ad
अल्मोड़ाउत्तराखंडजन समस्या

अल्मोड़ा : पानी पर करोड़ों खर्च, नतीजा ढाक के तीन पात ! पालिकाध्यक्ष ने पुन: उठाये सवाल, पढ़िये पूरी ख़बर ….

अल्मोड़ा। यहां नगर क्षेत्र में व्याप्त भीषण पेयजल संकट का स्थायी निराकरण करने की मांग को लेकर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अल्मोड़ा नगर की जनता लंबे समय से जो मटमैला व दूषित पानी पी रही है तथा आए दिन पानी का संकट झेल रही है उसके लिए सीधे तौर पर संबंधित विभाग जिम्मेदार हैं।
दरअसल, संबंधित विभाग से गत 17 जून को जारी पत्र के जवाब में पालिकाध्यक्ष ने प्रति उत्तर भेजते हुए एक बार फिर नगर में व्याप्त पेयजल संकट को उठाया है। पत्र में उन्होंने कहा कि करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। पूर्व मुख्य अभियंता श्री खेतवाल के समय में बैराज बनाने का निर्णय लिया गया था। उसी समय उन्होंने यह सवाल उठाया कि इसमें आने वाले गाद की समस्या का निस्तारण कैसे होगा। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें इस बात का खेद है कि उठाये गये इस सवाल का जवाब आज तक नही दिया गया है। पत्र में श्री जोशी ने कहा कि जब सुवर्द्न अल्मोड़ा के जिलाधिकारी थे, उस समय भी कोसी नदी में ​गाद आने की समसया रहती थी। जिसके समाधान के लिए चैक डाम बनाने के निर्देश जारी हुए थे। तब अस्थाई चैक डैम बनाये गये, जिनका टूटना भी स्वाभाविक रहता था। इसके बावजूद तब इस गाद आने की समस्या का समाधान हो गया था। किंतु बैराज बनने के बाद बहुत अधिक मात्रा में लकड़ी, पत्थर, मिट्टी, पेड़ व जानवरों के शव आदि सभी गाद के रूप में वहां एकत्रित हो जाते हैं तथा बैराज का गेट समय पर नही खुलने से यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि उनका यह सुझाव है कि इस गाद को रोकने के लिए चैक डैम बनाये जायें, यदि ऐसा नही तो दूसरी कारगर व्यवस्था की जाये। जिससे जनता को स्वच्छ, दुर्गन्ध मुक्त जल पीने को मिल सके। उन्होंने कहा कि बैराज का संचालन सिंचाई खंड द्वारा किया जा रहा है, जल निगम के द्वार इंटेक वेल का निर्माण किया गया है तथा उसके द्वारा पाइप लाइन डाली जा रही है और जल संस्थान वितरण का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन तीनों विभागों में समन्वय न होने से जिम्मेदारी एक—दूसरे पर डाली जा रही है। पालिकाध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि वह इस बात से सहमत हैं कि नदी में मिट्टी का आधिक्य हो जाने से वह गाद बन जाता है। इसको रोकने के लिए कोसी नदी के दोनों किनारें पर पौधारोपण होना चाहिए तथा मिट्टी फैंकने वालों पर ग्राम प्रधान, राजस्व अधिकारी व जिला प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। इस समस्या का समाधान होना चाहिए क्योंकि लगभग दो लाख की आबादी दूषित पेयजल और अनियमित पेयजल आपूर्ति को झेल रही है।

Leave a Comment!

error: Content is protected !!