अल्मोड़ा। उत्तराखंड में अल्मोड़ा के भनोली तहसील के मिरगांव निवासी लांस नायक दिनेश सिंह गैड़ा का पार्थिव शरीर आज मंगलवार को बरेली से अपने गृह जनपद अल्मोड़ा पहुंचा। शहीद की शव सीधे उनके मूल गांव मिरगांव ले जाया गया, जहां रामेश्वर श्मशान घाट में उनकी पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जायेगी।


शव पहुंचने से पूर्व ही हजारों की संख्या में भीड़ शहीद के आवास पर एकत्रित हो गई थी। इससे पूर्व दन्या कस्बे में शहीद दिनेश के पार्थिव शरीर पर स्थानीय लोगों ने की पुष्प वर्षा की तथा पाकिस्तान मुर्दाबाद, शहीद दिनेश सिंह अमर रहे, भारत माता की जय के नारे लगाये।
ज्ञात रहे कि शहीद की पार्थिव देह गत दिवस सोमवार को ही उनके गांव पहुंचनी थी, लेकिन मौसम खराब रहने के कारण हेलीकॉप्टर गुरुड़ाबांज के लिए उड़ान नहीं भर सका था। ज्ञात रहे कि, जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना के दो ऑफिसर और तीन जवान (एक पुलिस का जवान) शहीद हो गए थे। इन्हीं जवानों में उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले लांस नायक दिनेश सिंह भी थे। इसी महीने दिनेश को घर आना था लेकिन लॉकडाउन के कारण वह कश्मीर में ही रुक गए। इस अवसर पर सैन्य अफसर मेजर जनरल पुष्पेंद्र सिंह, सेना मेडल, जीओसी, ब्रिगेडियर विजय काला, सेना मेडल, कमांडर 99 माउंटेन ब्रिगेड, ब्रिगेडियर जीएस राठौर, कमांडेंट कुमाऊं रेजीमेंट, कर्नल हर्ष मिश्रा, कमांडिंग आफिसर 13 सिक्ख रेजिमेंट, ले. कर्नल अखिलेश राठौर के अलावा डीएम नितिन भदौरिया, एसएसपी पीएस मीणा, परिवहन मंत्री यशपाल आर्या, विधायक व विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, प्रशांत भैसोड़ा, दीवान सिंह भैसोड़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा गोविंद पिलख्वाल, रमेश बहुगुणा, दिनेश गैड़ा, रवि रौतेला, दीवान सतवाल, चंदन बोरा आदि मौजूद रहे।

मई—जून में आना था घर, आई शहादत की सूचना
शहीद लांस नायक दिनेश सिंह के पिता के अनुसार, वह 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। दिनेश आखिरी बार पिछले साल दिसंबर में अपने घर आए थे। अब मई-जून में उन्हें घर आना था। 2 दिन पहले ही दिनेश की अपने पिता से फोन पर बात हुई थी। दिनेश ने अपने पिता से कहा था कि अभी कोरोना महामारी चल रही है इसलिए अभी घर नही आ सकते। जो जहां है, उसे वहीं रहने को कहा गया है।


अविवाहित थे दिनेश
लांस नायक दिनेश की शादी भी नहीं हुई थी। शहीद के पिता गोधन सिंह और माता तुलसी देवी का रो—रोकर बुरा हाल बना है। दिनेश इस घर के एकलौते बेटे थे। उनकी एक बहन है, जिसकी शादी कुछ साल पहले हो चुकी है। दिनेश की शादी के सपने उनके मां-बाप ने देखे थे, जिसको लेकर वे तैयारी में भी जुटे थे।

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