⏩ विश्व के महज 12 देशों में जीवित बचे स्नो लेपर्ड

⏩ उत्तराखंड में 86 से बढ़कर 121 हुई संख्या

⏩ जानिये, हिम तेंदुए के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

Creative News Express (CNE)

Current numbers of snow leopards and some interesting facts

पूरे विश्व में 195 देश हैं, जिनमें से महज 12 देशों में हिम तेंदुए पाये जाते हैं, गौरवशाली हैं हम, कि इनमें से भारतवर्ष भी एक है, जहां हिम तेंदुए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। ताजा शुभ समाचार यह है कि उत्तराखंड में हिम तेंदुओं ने अपनी तादाद बढ़ानी शरू कर दी है। महज 06 सालों में हिम तेंदुए 86 से बढ़कर 121 पहुंच चुके हैं।


उल्लेखनीय है कि संरक्षित प्रजाति के हिम तेंदुए भारत के पश्चिमी हिमालय (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश) और पूर्वी हिमालय (उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश) में पाये जाते हैं। वहीं यदि हिम तेंदुए की वैश्विक राजधानी की बात करें तो यह भारत के केंद्र शासित प्रदेश हेमिस, लद्दाख में है। यहां हेमिस नेशनल पार्क (Hemis National Park) भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है और इसमें हिम तेंदुओं की अच्छी तादाद है। बता दें कि भारत सरकार ने हिम तेंदुए की पहचान उच्च हिमालय की एक प्रमुख प्रजाति के रूप में की है। यही नहीं, तीन पूर्वी हिमालयी देशों भूटान, भारत (उत्तर-पूर्व) और नेपाल में परिवर्तनकारी संरक्षण प्रभाव लाने के लिये WWF की वैश्विक पहल के रूप में ‘लिविंग हिमालय इनिशिएटिव’ की स्थापना की गई है।

उत्तराखंड प्रदेश की यदि बात करें तो शायद यह प्रथम अवसर है, जब शर्मीले स्वभाव के हिम तेंदुओं की गुप्त दुनिया का राज खुला है। वन विभाग और Wildlife Institute of India की संयुक्त टीम ने यहां हिम तेंदुओं की गणना का काम पूरा कर दिया है। गणना में उत्तराखंड प्रदेश में हिम तेंदुओं की संख्या 121 पाई गई है। पहली बार हुई इस गणना ने वन्य जीव प्रेमियों को गदगद कर दिया है, जिसका कारण यह है कि यह देश के तमाम हिमालयी राज्यों में कुल संख्या 516 का 23 प्रतिशत से ज्यादा है।

हालांकि साल 2016 में भी एक सामान्य अध्ययन हुआ था (अधिकारिक गणना नहीं)। तब बताया गया था कि प्रदेश में हिम तेंदुओं की संख्या लगभ 86 है। अब जब वन विभाग ने हिम तेंदुओं की गणना का काम पूरा कर लिया है तो इसके कई सुखद परिणाम आने वाले सालों में सामने आयेंगे। सबसे अच्छा प्रभाव यहां पर्यटन पर पड़ेगा। हिम तेंदुआ आवासों में बड़ी संख्या में पर्यटक ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में पहुंचेंगे, यह उम्मीद है।

ज्ञात रहे कि 23 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस है। इसके उपलक्ष्य में ही हिम तेंदुओं की गणना का काम पूरा किया गया है। इधर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समीर सिन्हा के अनुसार यह गणना केंद्र सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से संचालित राष्ट्रीय हिम तेंदुआ अनुश्रवण कार्यक्रम (स्पाई) Snow Leopard Monitoring Program (SPY) के अंतर्गत की गई है। गणना का काम दो चरणों में संपन्न हुआ है। पहले चरण में क्षेत्रफल को आधार मानकर संभावित वास स्थलों के अनुसार गणना हुई थी, जबकि अब दूसरे चरण में कैमरा ट्रेपों की मदद ली गई, जिसके सार्थक परिणाम सामने आये। मिशन के तहत गोविंद राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव विहार, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग, नंदा देवी बायोस्फियर के उच्च स्थलीय क्षेत्र और प्रदेश के ट्रांस हिमालयी क्षेत्र में जुलाई से नवंबर 2021 के बीच तमाम कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। इसके अलावा गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान और उत्तरकाशी वन प्रभाग में कैमरा ट्रैप से विवरण एकत्रित किया गया। World Wildlife Fund India की ओर से मुनस्यारी व पिथौरागढ़ में भी कैमरा ट्रैपों से विवरण प्राप्त हुए। गहन विज्ञानी अध्ययन के बाद यह सार्वजनिक रूप से सूचित कर दिया गया है कि उत्तराखंड में हिम तेंदुओं की अनुमानित संख्या अब 121 है।

इधर मीडिया रिपोर्टस के अनुसार हिम तेंदुओं को जहां भी अनुकूल वातावरण मिल रहा हे, वहां इनकी संख्या में लगातार इजाफा भी होने लगा है। उच्च संरक्षित हिमालयी क्षेत्र अब इसके प्राकृतिक आवास के रूप में तब्दील हो रहे हैं। बताना चाहेंगे कि हिम तेंदुए सिर्फ विश्व के 12 देशों में ही पाये जाते हैं और विश्व में इनकी अनुमानित संख्या 05 हजार के लगभग ही है। इधर वन मंत्री, उत्तराखंड सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड प्रदेश में हिम तेंदुओं की संख्या बढ़ने पर तमाम प्रदेश वासियों व वन विभाग को शुभकामनाएं दी हैं।

हिम तेंदुए के बारे में जानिये महत्वपूर्ण तथ्य –

✒️ भारत सरकार ने स्नो लेपर्ड की पहचान उच्च हिमालय की एक प्रमुख संरक्षित प्रजाति के रूप में की है।

✒️ International Union for Conservation of Nature (IUCN) के अनुसार हिम तेंदुओं की पूरे विश्व में अनुमानित संख्या 4 हजार 80 से लेकर 6 हजार 590 के बीच हैं, हालांकि निश्चित संख्या को लेकर आज भी मतभेद बने हुए हैं।

✒️ हिम तेंदुए का शावक का जन्म काफी विलंब से होता है। मादा का गर्भ काल 90 से 100 दिनों का होता है। जिसमें महज वह 02-03 शावकों को जन्म देती है।

✒️ हिम तेंदुए वर्तमान में मात्र अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान में दिखाई देते हैं।

✒️ हिम तेंदुआ और तेंदुए में नाम एक होने के बाजवूद इनमें आपसी कोई संबंध नहीं है। हिम तेंदुआ आकार में अन्य तेदुओं से छोटा होता है।

✒️ हिम तेंदुओं की औसत आयु 12 से 17 साल होती है। नर का वजन 70 किग्रा तक होता है, जबकि मादा 50 किलोग्राम तक होती है।

✒️ सामान्य तेंदुओं द्वारा इंसानों को मारे जाने से बहुत से मामले हैं, लेकिन आज तक हिम तेंदुए ने किसी इंसान की जान ली हो इसका कोई स्पष्ट प्रमाण आज तक नहीं मिल पाया है।

✒️ उत्तराखंड प्रदेश में जब सर्दियों में बर्फ़बारी ज्यादा होती है तो हिम तेंदुए तीन हजार मीटर तक पहाड़ से नीचे चले आते हैं।

✒️ इनके प्रमुख शिकार या भोजन श्रृंखला में भरल (ब्लू शीप), मस्क डियर, हिमालयन थार जैसे जीव होते हैं।

✒️ उत्तराखंड में नवंबर से फरवरी माह के बीच गई बार गंगोत्री नेशनल पार्क से करीब 50 किलोमीटर नीचे उत्तरकाशी की तरफ भरल के झुंडों का पीछा करते यह कई बार हाईवे के पास भी देखे जा चुके हैं।

✒️ हिम तेंदुआ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन भी इसमें से एक है।

✒️ जीव विज्ञानी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के चलते यदि हिम तेंदुए पहाड़ों से उतरने लगे तो इनका सामान्य तेंदुओं से जबरदस्त संघर्ष होगा।

✒️ अगर इंसान ने जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं किया तो हिम तेंदुए का एक तिहाई क्षेत्र खत्म हो सकता है।

✒️ भारत में हिम तेंदुओं को बचाने के लिए पहली परियोजना साल 2009 में शुरू की गई थी।

✒️ वर्तमान में ‘हिमाल संरक्षक’ अक्तूबर 2020 से हिम तेंदुओं की रक्षा के लिये शुरू किया गया एक सामुदायिक स्वयंसेवक अभियान है।

✒️ भारत वर्ष 2013 से वैश्विक हिम तेंदुआ एवं पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण (GSLEP) कार्यक्रम का हिस्सा बन चुका है।

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