अल्मोड़ाउत्तराखंड

भ्रष्टाचार घटेगा, तभी तो इंडिया आगे बढ़ेगा (अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस 9 दिसंबर पर विशेष)

भरत गिरी गोसाई

भ्रष्टाचार का अर्थ :
भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण। भ्रष्टाचार न केवल हमारी निजी जीवन के लिए अभिशाप है, बल्कि समाज तथा राष्ट्र के विकास में भी बाधक है। भ्रष्टाचार दीमक की तरह है जो धीरे-धीरे किसी भी समाज तथा राष्ट्र को खोखला करता रहता है। कालाबाजारी, रिश्वतखोरी, गबन, पद का दुरुपयोग, व्यक्तिगत हितों के लिए कार्य करना, हर काम पैसे लेकर करना, जानबूझकर गलत ऑपरेशन करना, चुनाव में धांधली, ब्लैक मेलिंग करना, टैक्स चोरी, झूठी गवाही, झूठा मुकदमा, परीक्षा में नकल, गलत मूल्यांकन, हफ्ता वसूली, जबरन चंदा, लेना, पक्षपातपूर्ण निर्णय लेना, पैसे लेकर वोट देना आदि भ्रष्टाचार कहलाता है।

भारत में बढ़ता भ्रष्टाचार-
भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी है। शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र बचा हो जो इससे अछूता रहा है। समय-समय पर भारत में अनेक घोटाले हुए हैं जिनमें 1986 में घटित बोफोर्स घोटाला (64 करोड), 1996 में चारा घोटाला (950 करोड), 2002 में स्टॉम पेपर घोटाला (43 हजार करोड़ ), 2004 से 2009 तक कोयला खदान आवंटन घोटाला (12 लाख करोड़), 2008 में 2ळ स्पेक्ट्रम घोटाला (1 लाख 67 हजार करोड़), 2009 में सत्यम घोटाला (70 हजार करोड), 2010 में कॉमनवेल्थ गेम घोटाला (70 हजार करोड़), 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला (36 हजार करोड़), 2012 में कोयला आवंटन घोटाला (1.86 लाख करोड़), 2013 में आईपीएल घोटाला (12 से 15 हजार करोड), 2016 में विजय माल्या द्वारा मनी लोडिंग घोटाला (9 हजार करोड़), 2018 में नीरव मोदी द्वारा पीएनबी बैंक घोटाला (11.4 हजार करोड) आदि प्रमुख है। भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (ब्च्प्-2019) के अनुसार पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में 78 वे स्थान पर हैं।

भ्रष्टाचार के मुख्य कारण-
लचीला कानून व्यवस्था, नैतिक मूल्यों का पतन, भौतिकवादी जीवन, धन को अति महत्व देना, शिक्षा का अभाव, गरीबी, झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा पाने के लिए, बेरोजगारी, भुखमरी, भाई- भतीजावाद, पद का दुरुपयोग, भ्रष्ट राजनीति, भ्रष्ट राजनेता, अफसर व सरकार आदि भ्रष्टाचार की प्रमुख कारण है।

समाज और राष्ट्र विकास में भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव –
भ्रष्टाचार के कारण ही किसी भी समाज तथा राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक विकास नहीं हो पाता है, जिससे समाज और राष्ट्र प्रत्येक क्षेत्र में बिछड़ता जाता है। सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं का लाभ गरीब लोगों तक नहीं पहुंच पाता है, जिससे सरकारी खजाने का करोड़ों रुपया व्यर्थ चला जाता है। भ्रष्टाचार के कारण भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिलता है, जिसके कारण अयोग्य व्यक्ति भी उच्च पद पर पहुंच जाता है और वह अपने पद का दुरुपयोग करने लगता है।

भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय –
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार को सख्त से सख्त कानून बनाकर लागू करना चाहिए, प्रशासनिक व न्याय कार्यों में पारदर्शिता लानी चाहिए, सभी राज्यों और केंद्र प्रदेशों में लोकपाल कानून लागू कराना चाहिए जिससे हम एक भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने को सच कर सकते हैं।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न स्वर्गीय डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि ष्अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त होना है और सुंदर दिमागों का देश बनना है, तो मुझे दृढ़ता से लगता है कि तीन प्रमुख सामाजिक सदस्य हैं, जो फर्क कर सकते हैं। वह है माता, पिता और शिक्षक।

भारत में भ्रष्टाचार विरोधी कानून –
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर अनेक अधिनियम बनाई गई है, जिसमें आयकर अधिनियम (1961), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (1988), धन संशोधन अधिनियम (2002), लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम (2013) प्रमुख है।

अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस-
भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता लाने तथा इसको रोकने के लिए प्रतिवर्ष 9 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासंघ ने 31 अक्टूबर 2003 को एक प्रस्ताव पारित कर वर्ष 2005 से प्रत्येक वर्ष 9 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस मनाने की घोषणा की। इस वर्ष की अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस की थीम है यूनाइटेड अगेंस्ट करप्शन।

प्राध्यापक वनस्पति विज्ञान विभाग शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय अगरोडा (टिहरी गढ़वाल)

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