सीएनई रिपोर्टर

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार घट रही कोरोना संक्रमितों की संख्या को देखते हुए जल्द ही प्रदेश के स्कूल भी अब खोले जा सकते हैं। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने इस बात का संकेत देते हुए सीएम से इस बावत चर्चा करने की बात कही है।

जानकारी के अनुसार अभी भी प्रदेश में भले ही Covid Curfew है, लेकिन सरकार से मिली छूट के बाद इसे अनलॉक की प्रक्रिया के रूप में देखा जाने लगा है। वैसे बाजार व तमाम संस्थानों में अब सभी कार्य व्यवहारिक रूप से इस तरह चलने लगे हैं कि ऐसा कहीं प्रतीत ही नही हो रहा कि प्रदेश में कहीं Covid Curfew लागू है। यह अलग बात है कि सार्वजनिक स्थलों पर उमड़ रही भीड़ को लेकर शासन—प्रशासन चिंतित भी है।

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वहीं अब यह मांग उठने लगी है कि जब अधिकांश संस्थान कुछ शर्तों के साथ खोल दिये गये हैं तो मात्र स्कूलों को बंद करने का क्या औचित्य है। मांग उठ रही है कि यह भी 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खोल दिये जायें। अगर सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग पहले चरण में कक्षा छह से बड़ी कक्षाओं के छात्रों को 50 फीसदी क्षमता के साथ खोल सकता है। शासन स्तर पर यह अनुमति भी जल्द मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ताजा खबरों के लिए WhatsApp Group को जॉइन करें 👉 Click Now 👈

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गत दिवस मंगलवार को ICMR ने पहले primary school खोलने की सलाह दी है। इस संबंध में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के बयान का इंतजार किया जा रहा है। चूंकि पहले छोटे बच्चों को आने की अनुमति दिये जाने की बात पहले कभी नही उठी है। अभी तक यह माना जा रहा था कि पहले सीनियर छात्रों की कक्षाओं के फिजिकल संचालित करने की अनमुति मिलेगी, लेकिन आईसीएमआर की सलाह भी मानी जा सकती है।

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ज्ञात रहे कि कोरोना के चलते मार्च-अप्रैल 2020 से राज्य के शैक्षिक संस्थान बंद हैं। नवंबर 2020 में 10वीं और 12वीं कक्षा को खोलने की अनुमति दी गई थी पर बाद में कोरोना की दूसरी लहर आने की वजह से स्कूलों को दोबारा बंद कर दिया गया।

इधर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान ने कहा कि ”सरकार ने सभी क्षेत्रों में रियायतें दे दी हैं तो स्कूल भी खोल दिए जाने चाहिए। स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पढ़ाई जारी रखी जा सकती है। पढ़ाई को पटरी पर लाने के लिए छात्रों का नियमित रूप से स्कूल आना बेहद जरूरी है। यदि भविष्य में कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है तो स्कूलों को पुन: बंद किया जा सकता है।”

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वहीं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे कहते हैं ”यह बात सही है कि स्कूल काफी समय से बंद हैं और पढ़ाई को भी नुकसान हो रहा है। इसके साथ-साथ सरकार के लिए शिक्षक और छात्रों की सुरक्षा भी बहुत अहमियत रखती है। सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सीएम से भी इस बारे में चर्चा की जाएगी। जल्द ही इस विषय पर निर्णय ले लिया जाएगा।”

अलबत्ता, समझने वाली बात यह है कि स्कूल खोलने के फैसले से पूर्व सरकार को कोरोना की तीसरी लहर को लेकर प्रमुख वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई भविष्यवाणियों पर भी विचार करना होगा। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोरोना अब लगभग खत्म होने लगा है और तीसरी लहर की चेतावनी पर जनता भी ज्यादा भरोसा नही कर पा रही है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों के दावों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नही किया जा सकता है, क्योंकि उनके दावों के पीछे सिर्फ बयानबाजी नही, बल्कि गहन अध्ययन निहित है।

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तो क्या कोरोना से ज्यादा सुरक्षित हैं छोटे बच्चे ?

ICMR कहा कहना है कि पहले प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं और फिर secondary school खोले जाने चाहिए। ICMR DG Dr. Balram Bhargava का कहना है कि छोटे बच्चे virus को आसानी से हैंडल कर लेते हैं। उनके Lungs में वह receptor कम होते हैं जहां वायरस जाता है। सीरो सर्वे में देखा गया है कि 6 से 9 साल के बच्चों में लगभग उतनी ही Antibodies दिखी जितनी बड़ों में है। डॉ. भार्गव ने कहा कि यूरोप के कई देशों में primary school बंद ही नहीं किए थे। कोरोना की किसी भी लहर में स्कूल बंद नहीं किए गए थे। इसलिए हमारी राय यह है कि पहले प्राइमरी स्कूल खोले जा सकते हैं। ताजा खबरों के लिए WhatsApp Group को जॉइन करें 👉 Click Now 👈

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