सीएनई रिपोर्टर, देहरादून

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बागियों की घर वापसी का दौर शुरू होने जा रहा है। इसके लिए गठित समिति ने हालांकि ऐसे 60 नेताओं की लिस्ट तैयार की है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व पहले उन लोगों को मौको देगा, जिन्होंने स्वयं पार्टी में दोबारा आने की इच्छा जाहिर की है और निष्कासित होने के बाद अन्य दल का रूख नहीं किया है। कई बड़े नेताओं की वापसी की भी अटकलें तेज हो गई हैं।

दरअसल, कांग्रेस से नाराज होकर पार्टी छोड़ चुके अथवा निष्कासित किये गये नेताओं की एक लंबी फ़ेहरिस्त है। पहले पहल कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व में इस पर भले ही ध्यान नहीं दिया हो, लेकिन चुनाव नजदीक आने के के साथ ही माहौल अब पूरी तरह बदल चुका है। सूत्र बता रहे हैं कि उत्तराखंड में पार्टी छोड़ चुके कांग्रेसी नेताओं की घर वापसी दो चरणों में होगी। पहले चरण में उनको शामिल किया जायेगा, जिन्होंने स्वयं आने की इच्छा जाहिर की है। वहीं दूसरे चरण में रूठों को मनाने और लुभाने का काम भी शुरू होगा।


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इसके लिए गठित एक चार सदस्यी कमेटी निरंतर अपने काम में लगी हुई है। हालांकि समिति की ओर से तैयार की गई संक्षिप्त रिपोर्ट को प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अपर्याप्त बताया है। समिति को विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि पार्टी से निकाले गए ऐसे नेतागण व सक्रिय कार्यकर्ता जो पार्टी में आना चाहते हैं, उनके बारे में विस्तार से रिपोर्ट तैयार की जाये। इस रिपोर्ट में पार्टी से निकाले जाने का कारण, नेताओं के आचरण और पार्टी गतिविधियों में उनकी भूमिका के साथ ही निष्कासन अवधि में पार्टी के संबंध में उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की गम्भीरता से जांच होगा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि वापसी पर निर्णय गुण ओर दोषों के निर्धारण के आधार पर होगा। अभी जो रिपोर्ट मिली है, उसमें संक्षिप्त ब्योरा होने से फैसला लेने में दिक्कत होगी।

बताया जा रहा है कि समिति ने 60 नेताओं की घर वापसी पर रिपोर्ट सौंपी है, जबकि प्रथम चरण में 10 नेताओं की वापसी हो सकती है। आपको यह भी याद दिला दें कि गोदियाल ने बीते सितंबर माह में पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में 04 सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को वापसी के लिए अनुरोध कर रहे निष्कासित नेताओं के बारे में रिपोर्ट सौंपने को निर्देशित किया गया था। इस चार सदस्यीय समिति में अध्यक्ष के साथ प्रदेश महामंत्री गोविंद सिंह बिष्ट, प्रदेश सचिव शांति प्रसाद भट्ट एवं विजय सिजवाली शामिल हैं।

इधर यह भी बताना चाहेंगे कि उत्तराखंड में कांग्रेस भी दो तरह की है। पहली कांग्रेस तो विपक्ष की भूमिका निभा रही है। वहीं एक अन्य कांग्रेस वह है, जो 2017 के चुनाव के दौरान बीजेपी में आई थी। यह वह कांग्रेसी नेता हैं, जो भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी संस्कृति में रच—बस नहीं पाये हैं। इनमें से एक तो यशपाल आर्य हैं, जिन्होंने पुत्र सहित कांग्रेस में वापसी कर ली है। ऐसे ही कई ऐसे शीर्ष नेता भाजपा में हैं, जो जिम्मेदार पदों पर तो हैं, लेकिन संतुष्ट नहीं है और कभी भी घर वापसी कर सकते हैं। अब जहां तक शीर्ष नेताओं की कांग्रेस में वापसी का प्रश्न है, वह हैरान करने वाला नहीं है क्योंकि सब जानते हैं कि कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए बड़े कद के नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना लेकर आये थे, लेकिन जैसे—जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं अब उनकी सपने पूरे होते नहीं दिख रहे। भाजपा की बात करें तो पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत और उसके बाद तीरथ सिंह रावत के पद से हटने के बाद इन कांग्रेस से भाजपा में आये दावेदारों में उम्मीद जगी थी, लेकन वह धामी के सीएम बनने के बाद टूट चुकी है। देखना यह है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते—आते चुनावी चालें कैसे आगे बढ़ती हैं।

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