भीमताल। शराबबंदी को लेकर नगर के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी ने पत्र के जरिए पीएम से मांग करते हुए लिखा है की स्थिति सामान्य होने तक राज्य कि सभी मंदिरा दुकानों को बंद रखा जाए। उन्होंने लिखा है कि राज्य सरकार के द्वारा कोरोना काल में ही ‘लॉक डाउन’ अवधी समाप्त होने से पूर्व ही शराब की दुकानें दनादन खोलने की नीति को लेकर समाज में जगह-जगह कई संगठनों व महिला शक्तियों, युवाओं और आम जन-मानस द्वारा शासन-प्रशासन का भयंकर विरोध किया जा रहा है, तरह-तरह की अनर्गल बातें की जा रही है। ‘सरकार को समझ ही नहीं आ रहा कि आर्थिक मंदी के दौर से निपटे कैसे, ऎसा लग रहा है कि उसके पास कोई योजना है ही नहीं। राजस्व बढ़ाने को सरकार शराब की दुकानें खोल “कोविड टैक्स” लगाने जा रही है।राज्य सरकार के नीतिकार’ शराब को मंदी से उबारने वाला मुख्य ‘उत्पाद’ समझने लगे हैं, जिसे देखकर देवभूमी की आम जनता हैरान व परेशान है।पत्र में बृजवासी ने पहाड़ी अंचल में गरीब वर्ग और मध्यम वर्ग के परिवारों में शराब से हो रही अत्यधिक दुखदायी पीड़ा को बयां किया है। उन्होंने पत्र में प्रधान मंत्री से कहा कि लाॅक डाउन कि स्थिति में शराब की दुकानों के खुल जाने से अनियमित शराब का वितरण व प्रचलन बढ़ गया है, जिससे समाज को खतरा है, और ये पहाड़ के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है। पूरन ने कहा कि अभी देश कोविड-19 के खतरे से टला नहीं, समाज को अब भी इस महामारी से खतरा बना हुआ है,लोग महीनों से घरों में कैद है, पहाड़ का किसान कुदरती मार ओलों, तूफान और बारिश के आगे चकरा के गिर चुका है, समाज के अन्‍न दाता को अपने परिवार के भरण-पोषण की चिंता खाए जा रही है, बेरोजगार युवा वर्ग भविष्य की फिक्र में गोते खा रहा है, पहाड़ की 70% जनता की आर्थिक स्थिति डोल रही है।फिर भी राज्य के लोगों की चिंता छोड़ शराब की दुकानें खोली जा रही है और उत्तराखंड शासन-प्रशासन इन दुकानों को बंद रखने के लिए सुनने तक को तैयार नहीं है, जिसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं बृजवासी ने कहाँ ये कैसा राजस्व है जिसकी कोई लिमिट नहीं, शराब की दुकाने खोल लॉक-डाउन की धज्जियां उड़ा दी गयी है, शराब ने सोशल डिस्टेंस तक भुला दिया है प्रशासन को और ‘न ही शराब से होने वाले बीमार, अपाहिज और मौत वाले परिवारों के लिए सरकार की तरफ से कोई प्रावधान है।उन्होंने कहाँ है कि कम से कम ‘एक माह’ तक पूरे राज्य में शराब की सभी दुकानें व शराब वितरण रोका जाये ताकि कोरोना संक्रमण पर रोक लगे और आगे लोगों के लिए वितरण की लिमिट बनें, ताकि समाज के सभी वर्गो के लोगों को लाॅक डाउन से लगे सदमे से बाहर आने का समय मिले, समाज में घुलने-मिलने और अपनी दिनचर्या में पूर्व की भांति रोज-मर्रा की जिंदगी में आने तक का मौका मिले, साथ ही पूरन ने कहां कि देवभूमी पतित पावन है, पूरा विश्व यहां की झलक देखने को बेकरार रहता है यहाँ इस तरह से अनियमित शराब के वितरण पर पाबंदी लगे ताकि पहाड़ों के घरों में शांति बने रहे, जिस हेतु समाज सेवी बृजवासी ने तत्काल ‘एक माह’ शराब बंदी और भविष्य के लिए मंदिरा वितरण में विशेष प्रावधान की माँग की है।बता दे कि पूर्व में भी बृजवासी अनियमित मंदिरा के वितरण को रोकने व शराब की दुकानों को एक माह बंद रखने की माँग के लिए जिला प्रशासन, कुमाऊं आयुक्त और राज्य मुख्य सचिव से भी मांग कर चुके हैं।

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