सीएनई रिपोर्ट

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी द्वारा अवैध बार चलाये जाने के मामले को लेकर न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं को सोशल मीडिया से इस संबंध में तमाम पोस्ट हाटने के निर्देश दिये हैं।अदालत का कहना है कि आरोप बगैर किसी ​पुष्टि के लगाये गये हैं। वहीं कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि वे अदालत के समक्ष सारे तथ्य रखेंगे तथा केंद्रीय मंत्री द्वारा इस मामले को भटकाने के प्रयास को विफल करेंगे। इस मामले में 18 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा दायर दीवानी मानहानि मामले में कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को शुक्रवार को समन जारी किया। केंद्रीय मंत्री ईरानी ने उनके और उनकी बेटी के खिलाफ कथित रूप से निराधार आरोप लगाने को लेकर 02 करोड़ रुपये से अधिक के हर्जाने की मांग की है।


न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने ईरानी और उनकी बेटी पर लगे आरोपों के संबंध में कांग्रेस नेताओं को सोशल मीडिया से Tweet, Retweet, Post, Videos and Photos हटाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगर प्रतिवादी 24 घंटे के भीतर उसके निर्देशों का पालन नहीं करते, तो सोशल मीडिया मंच ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब स्वयं इससे संबंधित सामग्री हटा दें।

कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी पर गोवा में ‘अवैध बार’ चलाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईरानी को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी। इसके बाद ईरानी ने यह कानूनी कार्रवाई की। अदालत ने कहा कि ईरानी के खिलाफ ‘अपमानजक और फर्जी’ आरोप लगाए गए हैं। न्यायाधीश ने कहा, ‘प्रथम दृष्टया यह माना जाता है कि वास्तविक तथ्यों की पुष्टि किए बिना वादी के खिलाफ निंदनीय आरोप लगाए गए।

न्यायमूर्ति ने कहा, ‘मैं प्रतिवादी एक से तीन (कांग्रेस नेताओं) को यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर सहित सभी सोशल मीडिया मंचों से संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाए गए आरोपों को हटाने के लिए एक अंतरिम निषेधाज्ञा पारित करना उचित समझता हूं।’ अदालत ने आरोपों के साथ वादी और उसकी बेटी के संबंध में साझा किए गए पोस्ट, वीडियो, ट्वीट, रीट्वीट, छेड़छाड़ की गईं तस्वीरों को हटाने और उनके पुन: प्रसार को रोकने के लिए भी निर्देश जारी किया। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 15 नवंबर को अदालत के समक्ष और रजिस्ट्रार के समक्ष 18 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

इधर इस मसले पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्मृति ईरानी की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा समन जारी किए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि वह और इस मामले में उल्लेखित अन्य कांग्रेस नेता अदालत के समक्ष सारे तथ्य रखेंगे तथा केंद्रीय मंत्री द्वारा इस मामले को भटकाने के प्रयास को विफल करेंगे। उन्होंने ट्वीट में कहा कि, ‘दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी कर हमसे कहा है कि स्मृति ईरानी की ओर से दायर मामले पर हम औपचारिक रूप से जवाब दें। हम अदालत के समक्ष तथ्यों को रखने के लिए उत्सुक हैं. स्मृति ईरानी जिस तरह से मामले को भटकाने का प्रयास कर रही हैं उसे हम चुनौती देंगे और विफल करेंगे।’

यह है पूरा मामला

कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं का आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी की बेटी बीजेपी शासित गोवा में अवैध तरीके से बार चला रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें केंद्रीय मंत्री के पद से बर्खास्त करने का आग्रह किया है। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण करार दिया है। उनका कहना है कि उनकी 18 वर्षीय बेटी को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया। स्मृति की कहना है कि उनकी बेटी पढ़ाई करती है, उसका कोई बार नहीं है। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा, जयराम रमेश और नेता डिसूजा को कानूनी नोटिस दिया है और बिना शर्त माफी की मांग की है। साथ ही उनसे तत्काल प्रभाव से अपनी बेटी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने के लिए कहा है।

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