सीएनई रिपोर्टर

सेवानिवृत्ति की आयु में भी इस सरकारी कर्मचारी में पदोन्नति की आस जगी और उन्होंने अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए दौड़ भी लगाई, पर शाय​द नियति को कुछ और ही मंजूर था। तय मानक के अनुसार पीएसी ग्राउंड के 08 चक्कर लगाने थे, लेकिन पांचवां राउंड पूरा करने के बाद वह गश खाकर जमीन पर ​ऐसे गिरे कि फिर कभी उठ नहीं सके।

दरअसल, यह दिल को झकझोर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है। जहां शारीरिक परीक्षा का आयोजन अग्निशमन विभाग की ओर से किया गया था। यहां विभाग में चालक पद पर कार्यरत कार्मिकों की पदोन्नति के लिए एक फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया गया था। 56 साल के फायर ब्रिगेड में कार्यरत चालक मोहन राम का रिटायरमेंट का समय आ गया था। उन्होंने सोचा कि यदि सेवानिवृत्ति लेनी ही है, तो प्रोमोशन के साथ लेंगे। इसलिए इस परीक्षा में वह भी सम्मलित हो गये। वह इसके लिए प्रयागराज से लखनऊ आये थे।


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मुख्य अग्निशमन अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि प्रमोशन के लिए आयोजित इस परीक्षा में कार्मिकों की फिजिकल फिटनेस की जांच की जा रही थी। इस हेतु ग्राउंड के 08 चक्कर लगाने थे। 56 वर्षीय मोहन राम भी इस दौड़ में शामिल हुए। दौड़ लगाने के दौरान उन्हें चक्कर आये और गश खाकर जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर​ दिया। उन्होंने बताया कि इस मेडिकल फि​टनेस टेस्ट में लखनऊ के अलग—अलग जिलों से कुल 19 चालक पदोन्नति के लिए शामिल हुए थे। यह टेस्ट पीएसी ग्राउंड में चल रहा था।

उल्लेखनीय है कि चालक मोहन राम प्रयागराज फायर स्टेशन, नैनी में कार्यरत थे। इधर मृतक के बेटे संदीप ने बताया कि उनके पिता हार्ट पेशंट थे। लंबे समय से दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। गत फरवरी माह में भी उन्हें अटैक पड़ा था। वह 20 फरवरी को अस्पताल में करीब एक हफ्ते भर्ती रहे थे। उन्हें व उनके परिजनों को किसी से कोई शिकायत नहीं है। एक लापरवाही की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। मृतक अपने पीछे पत्नी व तीन पुत्रों का भरा—पूरा परिवार छोड़ गये हैं।

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