Latest research: सावधान Airborne disease है Corona का नया Variant, कई घंटों तक कर सकता है हवा में ट्रेवल

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कोरोना वायरस को लेकर जहां एक ओर देश में हाहाकार मचा है, वहीं इसको लेकर रोज नई-नई रिसर्च भी हो रही है। हमारा मकसद कतई भी आपको डराना नही, लेकिन सावधान करना है। तमाम विदेशी अख़बारों में छप रही रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी से जूझ रहे भारत में असल मौतों के आंकड़े तो जनता तक पहुंच ही नही पा रहे हैं। यानी यकीन मानिये, आप मीडिया में जो कुछ देख या पढ़ रहे हैं उससे कहीं अधिक कोरोना अपना फैलाव कर चुका है।

खैर, हम यहां बात कर रहे हैं इस नए वेरिएंट के मौजूदा स्वरूप की। इस दिशा में आज ही फोर्टिस अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि ये इंफेक्शन एक ड्रॉपलेट के फॉर्म में ट्रैवल करता है। जो अकसर खांसते, छींकते या बोलते वक्त बाहर आते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह ड्रॉपलेट बड़े होने की वजह से ये ज्यादा दूर नहीं जा पाते हैं और कुछ दूरी के बाद जमीन पर गिर जाती हैं। इसलिए लोगों को कम से कम छह फीट की दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।

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डॉ. सेठ ने बताया कि पिछले दो-तीन हफ्तों में इसे लेकर काफी रिसर्च हुआ है। होटेल के एक कमरे से दूसरे कमरे में लोगों के संक्रमित होने से ये बात साबित हो चुकी है कि एक एयरबॉर्न डिसीज है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ये बाहर हवा में भी मौजूद है। इसका मतलब है कि ये वायरस ड्रॉपलेट की मदद से हवा में कुछ के लिए ठहर सकता है। ये कुछ घंटों तक हवा में ट्रैवल कर सकता है, इसलिए बंद जगहों या भीड़ वाली जगहों पर मास्क पहनकर रखें और लोगों से निश्चित दूरी बनाकर बनाकर रखें।

यहां यह बात ध्यान रखिये कि डॉ. सेठ ने बताया है कि यह ड्रापलेट कई घंटे तक हवा में ट्रेवल कर सकता है। जिसका सीधा सा अर्थ है कि अगर आप घर से बाहर निकलते हैं और आपको पूरे रास्ते कोई अन्य व्यक्ति नही दिखाई देता तो इसका अर्थ यह नही कि आप लापरवाह हो जायें कि सड़क सुनसान है और आप सारी सावधानी हटा मास्क खोल कर चलने लगें। चूकी हो सकता है कि कुछ देर पहले ही वहां से कोरोना संक्रकित निकला हो और उसके द्वारा छींकने पर वायरस हवा में तैर रहा हो। यही बात तब भी लागू होती है कि अगर आपके घर का कोई सदस्य कोरोना की चपेट में आ होम आइसोलेशन में रह रहा हो। तब भी आपको उसके कमरे में कतई दाखिल नही होना चाहिए।

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डॉ. सेठ ने इससे बचने का एक उपाय भी बताया। उन्होंने कहा कि मास्क की डबल लेयर्स ही किसी इंसान को इस वायरस से पूरी तरह बचा सकती है। इसके अलावा, कपड़े का मास्क भी 50-60 प्रतिशत ही हमारा बचाव कर सकता है। मास्क ऐसा होना चाहिए जो हमारे मुंह और नाक को चारों तरफ से सील कर दे। ताकि ड्रॉपलेट को अंदर जाने की जगह ही न मिल पाए। डॉ. सेठ ने सख्त हिदायत दी है कि मौजूदा वेरिएंट बेहद संक्रामक है, इसलिए इसलिए बेवजह घर से बाहर न निकलें।

नीचे हम दो रिचर्स के उत्तर दे रहे हैं। पहला प्रश्न यही है कि क्या कोरोना संक्रमण हवा में है ? जिसका उत्तर यही है कि यह संक्रमण हवा में हमेशा के लिए नही, बल्कि कुछ घंटों तक जीवित रह सकता है। बाद में यदि उसे आश्रय के लिए ​कोई मान शरीर नही मिला जाते खुद गिर कर मर जाता है।

What does it mean for Covid to be airborne?

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“Lancet study: Airborne does NOT mean outside air is contaminated. It means the virus may remain suspended in the air – typically in indoor settings – and pose a risk.

अब कई लोग कहते हैं कि आखिर सरकार ने जिमखाने, मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारों, धार्मिक स्थलों पर प्रतिब​न्ध क्यों लगाया। नीचे दिये सवाल में ही इसका उत्तर है। यह वायरस जिम में कसरत करते वक्त सक्रिय हो सकता है और आस—पास खड़े लोगों तक पहुंचता है। धार्मिक स्थल पर तेज आवाज में पूजा—पाठ आदि करने पर भी तेजी से फैलता है और राजनैतिक जलसों में जब कार्यकर्ता नारे लगाते हैं तो भी बहुत तेजी से संक्रमण फैलने का खतरा है। यही कारण है कि सरकार को चाहिए कि पूरी तरह इस तरह के आयोजन प्रतिबन्धित रखे।

How airborne is COVID-19?
Dr. Connolly: According to recent updates issued by the CDC, there’s increasing evidence that COVID-19 is airborne in certain situations, particularly in enclosed, poorly ventilated spaces.

In addition to the simple acts of talking, coughing and sneezing, other common activities that can encourage the new coronavirus to become airborne include:

Vigorously exercising at the gym
Singing at a religious service
Cheering at a rally, sporting event or concert

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