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युवा दिवस पर विशेष : कहीं सोशल मीडिया में क्रांति लाने तक सीमित न रह जाये आज का युवा

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— विनीत बिष्ट, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है और हम एक ऐसे देश के युवा हैं, जिसकी लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है। तो हम एक युवा देश हैं ऐसा भी हम कह सकते है… लेकिन मुझे खुद को युवा कहने में एक कुढ़न सी हो रही है। ऐसा क्यों हो रहा है कह नही सकता। हो सकता है अपनी उस स्वच्छंदता को खो रहा हूँ जिसके लिए जाना जाता था। अक्सर यही कहा करता था
”मैं क्यों अपने जीने का अंदाज छोड़ दूं मैं
क्या है मेरे पास इस अंदाज के सिवा…”
युवा जिस ओर मुड़े रास्ता बना दे, युवा जिस ओर देखे मंजिल बना दे… आह कहा गया ऐसा युवा… ये कहानी मेरी भी हो सकती आपकी भी हो सकती है, ये कहानी हर उस युवा की है जो किसी न किसी कारण से सच को सच बोलने से डरता है… जिस उम्र में हम व्ह्टस अप, फेसबुक में क्रांति लाने की कोशिश कर रहे हैं उस उम्र में तो खुदीराम बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, बिस्मिल जैसे अनेक युवा इस भारत माता पर अपना सबकुछ लुटा के सी धरती से विदा हो गए थे और इनके शरीर को भी अंतिम संस्कार सही से मिला या नही ऐसा हम कह भी नही सकते हैं। जिस उम्र में विवेकानंद शिकागो में भारत के झंडे गाड़ रहे थे उस उम्र में हम ये सोचते रह जाते हैं कि अगर मैंने यहां कुछ लिख दिया या बोल दिया तो मेरे सम्बन्ध खराब हो जाएंगे… ऐसे कैसे मेरे युवा साथियों से एक स्वर्णिम भारत की उम्मीद की जा सकती है। जहां भेड़ चाल में चलने वाले युवा ज्यादा है.. जो पहला व्यक्ति करता है वही अगला भी… ऐसे मे कैसे मान लूं की मेरे भारत का भविष्य मजबूत हाथों में है… हर कोई बंधा है सामाजिक रूप से, राजनीतिक रूप से ओर आर्थिक रूप से…. ऐसा युवा जो डरा हुआ है अपने से अपनी परछाई से…. रणनैतिक दलों की कठपुतली बना हुआ युवा… जो अपने आकाओं की गलत बातों में कुछ बोलना तो छोड़ो सर भी नही हिला पाता… ऐसे युवाओं से क्या उम्मिद रखें, ऐसे युवा कैसे भारत की नींव रख रहे है ये भी सोचना होगा… ऐसा नही की हम कहीं नही हैं। आज हमारा युवा खेल के क्षेत्र में लगातार नाम कमा रहा है तो विश्व के अनेक देशों में बड़ी—बड़ी पोस्टों में भारत का युवा बैठा हुआ है… लेकिन भारत मे भारत का युवा सोया हुआ है या सोने का नाटक कर रहा है, कही रेप हुआ मोमबत्ती जला दो, कही आतंकवादी घटना हुई मोमबत्ती जला दो, दो फ़ोटो खींचो शोसल मीडिया में डालो अपनी जिम्मेदारी खत्म। क्या ऐसे युवाओं के लिए अनेक क्रांतिकारी हँसते—हँसते अपना सबकुछ निछावर कर गए.. शायद नही….तो क्यों युवा गलत चीजो को तेजी से ग्रहण कर रहा है और सही चीजो का तिरस्कार कर रहा है। सोचनीय विषय है और इस पर चर्चा होनी चाहिए…. और नही हो रही है तो भारत का भविष्य अंधकार की ओर है… फिर जो युवा कहीं न कहीं अपने कार्यों में लगा हुआ है, संघर्षरत है। ऐसे युवाओं के लिए है आज का दिन ओर उन सभी युवाओं को युवा दिवस की शुभकामनाएं…

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