हल्द्वानी। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन की रामनगर इकाई ने निजी स्कूलों की लॉक डाउन के दौरान गिरती आर्थिकी को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। एसोसिएशन ने पीएम मोदी से कहा है कि वे बीस लाख करोड़ के पैकेज में निजी स्कूलों को भी सहायता देने का विधान बनाने के लिए वित्तमंत्री से कहेंं।
आज रामनगर के एसढीएम को सौंपे गए ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा कि निजी स्कूल पहले ही दिन से प्रधानमंत्री द्वारा घोषित लॉक डाउन के नियमों को अक्षरश: पालन कर रहे हैं। इस दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों की पढ़ाई में अवरोध न हो इसके लिए सभी विद्यालयों ने संसाधन जुटा कर आन लाइन कक्षाएं भी आरंभ कराई। लेकिन सोशल मीडिया में निजी विद्यालयों को समाज का दुश्मन करार दे दिया गया। जिससे तन मान और धन से अपने विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में जुटे स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के दिलों को ठेस पहुंची है। दिल्ली हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्कूलों का उत्साह वर्धन किया। लेकिन सोशन मीडिया पर निजी स्कूलों को समाज का दुश्मन घोषित किया जा रहा है। कुछ लोग अदालत की शरण में जाकर उन पर आन लाइन कक्षाएं न चलाने का आरोप भी लगा रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि लेकिन फीस न आने के कारण अब बहुत से निजी स्कूल बंदी की कगार पर आ पहुंचे हैं। ऐसे में उन्हें सरकारी सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि उनके द्वारा घोषित बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज में यदि निजी स्कूलों को भी शामिल कर लिया जाए तो उनकी व्यवस्था सुचारू हो सकेंगी। घाटा झेल रहे निजी स्कूलों को इससे बड़ा संबल मिलेगा।
ज्ञापन में एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रसून श्रीवास्तव और सचिव डीएस नेगी के अलावा दो दर्जन से अधिक स्कूलों के प्रबंधकों के हस्ताक्षर हैं।

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