स्मार्ट गर्ल कार्यशाला, चतुर्थ दिवस : समाज के समुचित विकास के लिए लैंगिग विभेदता की खाई को पाटना जरूरी : प्रो मनराल

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

शोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के शिक्षा शास्त्र विभाग के सानिध्य में छह दिवसीय ‘स्मार्ट गर्ल’ ऑनलाइन कार्यशाला जारी है। इसकी मुख्य थीम ‘लैंगिक समानता’ है। आज चतुर्थ दिवस छात्राओं को आत्म सुरक्षा के गुर सिखाए गये।
कार्यशाला में विभागाध्यक्ष प्रो. विजयरानी ढ़ौंढियाल ने कहा कि समाज का महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदला जाना जरूरी है। वे घर से बाहर निकलें तो वहां भी सुरक्षात्मक वातावरण का सृजन होना चाहिए। तभी लैंगिक असमानता व भेदभाव समाप्त हो सकता है।
डॉ. देवेंद्र सिंह चम्याल ने बताया कि जिस समाज में लैंगिक समानता होती है उस समाज में अवश्य ही विकास रूपी इमारत बनायी जा सकती है। समानता एक सुंदर, सुरक्षित व विकसित समाज की नींव है। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार कानून के जरिए लैंकिग समानता लाने का प्रयास कर रही है, लेकिन हमें हमें अपनी विचारों में भी सामानता लानी होगी तभी यह सफल हो पायेगा।
छात्रों ने कहा कि सरकार द्वारा जो कानूनों का प्रावधान किया गया है उसका दुरूपयोग नही होना चाहिए। चूंकि ऐसी घटनाएं कई बार देखने को मिलती हैं। साथ ही ट्रांसजेंडर को भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहिए।
कार्यशाला में शिक्षाशास्त्री प्रो. भीमा मनराल ने कहा कि समाज के समुचित विकास के लिए लैंगिग विभेदता की खाई को पाटना जरूरी है अथवा विकास की कल्पना करना निरर्थक है।
इससे पूर्व विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिजवाना सिद्दकी ने ‘नारी’ शीर्षक पर स्व रचित कविता का पाठ किया। छात्राओं ने अपने व्यक्तिगत अनुभव सभी के समक्ष प्रस्तुत किये। कार्यशाला संयोजिका डॉ. रितु जैन ने उन्हें आत्म सुरक्षा के गुर सिखाये। डॉ. संगीता पवार ने भी विचार रखे। विभागध्यक्ष ने कहा कि यह कार्यशाला छात्राओं के संकोची व्यवहार को बदलने में कारगर हो रही है। छात्राएं घर रहते हुए भी वास्तविक ज्ञानार्जन कर रही हैं।

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