उठ रहा है।
प्रदेश की स्थिति पर मैन पावर के टोटे की स्थिति पर नजर डालें, तो खुद ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आडिट की क्या स्थिति होगी या आडिट की गति कैसी चल रही होगी। इस विभाग में प्रदेश में कुल 174 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष महज 55 पद ही भरे हैं। अब ना जाने 119 रिक्त पदों का काम कैसे चल रहा होगा। व्यवस्था और अनदेखी का आलम ये है कि न तो सीधी भर्ती के 60 पदों की सुध ली जा रही है और न ही पदोन्नति से भरे जाने वाले रिक्त पदों को ही भरा जा रहा है। विभाग में निदेशक का एक पद है, वह खाली। इसके अलावा अपर निदेशक के कुल 2 पद, संयुक्त निदेशक के 4 पद हैं और ये सभी रिक्त हैं। उप निदेशक 6 में से 4 पद, लेखा परीक्षा अधिकारी के 28 में से 16 पद, सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी के 33 में से 3 पद, ज्येष्ठ लेखा परीक्षक के 40 में से 38 पद, लेखा परीक्षक के 60 में से 52 पद खाली पड़े हैं। यह कोई हालिया स्थिति नहीं है, बल्कि सालों से बनी है। ऐसे में वर्तमान में कार्यरत कार्मिक अनदेखी और कार्यबोझ से हताशा के दायरे में हैं। विभाग की उपेक्षा का हाल ये है कि कई अधिकारी पदोन्नति बाट जोहते सेवानिवृत्त हो गए। मजेदार बात ये है कि उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ लंबे समय से इस स्थिति की ओर शासन का ध्यान खींचते आ रहा है, लेकिन ढाक के तीन वाली कहावत ही चरितार्थ हुई। जिसे हठधर्मिता ही कहा जा सकता है।
क्या कहता है संघ :— उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चन्द्र पांडे ने इस बाबत बताया कि आडिट विभाग को चाक चौबंद किए बिना वित्तीय अनियमितताओं व भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे दावों पर यकीन सरलता से नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश कैडर के उत्तराखंड में तैनात तीन अधिकारी महकमे में उत्तराखंड कैडर के करीब 25 अधिकारियों की पदोन्नति में रोड़ा बने हैं।

बात ये है कि निदेशालय स्तरीय एकीकरण नियमावली 2019 के तहत अधीनस्थ संवर्ग की अन्तिम ज्येष्ठता सूची में यूपी कैडर के दो अधिकारियों को शामिल कर लिया गया। यही से विवाद उपजा। श्री पांडे ने बताया कि इस बात पर जब आपत्ति दर्ज की गई, तो निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा—75 के तहत इन अधिकारियों के नाम सूची में जोड़े गए हैं। निदेशालय ने गत फरवरी माह में अधिकारी संवर्ग की ज्येष्ठता सूची का प्रस्ताव शासन को भेजा है, इसमें भी यूपी कैडर के एक अधिकारी का नाम शामिल हैं। अधीनस्थ संवर्ग की ज्येष्ठता सूची के खिलाफ उच्च न्यायालय में रिट दायर होने से शासन असमंजस की स्थिति में पड़ गया। जिसे लेकर गत 20 जुलाई,2020 को वित्त सचिव ने कार्मिक व न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ मंत्रणा की, लेकिन अभी तक सूची जारी नहीं की जा सकी है। इसी सूची के अभाव में अधिकारियों की पदोन्नति पर भी विराम लगा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री पांडे ने मसले को सुलझाने में हो रही देरी पर आपत्ति जताई है। उन्होंने वित्त सचिव को पत्र भेजकर आरोप लगाया कि यूपी कैडर के उक्त कार्मिकों को लाभ पहुुंचाने की मंशा के कारण निचले स्तर के कर्मचारियों व संघ को गुमराह किया जा रहा है, अन्यथा इस मसले को आसानी से निबटाया जा सकता था। उन्होंने कहा है कि मामले पर शासन की चुप्पी भी दुर्भाग्यपूर्ण है। संघ ने शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि 3 जून 2019 को वित्त सचिव की अध्यक्षता में संघ पदाधिकारियों की बैठक में तय हुआ था कि कार्मिक एवं पुर्नगठन विभाग से परामर्श लेने के बाद यूपी कैडर के कार्मिकों को कार्यमुक्त करने पर विचार होगा, लेकिन आज तक कुछ नहीं हो सका।

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