जगमोहन रौतेला

हल्द्वानी। कोरोना लॉकडाउन के बहाने श्रम अधिकारों के खात्मे के खिलाफ 12-13 मई के अखिल भारतीय प्रतिवाद का दूसरे दिन भी जारी रहा। इसके तहत प्रतिवाद के लिए, लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए मांगों के की तख्तियों को लेकर अपने घरों में रहते हुए विरोध दर्ज किया गया तथा जिलाधिकारी नैनीताल के माध्यम से ईमेल से राष्ट्रपति को मजदूर विरोधी निर्णयों को वापस लेने की मांग का ज्ञापन भेजा गया।
माले राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि, पीएम मोदी ने पूंजीपतियों को बचाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है, लेकिन मजदूरों के अधिकारों में भारी कटौती का ऐलान कर दिया है। मजदूर कोरोना लॉकडाउन में दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को को मजदूर नहीं पूंजीपतियों की चिंता है।
राष्ट्रपति से मजदूरों के दो दिवसीय राष्ट्रीय विरोध के माध्यम से मांग की गई कि – केंद्र व राज्य सरकारों को निर्देशित करें कि, लॉकडाउन के बहाने, मजदूरों के अधिकारों को छीनना बंद हो। श्रम कानूनों के निलंबन व 8 के स्थान पर 12 घंटे के कार्यदिवस का फैसला वापस लिया जाय। ओवरटाइम वेतन खत्म करने, वेतन कटौती और डीए व डीआर रोकने और छँटनी बंद की जाय। सभी भाजपा शासित राज्यों में श्रम कानूनों का निलंबन वापस लिया जाय।
विरोध प्रदर्शन में माले राज्य सचिव राजा बहुगुणा, ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के के बोरा, बहादुर सिंह जंगी, किशन सिंह बघरी, डॉ कैलाश पाण्डेय, किशन सिंह जग्गी, परमानन्द, नरेन्द्र, परमवीर, राजू, गंगा देवी, कुसुम, प्रियंका आदि ने अपने अपने घरों से हिस्सेदारी की।



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