अल्मोड़ा न्यूज: संरक्षित व जैविक खेती के प्रति उत्साहित हुए किसान, पर्यावरण संस्थान की आदर्श गांवों को वि​कसित करने की पहल, दो दिनी प्रशिक्षण दिया

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प्रशिक्षण लेते काश्तकार।

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा द्वारा ईको स्मार्ट आदर्श ग्राम परियोजना के अंतर्गत चयनित हवालबाग ब्लाक के बिसरा, कनेली, कुज्याड़ी व दिलकोट ग्रामों को विकसित बनाने की कवायद तेजी से चल रही है। इसी क्रम में इन गांवों के काश्तकारों को संरक्षित एवं जैविक खेती विषय पर दो दिनी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वह सीख लेकर गांव आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।
एक के बाद एक प्रशिक्षण का दौर चल रहा है। जिनमें इन गांवों के किसानों को संरक्षित खेती, बेमौसमी सब्जी उत्पादन एवं जैविक खेती की नई तकनीकों से उत्पादन बढ़ाने का हुनर प्रदान किया जा रहा है। इस बार दो दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम संरक्षित एवं जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में उक्त गांवों के 56 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया। संस्थान की ओर से प्रशिक्षण का शुरू करते हुए वैज्ञानिक डा. शैलजा पुनेठा ने संरक्षित खेती के तहत पॉलीहाउस, पॉलीटनल एवं नेट हाउस एवं जैविक खेती की बारीकियों से अवगत कराया। पर्वतीय क्षेत्रों में संरक्षित खेती की सम्भावनाओं तथा वर्तमान में जैविक उत्पाद के महत्ता पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। संरक्षित खेती के विषय विशेषज्ञ डा. गंगा दत्त पाण्डे ने किसानों को पॉलीहाउस के समुचित रखरखाव एवं प्रबन्धन समेत जैविक खेती की तकनीकों वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, उन्नत बीजों के उचित उपयोग, समन्वित खेती में फसल चक्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण में राजेन्द्र काण्डपाल ने उत्पादों को समूह के माध्यम से विपणन की जानकारी दी।
परियोजना के मास्टर ट्रेनर डीएस बिष्ट ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रतिभागियों को बेमौसमी सब्जी उत्पादन एवं पॉलीहाउस निर्माण से सम्बन्धित तकनीकी जानकारी दी। इस मौके पर संरक्षित खेती

कर रहे ज्योली गांव के प्रगतिशील कृषक त्रिलोक सिंह सलाल एवं जमन सिंह ने अपने अनुभवों एवं पॉलीहाउस के फायदों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। कनेली विसरा के ग्राम प्रधान नन्दन उपाध्याय, कुज्याड़ी की प्रधान ममता जोशी एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य खड़क सिंह व परितोष जोशी ने आदर्श ग्राम परियोजना में उनके गाँवों को चयनित करने पर संस्थान का आभार जताया तथा ग्रामीणों से परियोजना का लाभ उठाने की अपील की। अन्त में संस्थान की विशेषज्ञ टीम द्वारा पॉलीहाउस बनाने हेतु इच्छुक कृषकों के क्षेत्र का भ्रमण कराया। परियोजना के कार्यों को लेकर कृषक काफी उत्साहित दिखे तथा कई प्रवासी युवकों ने इस कार्य को अपना व्यवसाय चुनने की ठानी।


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