सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा/जागेश्वर

यहां जागेश्वर में हल्द्वानी में अंतिम सांस लेने वाली अमेरिकन मूल की महिला का शव आज देर शाम पहुंचा, जहां पूर्ण हिंदू विधि—विधान से उनकी पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया गया।

उल्लेखनीय है कि बाबा नीब करौरी की असीम भक्त और हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली अमेरिकी लेखिका यवेटी क्लेरी रोजर उर्फ रामरानी का हल्द्वानी में निधन हो गया था। उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार पवित्र जागेश्वर धाम में हो। अतएव कई दिनों तक प्रशासन ने उनका शव संरक्षित रखा। आज जब उनकी ​बेटी अमेरिका से पहुंची तो शव को पंचतत्वों में जागेश्वर धाम में विलय किया गया।


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ज्ञात रहे कि नीब करोरी बाबा की यह भक्त पहले कौसानी स्थित आश्रम में बसीं और बाबा की भक्ति की। उनकी अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार जागेश्वर के तट पर पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ कराया जाए। ऐसा ही हुआ और गुरुवार को अमेरिका से हल्द्वानी पहुंची रामरानी की बेटी क्रिस्टिना अंतिम संस्कार के लिए जागेश्वर ले गई। कई साल पहले भारत आईं अमेरिकी लेखिका यवेटी क्लेरी रोजर उर्फ रामरानी का शनिवार को अस्थमा का अटैक पड़ने की वजह से निधन हो गया था। मूलरूप से अमेरिका के टेक्सास की रहने वाली रामरानी चोरगलिया निवासी योग और ध्यान की शिक्षिका मिनाक्षी बजेठा की मित्र थीं।

गत 20 नवंबर, शनिवार को जब यवेटी क्लेरी को अस्थमा का अटैक पड़ा तो मिनाक्षी कौसानी स्थित आश्रम में थीं। यहीं मिनाक्षी का ननिहाल है। आज गुरुवार को रामरानी की बेटी क्रिस्टिना खबर पाकर हल्द्वानी पहुंची। जिसके बाद कागजी कार्रवाई की गई और मां का शव क्रिस्टिना के सुपुर्द कर दिया। मिनाक्षी ने बताया कि रामरानी की दिनचर्या पूजा-पाठ में बीतती थी और उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु भारत की धरती पर हो। इतना ही नहीं वह ये भी चाहती थीं कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार जागेश्वर धाम में किया जाए। उनकी अंतिम इच्छा जानने के बाद बेटी क्रिस्टिना ने अंतिम संस्कार के लिए मां के शव को जागेश्वर धाम ले गईं। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट पुलिस ने विदेश मंत्रालय को भेज दी है।

मिनाक्षी ने बताया कि रामरानी को यह नाम बाबा नीब करौरी से मिला था। वह बाबा नीब करौरी की असीम भक्त थीं और यही वजह से थी कि उन्होंने अपने बच्चों के नाम भी हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर रखे। रामरानी ने अपनी बेटी क्रिस्टिना को शक्ति कहकर पुकारती थीं, जबकि बेटे का नाम उन्होंने जय हनुमान रखा था। वर्ष 2014 में रामरानी पूरी तरह कौसानी स्थित आश्रम में आकर बस गईं। वह बाबा नीब करौरी से इतना प्रभावित थीं कि वह अकसर बाबा नीब करौरी के दर्शन करने आती थीं। बताते हैं कि जब वह 17 साल की थीं, तब भी वह बाबा नीब करौरी के दर्शन को आईं थी और बाबा नीब करौरी ने उन्हें न सिर्फ रामरानी नाम दिया बल्कि गुरुमंत्री भी दिया। यवेटी क्लेरी उर्फ रामरानी की पार्थिव देह का जागेश्वर घाट में रात 8:30 बजे हुए अंतिम संस्कार के वक्त उनकी बेटी क्रिस्टिना शक्ति, बहन डेनियल, नीमा गोस्वामी, मिनसी, आशुतोष आश्रम सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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