पिथौरागढ़। भारत ने पिथौरागढ़ से लगी चीन सीमा तक सड़क पहुंचाने में की बड़ी चुनौती पर पा पा लिया है। बीआरओ ने घटियाबगड़ से लिपूपास सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। आज नई दिल्ली से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस सड़क का ऑनलाइन उद्घाटन किया। इस सड़क के निर्माण से न सिर्फ सामरिक दृष्टि से भारत मजबूत होगा बल्कि कैलास मानसरोवर के यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। तिब्बत-चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले के सीमांत धारचूला स्थित घटियाबगड़ से लिपूपास तक 75 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया।

शुक्रवार को केंद्रीय रक्षामंत्री नई दिल्ली से इस सड़क का शुभारंभ वीडियो कान्फ्रेंसिंग से किया। इसी के साथ इस मार्ग पर भी वाहन भी चलने शुरू हो गए। 2003 में बीआरओ को यह इस सड़क बनाने का काम सौंपा गया था, जिसे 2008 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं किया जा सका।

इसके बाद पहले 2012 फिर 2016 और 2018 तक निर्माण कार्य का समय बढ़ाया गया। आखिरकार बीआरओ ने मई 2020 में इस अहम सड़क
को पूरा कर लिया है। सीमा सड़क संगठन को 4 किमी सड़क काटने में पूरे चार साल लग गए। सीमा सड़क संगठन को इस सड़क के निर्माण में कठोर चट्टान के कारण लामारी से लखनपुर तक चार किमी सड़क बनाने में तीन साल लग गए। खड़ी चट्टान और नीचे बह रही काली नदी से बचाव करते हुए इस सड़क का निर्माण यहां बहुत ही कठिन काम था।


इस सड़क के निर्माण से यहां रह रहे छह हजार से अधिक ग्रामीणों को गांवों की जीवन रेखा का लाभ मिल सकेगा। इस सड़क के बन जाने से व्यास वैली के सात गांवों के लोगों के साथ सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को लाभ मिलेगा। सड़क बनने से भारत चीन व्यापार सुगम होने की उम्मीद भी है। इस मौके पर चीफ और डिफेंस स्टाफ जरनल विपिन रावत, थल सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवाने, सुरक्षा सचिव अजय कुमार और डीजी बीआरओ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह मौजूद थे।

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