नारायण सिंह रावत
सितारगंज। सरकारी नौकरी और जिन्दगी किसे अच्छी लगती है? उत्तर सबका हां में होगा। लेकिन बता दें कि कुछ ऐसे भी लोग हैं जो देश और आम आदमी की जान बचाने के लिए सरकारी नौकर होते हुए भी अपनी जिन्दगी दांव पर लगा रहे हैं। ​जी हां, ऐसे ही एक योद्धा है बलजीत सिंह। बलजीत सिंह आबकारी विभाग में हैं और सितारगंज व खटीमा क्षेत्र में तैनात है। इन्होंने कोरोना वैक्सीन का खोज प्रशिक्षण के लिए अपना शरीर ही दान देने की इच्छा जताते हुए राज्य सरकार और राष्ट्रपति को पत्र भेजा है।
विदित हो कि दुनिया के बाद भारत में भी कोरोना वायरस अपने पैर पसार रहा है। अबतक कई लोगों की इससे मौत हो चुकी है जबकि हजारों से संक्रमित हैं। लेकिन, कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य, पुलिस और सफाईकर्मी देश में देवदूत बनकर उभरे हैं। इसके अलावा हर कोई कोरोना महामारी से जीतने के लिए सरकार के साथ खड़ा दिख रहा है। हर कोई कुछ न कुछ जरूर करना चाहता है। ऐसे में ही आबकारी विभाग के एक आबकारी अधिकारी बलजीत सिंह सामने आये हैं। उन्होंने स्वेछा से कोरोना वैक्सीन के खोज परीक्षण के लिए अपना शरीर ही दान देने की न केवल इच्छा जताई बल्कि बकायदा उन्होंने राज्य सरकार और राष्ट्रपति को अपनी ओर से शरीर दान देने के लिए एक पत्र भी प्रेषित किया है।
इस शरीर दानदाता बलजीत सिंह ने CNE परिवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि किसी भी रोग की वैक्सीन बनाने के बाद उसका परिक्षण किया जाता है। ऐसे में तमाम लोगों की जरूरत होती है। इसलिए उन्होंने इस पुण्य काम के लिए खुद को चुना है और अपनी सहमति पत्र सरकार को भेजा है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के किसी भी परिणाम के लिए वे स्वयं ही जिम्मेदार होंगे। कोविड-19 की महामारी की वैक्सीन की खोज प्रशिक्षण के लिए अपना मानव शरीर को दान करने का निर्णय लेने पर लोग खूले मन से उनकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।
बताते चले कि आबकारी अधिकारी बलजीत सिंह भले ही आबकारी विभाग में है ​लेकिन लोगों को नशे से दूर रहने की सलाह देते हैं। बलजीत सिंह एक पहलवान भी है। उनके नाम उत्तराखंड केसरी का खिताब भी है। इसके अलावा उनका अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में भी चयन हो चुका है। बलजीत सिंह राष्ट्रीय सिविल सर्विसेज कुश्ती प्रतियोगिता में चंड़ीगढ़ में धुरंधर पहलवानों को भी धूल चटा चुके हैं।

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