हल्द्वानी। निजी विद्यालयों में कोरोना काल की फीस मांगने का मामले नैनीताल हाईकोर्ट में गूंजा। इस मामले में जनहित याचिका डालने वाले देहरादून निवासी आकाश यादव ने अपनी शिकायत में क हा है कि स्कूल बंद होने के बाद के महीनों की पांचवी क्लास तक के बच्चों की फीस माफ की जानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य समस्याओं की ओर भी कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।

इस पर अदालत ने लॉक डाउन के दौरान निजी और सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से फीस वसूली पर दायर जनहित याचिका में सरकार को नोटिस देकर कुछ सवाल पूछे हैं।सरकार को इस नोटिस का जवाब दो सप्ताह में देना है। अदालत ने पूछा है कि क्या वो एलकेजी और यूकेजी के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है अथवा नहीं। अदालत ने जानना चाहा है कि कितने बच्चे ऑन लाइन पढ़ाई कर रहे हैं और प्रदेश के कितने स्कूल फिलहाल यह सुविधा दे रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की खंडपीठ आज निजी और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई पर फीस वसूली के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। खण्डपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वे अभिभावकों और स्कूलों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती करे। जिससे अभिभावक जबरन फीस की मांग कर रहे स्कूलों के खिलाफ अपनी शिकायत नोडल अधिकारी को दर्ज करा सकें।


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