ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश में आज कोविड— 19 के संक्रमण की एक महिला मरीज में पुष्टि होने के बाद चिकित्सालय प्रशासन एक नई तरह की समस्या का शिकार हो गया है। बताया गया है कि इस महिला के प्राथमिक व द्वितीयक संपर्क में आए लोगों की संख्या 80 के लगभग हो सकती है। जिसमें चिकित्सालय का स्टाफ भी शामिल है। उधर दो दिन पहले इसी चिकित्सालय के एक नर्सिंग आफिसर में कोरोना की पुष्टि होने के बाद तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा स्टाफ को क्वारेंटाइन किया गया था। अब महिला के सपर्क में आए लगभग इतने ही लोगों को क्वारेंटाइन किया जाता है तो चिकित्सालय में जगह का संकट खड़ा हो जाएगा। दूसरी ओर एम्स प्रशासन ने यह भी बताया है कि महिला का कोरोना टेस्ट एक बार पहले भी कराया गया था तब वह निगेटिव आया था। कोरोना वायरस के इस चरित्र को लेकर भी प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

यह चिंता संस्थान संकायाध्यक्ष (अस्पताल प्रशासन) प्रो. यूबी मिश्रा ने भी अपने प्रेस नोट में जता दी है। उन्होंने बताया है कि इस मामले में प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है ताकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को क्वारेंटाइन करने के लिए स्थान की व्यवस्था की जा सके।
उन्होंने बताया कि जिला नैनीताल निवासी 56 वर्षीया महिला बीती 22 अप्रैल को एम्स ऋषिकेश में भर्ती हुई थी। जिसे ब्रेन स्ट्रोक की शिकायत थी। यह महिला नैनीताल के स्वामी विवेकानंद अस्पताल में भर्ती थीं, जहां उनका स्ट्रोक का उपचार चल रहा था। वहां से इसे श्रीराम मूर्ति हॉस्पिटल बरेली रेफर किया गया था, श्रीराममूर्ति अस्पताल से इसे 22 को एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर किया गया था। उन्होंने बताया कि उक्त दोनों अस्पतालों से प्राप्त रिपोर्ट में महिला रोगी का कोविड 19 का टेस्ट भी हुआ था,जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। एम्स में भर्ती इस महिला को 27 अप्रैल को फीवर आया था,जिसके कारण इसका संस्थान में कोविड 19 का टेस्ट किया गया। जिसकी रिपोर्ट मंगलवार (आज) पॉजीटिव आई है।

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जिसके बाद अस्पताल में महिला रोगी को आइसोलेट करने की प्रोसेस शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि महिला के प्राइमरी कांट्रेक्ट में आए लोगों की जांच चल रही है। बताया कि स्वामी विवेकानंद अस्पताल नैनीताल व श्रीराममूर्ति अस्पताल बरेली में इस महिला के संपर्क में करीब 50 लोग आए हैं। साथ ही महिला के साथ दो पेसेंट व दो अटेंडेंट को भी चिहि्नत किया गया है। बताया कि इस बाबत महिला जिन अस्पतालों में भर्ती रही है वहां भी इसकी जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस महिला के प्राइमरी व सेकेंड्री कांट्रेक्ट में आए करीब 70 से 80 स्टाफ को कोरोंटाइन करना पड़ेगा,जिसके लिए इंस्टीट्यूट में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है,लिहाजा इसके लिए जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित कर मदद ली जा रही है। प्रो. मिश्रा ने बताया कि संस्थान में भर्ती कोविड 19 संक्रमित यूरोलॉजी विभाग के नर्सिंग ऑफिसर की स्थिति में धीरे- धीरे सुधार हो रहा है।

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