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⏩ नाबालिग युवती को भगा ले जाने का मामला

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर

विशेष न्यायालय के न्यायाधीश शंहशाह मोहम्मद दिलवार दानिश ने पोक्सो अधिनियम में दोषी को 20 वर्ष का कठोर करावास की सजा सुनाई है। दोषी को 05 हजार रुपये का अर्थदंड से भी दंडित किया, जबकि 363, 366 ए और 376 में उसे दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया है।




23 फरवरी 2021 की सुबह कपकोट के एक गांव से एक नाबालिग गायब हो गई। उसकी उम्र 17 वर्ष 10 महीना थी। उसके भाई ने रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन उसका पता नहीं चला। उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया। जिसमें लिखा था कि मैं आप लोगों से कहीं दूर चली गई हूं। आप मुझे माफ कर देना। मैसेज जाख गांव निवासी भगवत सिंह के नंबर से था।

स्वजनों ने पटवारी के यहां रिपोर्ट दर्ज कराई। पटवारी ने दोषी को पांच मार्च 2002 को उसके घर से उसे गिरफ्तार किया। पीड़िता भी उसी के घर के पास बरामद हुई। उसके बयान लिए गए। उसने बताया कि भगवत उसे लेकर हल्द्वानी, दिल्ली और बंगलूरु ले गया। उसका शारीरिक शोषण किया। मामला रेगुलर पुलिस को हस्तांतरित हुआ। पुलिस ने पोक्सो समेत 363, 366 ए, 376 में मामला दर्ज किया। पीड़िता गर्भवती थी। दोषी और पीड़िता का डीएनए टेस्ट किया गया। विशेष लोक अभियोजन खड़क सिंह कार्की ने पीड़िता को न्यायालय में पेश किया और वह मुकर गई। अभियुक्त पर आरोप लगाने से इंकार कर दिया और दवाब में लेने की बात की। डीएनए रिपोर्ट में अभियुक्त भगवत सिंह और पीड़िता को बयोलोजिकल माता-पिता बताया गया। मामले में विशेष न्यायालय के न्यायाधीश एसएमडीडी ने भगवत सिंह को पोक्सो में दोषी पाया और उसे 20 वर्ष का कठोर करावास की सजा सुनाई। दोषी को पांच हजार रुपये का अर्थदंड से भी दंडित किया। जबकि 363, 366 ए और 376 में उसे दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।

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