सांकेतिक फोटो

जगमोहन रौतेला

हल्द्वानी। उत्तराखण्ड महिला मंच ने प्रदेश सरकार द्वारा शराब की दुकानें खोले जाने के निर्णय का तीखा विरोध किया है और मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र रावत से अविलम्ब इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। उत्तराखण्ड महिला मंच ने इस सम्बंध में एक ज्ञापन मुख्यमन्त्री को भेजा है। अपने ज्ञापन में महिला मंच ने लिखा है कि वर्तमान समय में पूरे विश्व के साथ उत्तराखण्ड भी महामारी के संकट से जूझ रहा है। ऐसे वैश्विक संकट के वक़्त हम सब एकजुट हैं। पिछले लगभग एक माह से सड़क, रेल, हवाई मार्ग, दुकानें, लोगों की आवाजाही, पर्यटन, उद्योग-धंधे बंद है, बहुत सीमित जरूरी सेवाओें के अतिरिक्त सब कुछ ठप्प है। इस सच्चाई को सभी जानते हैं कि भारतीय संविधान एवं आबकारी अधिनियम की भावनाओं के विपरीत सरकारों की जन विरोधी, माफ़ियापरस्त नीतियों के कारण जो लाखों लोग नशे के दुष्चक्र में फंस गये थे, इस समय उनके जीवन में इस तालाबंदी के कारण सकारात्मक बदलाव आ रहा था।

इस महामारी की रोकथाम के लिए की गई सख़्त व्यवस्थाओं के कारण राजनीतिक संरक्षण में पलने वाले नशे के सफ़ेद-पोश धंधेबाजों की पहुंच भी सरकार तक कम हो गयी थी और हमारे क्षेत्र व घर नशा मुक्ति केंद्र में तब्दील हो गये थे। इस बदलाव के कारण ही तम्बाकू, गुटखा, शराब व तरह-तरह के नशों से पीड़ित युवाओं-लोगों और उनके परिवारों में शान्ति व आत्मविश्वास लौटा रहा था। ज्ञापन में महिला मंच के पदाधिकारियों ने कहा है कि हम मानते हैं कि सरकार को इन सकारात्मक बदलावों का स्वागत करते हुए शराब की दुकानें बंद रखने चाहिए थी किन्तु ऐसा नहीं हो रहा है।


जहां तक सरकारी राजस्व के नाम पर शराब खोलने की बात की जाती है तो यह तथ्य अब जग ज़ाहिर हो चुका है कि हमारी सरकारों, राजनीतिक दलों एवं नौकरशाहों की चिन्ता सरकारी खज़ाने से ज़्यादा अपने निजी स्वार्थों व चुनावी फंड की रहती है। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के तीसरे चरणमें कुछ व्यवस्थाओं को छूट देने की घोषणा की है जिसमें राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप सरकार को संशोधन का अधिकार भी दिया गया है, जिसके तुरन्त बाद आपकी सरकार ने शराब की दुकानें खोलने का फ़रमान ज़ारी कर दिया है, जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव ग्रीन ज़ोन में आने वाले पहाड़ी ज़िलों में पड़ेगा। पिछले लगभग दो माह से तमाम तकलीफ़ों से गुज़रने के बाद गांव-गांव, घर-घर में शराब की पहुंच न होने से जो शान्ति व सुकून आया था, उसे आप सरकार का यह राजनीतिक फैसला उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर देगा।

ज्ञापन में कहा गया कि हम सोचते थे कि सरकार पहले आवश्यक सुरक्षा के साथ बाज़ारों, यातायात के लिए टैक्सियों, गाड़ियों, पर्यटन, उद्योग, न्यायालय को सुचारू करने पर ध्यान देगी, लेकिन सरकार की प्राथमिकता भूख, अभाव, बेबसी को दूर करने से पहले शराब की दुकानें खोलने की हो रही है। इससे जनता का क्या भला होगा, यह बात हमारी समझ से परे है। हम चाहते है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे व्यापक जनहित में सरकार ततकाल वापस ले। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो इससे घर घर में जीवन रक्षक जरूरतों के लिए रखा गया पैसा भी शराब जैसी गैर जरूरी चीज पर ही खर्च होगा। घरेलू और सार्वजनिक हिंसा में भी बढ़ेगी। महिला मंच का मानना है कि उत्तराखण्ड को पूर्ण नशाबंदी की ओर ले जाने का यह उपयुक्त समय है। मुख्यमन्त्री इस बारे में पहल कर के उत्तराखंड को नशामुक्त प्रदेश बनाकर उत्तराखण्ड के इतिहास में अपना नाम एक लोकप्रिय, जन-हितकारी मुख्यमंत्री के रूप में अमर बना लें।

ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि आशा है आप व्यापक जन हित में हमारी प्रार्थना को स्वीकार कर, आप उत्तराखंड की महिलाओं व आम जागरूक जनता की भावनाओ की कद्र करके शराब को बंद किए जाने का फैसला अति शीघ्र लेने का कष्ट करें। ऐसा करके जनहितकारी नशा विरोधी नीति बनाने हेतु जो निर्देश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को दिए गए हैं, उसका भी पालन हो सकेगा। कृपया तत्काल शराब की दुकानों को खोलने के आदेश को वापस लेने की कृपा करें और नशा मुक्ति की दिशा में नई नीति बना कर मा. उच्च न्यायालय के आदेश का पालन भी सुनिश्चित करने का कष्ट करें।

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