अल्मोड़ाउत्तराखंड

प्रेरणादायी: जज्बा और नाम हो तो ऐसा – पद आरक्षी और बड़े दायित्वों का बखूबी निर्वहन, हेमा ने खुद को किया साबित और लूटी वाहवाही

चन्दन नेगी, अल्मोड़ा
ये प्रेरक पंक्तियां अक्सर सुनी जाती रही हैं कि-
“मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान है।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से ही उड़ान है।”
इन्हीं पंक्तियों को लगन, कर्तव्यनिष्ठा और मेहनत के बल पर सच साबित कर दिखाया है हेमा ऐठानी ने। एलआईयू की आरक्षी हेमा ऐठानी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय अल्मोड़ा में मीडिया प्रभारी व पीआरओ जैसे महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हुए है। हेमा ने समर्पण भाव से दायित्वों का निर्वहन कर पुलिस महकमे में अपनी अलग छाप छोड़ी है और पुरस्कार व सम्मान की लंबी फेहरिस्त जोड़ी है। यह सब उन्हें ऐसे ही नहीं मिल गया, बल्कि बेहतरीन कार्य, लोकप्रिय कार्यशैली और हर रोज कई-कई घंटों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल है। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर उनके सम्मानों की सूची में सराहनीय सेवा सम्मान भी जुड़ गया है।
बागेश्वर जिले में एक साधारण परिवार में जन्मी हेमा के पिता स्व. मोहन सिंह ऐठानी का वर्ष 2002 में निधन हो गया था। तब उनके परिवार को संघर्ष से मुखाबित होना पड़ा। विषम परिस्थितियों में माता भागीरथी ऐठानी ने चार बच्चों का भरण-पोषण किया और पढ़ाई पूरी कराकर मुकाम तक पहुंचाया। शुरू से ही मेहनती हेमा ने मां का हाथ बटाने के साथ ही भविष्य बनाने के लिए प्रयास व मेहनत की। कहते हैं मेहनत वालों की हार नहीं होती, तो अपने प्रयासों से वर्ष 2006 में पुलिस विभाग में भर्ती हो गई और छह माह ऋषिकेश में सेवा करने के बाद अल्मोड़ा स्थानांतरित होकर आई। वर्ष 2015 में उनकी पोस्टिंग अल्मोड़ा में ही आरक्षी एलआइयू के पद पर हो गई। इसके बाद से वह मीडिया प्रभारी व पीआरओ की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन करते आ रही हैं। वर्तमान में हेमा का एक भाई घर की जिम्मेदारी संभाले है और छोटा भाई आईटीबीपी में इंसपेक्टर है, जबकि बहन ग्राम्या परियोजना में सेवारत है। हेमा का बाद में पंतनगर में विवाह हो गया। उनके पति कमल सिंह कोरंगा प्राइवेट नौकरी करते हैं।
मेहनती और कार्य के प्रति समर्पित हेमा लगातार अपने दायित्व निभाते आ रही हैं। मीडिया प्रभारी के तौर पर अनेकानेक कार्य, पीआरओ के कार्य, पुलिस विभाग की विभिन्न जनहितकारी पहलों के कार्य पूरी निष्ठा से उनके द्वारा निभाए गए हैं। कोरोनाकाल में उनके द्वारा पुलिस की हर पहल को धरातल पर साकार करने की कोशिश की गई है। उन्हें एक के बाद एक जिम्मेदारी मिलते रही है। कभी मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाई। तो कभी पुलिस महकमे के आधुनिकीकरण संबंधी कार्य निबटाये। कोरोनाकाल में पुलिस की पहल को आगे बढ़ाने का कार्य करते हुए लोगों के लिए मददगार साबित हुई। कभी आपातकालीन चिकित्सा के कार्य, कभी ई-पास बनाने का कार्य, बार-बार यत्र-तत्र से फोन सुनना, जवाब देना और कार्य से संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करना, पीआरओ से संबंधित कार्यों को अंजाम देना आदि आदि कार्यों में हेमा सदैव व्यस्त रही हैं। वर्ष 2009 पुलिस के आधुनिकीकरण का कार्य में इनका सहयोग सराहनीय रहा है। तब इन्होंने मास्टर ट्रेनर बन जनपद के पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया।
हेमा की मेहनत के प्रतिफल का सिलसिला:
मेहनत ही है, जिसके बल पर हेमा लगातार पुरस्कार व सम्मान पाते रही हैं। पुलिस के आधुनिकीकरण व सीसीटीएनएस के सराहनीय कार्य के लिए तत्कालीन एसएसपी द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। वर्ष 2016 व 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा लगातार दो दफा गणतंत्र पर प्रशस्ति पत्र व मैडल से नवाजा। पूर्व में सराहनीय कार्य के लिए पूर्व एसएसपी केएस नगन्याल व दिलीप सिंह कुंवर ने गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वर्ष 2018 में देहरादून में पुलिस वीरता सम्मान से नवाजा गया। जिले में पुलिस का संपूर्ण डाटा संग्रहित करने में सफलता के लिए जीआइएस के डायरेक्टर डा. जेएस रावत ने प्रशस्ति पत्र से सम्मानित कियाा। पूर्व एसएसपी पी. रेणुका द्वारा समय समय पर सम्मानित व पुरस्कृत किया गया। हाल ही में कोरोनाकाल में इनके उत्कृष्ट कार्य के लिए एसएसपी पीएन मीणा ने 2500 रूपये और डीआइजी कुमाऊं ने 5000 रूपयेे नकद पुरस्कार दिया। आज 15 अगस्त, 2020 को स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें सराहनीय सेवा सम्मान से नवाजा गया है।
आफिस के बाद भी व्यस्तता:
जहां लोग आज जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, जिम्मेदारी निभाना हेमा की आदत में शुमार है। नौकरी लगने के बाद उन्होंने अपने छोटे भाई की शिक्षा की जिमेदारी ली और यह दायित्व बखूबी निभाया। उन्होंने भाई को ग्रेजुएट कराने के बाद देशसेवा के लिए प्रेरित किया। शायद उन्हीं के मार्गदर्शन से आज वही भाई इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है। उनका एक पुत्र सातवीं में पढ़ता है। इसके अलावा उन्होंने अपने रिश्तेदार की 9 वर्षीया बेटी को पढ़ाने-लिखाने के लिए अपने साथ ले आई। एक मां की तरह प्यार देते उसकी परवरिश करते हुए से पढ़ा रही हैं। आज यही बच्ची 12वीं में पढ़ती है। इन्हीं खूबियों से हेमा ससुराल हो, चाहे मायका, दोनों जगह सबकी प्रिय हैं। उन्हें सास-ससुर का भी भरपूर सहयोग रहता है। खासियत देखिए कि प्रतिदिन करीब 16 से 20 घंटे तक कार्य करने के बावजूद हेमा का व्यवहार मृदुल बना रहता है और मानसिक तनाव जैसी स्थिति उनके सामने नहीं आती। आफिस के कार्य निबटाने के बाद हेमा ऐठानी अतिरिक्त कार्यों में रूचि लेती है। कभी घर में फुलवारी पर मेहनत करती हैं और कभी पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन। कभी सिलाई, कढ़ाई व पेंटिंग जैसे रचनात्मक कार्य में लीन रहती हैं। कभी फुर्सत मिली तो वह पुलिस परिवार के बच्चों को कंप्यूटर ज्ञान देने बैठ जाती है। वह पशु प्रेमी भी हैं।
कुल मिलाकर हेमा प्रेरणा देती हैं कि दायित्वों का निर्वहन एवं मेहनत से ही व्यक्ति खुद को साबित कर सकता है। उनका अब तक का प्रेरणादायी सफर यही संदेश देता है-
“मेहनत का मिलेगा फल, आज नहीं तो कल।
हिम्मत से तो निकल, तोड़ दे चुनौतियों का दलदल।”

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