चीनी मिल बंद होने के कारण गन्ने से भरे खड़े ट्रक

किच्छा। किच्छा चीनी मिल के बार बार बंद होने से किसानों तथा ट्रांसपोर्टरों में चीनी मिल प्रबंधन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। चीनी मिल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा ट्रांसपोर्टर्स तथा किसानों को भुगतना पड़ रहा है । आए दिन चीनी मिल मशीनरी में खराबी होने के चलते कई कई दिन तक चीनी मिल बंद होने के कारण किसानों का गन्ना खेतों तथा तोल केंद्रों पर सूख रहा है। चीनी मिल के बॉयलर की छत चार बार गिरने के बावजूद भी चीनी मिल प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम ना उठाए जाने से ट्रांसपोर्टर्स तथा किसानों में भारी रोष व्याप्त है । क्षेत्रीय विधायक द्वारा गत दिनों चीनी मिल की अधिशासी निदेशक की जमकर फटकार लगाये जाने तथा कड़ी चेतावनी दिए जाने के बावजूद भी चीनी मिल प्रबंधन पर इसका कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है । गत दिवस भी चीनी मिल के बॉयलर नंबर दो की छत गिर जाने से चीनी मिल में गन्ना पेराई का कार्य बंद हो गया। संभवत अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 से 7 दिनों के भीतर छत की मरम्मत होने के बाद चीनी मिल में गन्ना पेराई का कार्य शुरू हो पाएगा।

ज्ञात हो कि मार्च-अप्रैल माह में चीनी मिल के बॉयलर नंबर 3 की छत एक बार तथा बॉयलर नंबर दो की छत तीन बार गिरने के कारण चीनी मिल बंद हो चुकी है , जिसका खामियाजा किसानों तथा ट्रांसपोर्टर्स को भुगतना पड़ रहा है । बॉयलर की छत गिरने के बाद भी चीनी मिल प्रबंधन द्वारा कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है । गत दिवस भी बॉयलर नंबर दो की छत तीसरी बार गिर गई , जिससे चीनी मिल में गन्ना पेराई का कार्य ठप हो गया । गन्ना तोल केंद्रों से चीनी मिल में गन्ना आपूर्ति करने वाले तमाम ट्रांसपोर्टरों को जब चीनी मिल बंद होने की जानकारी मिली तो उनमें आक्रोश पनप गया । ट्रक ऑपरेटर यूनियन के बैनर तले यूनियन पदाधिकारी सुखविंदर सिंह बाजवा के नेतृत्व में रूप सिंह , भगवान सिंह , प्रीतम सिंह ,अनिल शर्मा , सनी बत्रा , नंद लाल यादव , अदिल अहमद , मलकीत सिंह, पप्पू चौधरी , प्रीतम सिंह , जरनैल सिंह सहित तमाम ट्रांसपोर्टर चीनी मिल के प्रशासनिक भवन पहुंचे और चीनी मिल की अधिशासी निदेशक से वार्ता कर समस्या का समाधान किए जाने की मांग की ।

ट्रांसपोर्टर सुखविंदर सिंह ने कहा कि गन्ना सेंटरों पर गन्ने से भरे ट्रक खड़े हुए हैं लेकिन बॉयलर गिरने के बाद चीनी मिल प्रबंधन ने सेंटर प्रभारी को चीनी मिल में गन्ना लाने को मना कर दिया है । उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टर्स ने चीनी मिल प्रबंधन से तोल केंद्रों पर गन्ने से भरे ट्रकों को चीनी मिल में भेजने तथा उन्हें जल्द खाली कराने का आग्रह किया था परंतु प्रबंधन ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया है । ट्रांसपोर्टर बाजवा ने कहा कि बॉयलर को दुरुस्त करने में करीब 5 से 7 दिन का समय लगने का अनुमान है ऐसी दशा में गन्ने से भरे ट्रक करीब 5 से 7 दिन तक तोल केंद्रों पर खड़े रहेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान होगा तथा काम ना होने के चलते व गेहूं की कटाई के कारण सभी मजदूर वापस चले जाएंगे , जिसका खामियाजा ट्रांसपोर्टरों को उठाना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के चलते कई गुना अधिक धनराशि देकर उनके द्वारा मजदूरों से गन्ना लदान का कार्य कराया जा रहा है और अब चीनी मिल बंद होने से उन्हें प्रतिदिन करीब 3000 से 4000 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। मौके पर मौजूद किसान वासुदेव गुप्ता सहित अन्य लोगों ने कहा कि किसानों का गन्ना कटी अवस्था में खेतों में पड़ा है और अब चीनी मिल बंद होने से किसानों को गन्ना सूखने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।



ट्रांसपोर्ट अनिल शर्मा तथा रूप सिंह ने कहा कि किच्छा के करीब 7 गन्ना सेंटर गन्ना खत्म होने के कारण गत दिवस बंद होने थे और सेंटर पर गन्ने से भरे कई अंतिम वाहन चीनी मिल में आने को तैयार खड़े थे, परंतु अब चीनी मिल बंद होने से उन वाहनों को कई दिन तक खड़ा कर मजदूरों को रोकना पड़ेगा, जिससे ट्रांसपोर्टर को भारी नुकसान होगा। ट्रांसपोर्टरों ने मिल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि मिल प्रबंधन द्वारा समय पर चीनी मिल मशीनों की मरम्मत नहीं कराई गई और लापरवाही बरतने के कारण ट्रांसपोर्टरों और किसानों को चीनी मिल की लापरवाही का खामियाजा भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है ।

चीनी मिल के बॉयलर की छत बार-बार गिरने तथा बार-बार चीनी मिल के बंद होने के संबंध में जब अधिशासी निदेशक रुचि मोहन रयाल से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से साफ इनकार कर दिया।

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