हल्द्वानी। कोरोना के खौफ से बंद हुई भारत नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आज पहली बार इधर फंसे तकरीबन डेढ़ सौ नेपालियों को अलग अलग स्थान से उनके देश रवाना किया गया। उधर नेपाल के धारचूला से एक पिथौरागढ़ जिले के धारचूला की बेटी अपनी बीमार मां की देखरेख के लिए विधिवत पास बना कर आई। लॉक डाउन लगने के बाद संभवत: नेपाल से किसी नागरिक का पास बनवा कर भारत आने का यह पहला मामला है।
मिल रही जानकारी के अनुसार सीमा पर आश्रय स्थलों में टिके तकरीबन डेढ़ सौ लोगों को आज नेपाल की सीमा में प्रवेश की इजाजत मिली। हम आपको बता दें कि देश भर से अपने देश लौटने की इच्छा लिए सैकड़ों नेपाली मूल के लोग उत्तराखंड सीमा तक तो पहुंच गए लेकिन उन्हें नेपाल सरकार ने अपने देश में लेने की इजाजत नहीं दी। नतीजतन वे स्वदेश वापसी की आस में सीमा पर अलग अलग बनाए गए आश्रय स्थलों पर ही टिके हुए थे। आज सुबह उनके लिए अच्छी खबर आई और लगभग डेढ सौ लोगों को अलग अलग सीमाओं से नेपाल में प्रवेश करने दिया गया।
दूसरी ओर पिथौरागढ़ के धारचूला की एक युवती का विवाह नेपाल सीमा पर स्थित धारचूला क्षेत्र में हुआ था। इधर कई दिनों से मां की तबीयत खराब होने और उसकी देखरेख करने वाला कोई न होने के कारण उसने नेपाल सरकार से भारत जाने की इजाजत मांगी थी। आज महिला को बाकायदा भारत जाने के लिए पास मुहैया करवाया गया और वह अपनी बीमार मां को देखने के लिए भारत के धारचूला स्थित अपने मायके पहुंच सकी।

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