• गंगाजल भरे कलश लेकर पहुंचे दिव्येश्वर मंदिर
    सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर

    हरिद्वार से पैदल कांवड़ लेकर पहुँचे कावड़ यात्रियों का गागरीगोल पहुँचने पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान ग्रामीण कांवड़ियों के साथ पैदल चलकर दिव्येश्वर पहुँचे। जहाँ मंदिर पूजा-अर्चना कर हरिद्वार से कलशों में लाए गंगाजल को मंदिर में चढ़ाया।

हरिद्वार से कांवड़ लेकर मंगलवार को बैजनाथ और दिव्येश्वरी मंदिर पहुँचे कावड़ियों का बैजनाथ से गागरीगोल तक ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर जोरदार स्वागत किया। दिव्येश्वर मंदिर में भक्तों ने शिव परिवार को स्नान कराने के साथ अनुष्ठान आयोजित किया। कत्यूर घाटी बम बम के जयघोष से गूंज उठी है। दिव्येश्वरी मंदिर के महंत भगीरथ गिरी के नेतृत्व में गागरीगोली से बीते 19 जुलाई को कावड़ा यात्रियों का दल हरिद्वार के लिए रवाना हुआ था। सोमवार को वह कोट भ्रामरी मंदिर पहुंचा। जहां भक्तों का ने यात्रियों को भव्य स्वागत किया। मां कोट भ्रामरी की पूजा-अर्चना की। महंत भगीरथ गिरी ने कहा कि श्रावण मास शंकर भगवान का होता है। शिव सबसे में बसे हुए हैं और वह श्रेष्ठ हैं। उनके स्मरण मात्र से ही नर भव पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि सावन में पार्थिव पूजा का भी विशेष महत्व है। भक्तजनों को इच्छित फल की प्राप्ति होती है। इस दौरान कावड़ यात्री राजू साह, योगेश वर्मा, पंकज साह, राजू भंडारी, कुंदन नेगी, रमेश नाथ, धीरज जोशी, शंकर जोशी, नैन सिंह, रमेश सिंह लार्ड, किशन सिंह, दीपक नैनवाल, विक्की कांडपाल, रोहित कठायत आदि मौजूद थे।

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