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उत्तराखंडखेती-बाड़ी

खेती बाड़ी : बन्द गोभी की फसल को नुकसान पहुंचाता तम्बाकू की सूंड़ी कीट

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डा० राजेंद्र कुकसाल
rpkuksal.dr@gmail.com

आजकल ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बन्द गोभी, फूल गोभी की खड़ी फसलों पर इस कीट का प्रकोप देखने को मिलता है।

पत्तियों की निचली सतह पर कीट के अंडे।

इस कीट की सूंड़ी कई प्रकार की फसलों को नुक्सान पहुंचाती है। विशेष रूप से सरसों कुल की फसलों में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है।इस कीट की सूंड़ी पौधों की पत्तियों को खा जाती है और उन्हें पूरी तरह क्षति पहुंचाती हैं।इस कीट के वयस्क 15-18 मी.मी. लम्बे जिसका रंग मटमैला भूरा होता है तथा अग्र पंख सुनहरे-भूरे रंग के सिरों पर टेढ़ी-मेढ़ी धारियां व धब्बे होते है। पिछले-पंख सफेद तथा भूरे किनारों वाले होते है। मादा मौथ आकार में नर से कुछ बड़ी होती है। ये मौथ रात्री चर होते हैं दिन में नहीं दिखाई देते।जीवन चक्र लगभग एक माह तक का होता है तथा एक बर्ष में इस कीट की 12 पीढि़यां हो जाती है।पत्ती की निचली सतह पर वयस्क मादा मौथ झुंड में अंडे देती है। 2-5 दिनों बाद अंडों से इल्लियां/ लार्वा वाहर निकलते हैं। लार्वा 15-23 दिनों तक पत्तियों को खाकर बड़े आकार के हो जाते हैं।

लार्वा / इल्लियां पत्तियों को नुक्सान पहुंचाती हुईं।

लार्वा में पांच बार मोल्टिगं ( केंचुल बदलते हैं )। नवजात इल्लियाँ / लार्वा मटमैले-हरे रंग की होती है पूर्ण विकसित इल्लियाँ हरे, भूरे या कत्थाई रंग होती है शरीर के प्रत्येक खण्ड के दोनों तरफ काले तिकोन धब्बे इसकी विशेष पहचान है। इसके उदर के प्रथम एवं अंतिम खण्डों पर काले धब्बे एवं शरीर पर हरी-पीली गहरी नारंगी धारियां होती है। पूर्ण विकसित इल्लियाँ 35-40 मि.मी. लम्बी होती है।


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सूंडियों रात्रि चर होती है। दिन के समय साधारणतः लार्वा पौधों के समीप जमीन के अंदर होते हैं।
प्यूपा अवस्था 7-10 दिनों में पौधों की जड़ों के पास जमीन के अन्दर रहतीं हैं।
वयस्क की औसत आयु 8-10 दिनों की होती है।

रोकथाम –
1.इस कीट की चार अवस्थाएं अंडा, सूंड़ी,प्यूपा व वयस्क होती है। इन चारों अवस्थाऔ को नष्ट करने का प्रयास करने पर ही फसल को नुक्सान से बचाया जा सकता है।
फसल की निगरानी करते रहें पत्तियों पर जैसे ही अंडे सूंडियों दिखाई दें उन पत्तियों को हटा कर नष्ट करें।

  1. ट्रेप क्राप ( प्रपंच फसल ) –
    सरसों को बन्द गोभी की ट्रेप क्राप के रूप में प्रयोग करने से बन्द गोभी पर लगने वाले कीट विशेष रूप से लीफ वेबर ( पत्ती छेदक कीट ) ,डाइमन्ड बैक मौथ, तम्बाकू की सूंड़ी कीटों के प्रकोप को कम किया जा सकता है।

बन्द गोभी की 15 लाइनों के बाद दो लाइनें सरसों की उगानी चाहिए। सरसों की दो लाइनों में से एक लाइन की बुवाई बन्द गोभी की रोपाई के 15 दिन पहले करनी चाहिए जिससे बन्द गोभी की रोपाई के समय सरसों का पौधा 4-5 से.मी. की ऊंचाई प्राप्त कर ले और बन्द गोभी पर लगने वाले कीटों के प्रारम्भिक अक्रमण से बच सके। सरसों की दूसरी लाइन की बुवाई बन्द गोभी रोपाई के लगभग 25 दिनों बाद करें जिससे कीटों को सरसों की पत्तियां बन्द गोबी के पूरे जीवन काल तक मिलती रहे और बन्द गोभी को छति न हो।

  1. प्रकाश प्रपंच की सहायता से रात को वयस्क मौथ को आकर्षित कर उन्हें नष्ट करते रहना चाहिए। प्रकाश प्रपंच हेतु एक चौडे मुंह वाले वर्तन ( पारात,तसला आदि ) में कुछ पानी भरलें तथा पानी में मिट्टी तेल मिला लें उस वर्तन के ऊपर मध्य में विद्युत वल्व लटका दें यदि खेत में वल्व जलाना सम्भव न हो तो वर्तन में दो ईंठ या पत्थर रख कर उसके ऊपर लालटेन या लैंम्प रख दें। लालटेन को तीन डंडों के सहारे भी लटका सकते हैं। साम 7 से 10 बजे तक वल्व, लालटेन या लैम्प को जला कर रखें। वयस्क मौथ प्रकाश से आकृषित होकर वल्व, लालटेन व लैम्प से टकराकर वर्तन में रखे पानी में गिर कर मर जाते हैं। प्रकाश प्रपंच का प्रयोग आसपास के सभी कृषकों को मिल कर करें। बाजार में भी प्रकाश प्रपंच/ सोलर प्रकाश प्रपंच उपलब्ध हैं।
  2. वयस्क मौथ/पतगौ को आकर्षित करने के लिए फ्यूरामोन ट्रेप का प्रयोग कर उन्हें नष्ट करें।
    फेरोमोन ट्रैप को गंध पाश भी कहते हैं। इसमें एक प्लास्टिक की थैली पर कीप आकार की संरचना लगी होती है जिसमें ल्योर ( गंध पास ) लगाने के लिये एक सांचा दिया होता है। ल्योर में फेरोमोन द्रव्य की गंध होती है जो आसपास के नर कीटों को आकर्षित करती है। ये ट्रैप इस तरह बने होते हैं कि इसमें कीट अन्दर जाने के बाद बाहर नहीं आ पाते हैं। फेरामोन ट्रेप में एक माह बाद ल्योर ( गंध पास ) की टिकिया बदलते रहें।बीज दवा की दुकानों में फ्यूरेमोंन ट्रेप उपलब्ध रहते हैं। AMAZON से भी औन लाइन फेरामौन ट्रेप मंगा सकते हैं। दस पौधों के बीच एक फेरामोन ट्रेप का प्रयोग करें।
  3. ब्यूवेरिया बेसियाना ( दमन, बायो पावर ) पांच ग्राम दवा ( एक चम्मच ) का एक लिटर की दर से पानी में घोल बनाकर इल्लियां/ लार्वा के ऊपर छिड़काव करें प्यूपा को नष्ट करने हेतु पौधों के पास की भूमि को भी दवा के घोल से तर करें। दवा का छिड़काव साम के समय पर करें।
  4. फसल पर नीम आधारित कीटनाशकों जैसे निम्बीसिडीन निमारोन,इको नीम , अचूक या बायो नीम में से किसी एक का तीन मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर सांयंकाल में या सूर्योदय से एक दो घंटे पहले पौधों पर दस दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करते रहें जिससे तितली पौधों पर अन्डे न दे सके दवा के घोल में प्रिल ,निरमा या कोई भी अन्य लिक्युड डिटर्जेंट की कुछ बूंदें मिलाने पर दवा अधिक प्रभावी होती है। प्यूपा नष्ट करने हेतु पौधों के जड़ों के पास की भूमि को दवा के घोल से खूब तर करें।

7.प्यूपा अवस्था नष्ट करने हेतु पौधों जड़ों के पास गहरी निराई गुड़ाई करें।

रासायनिक उपचार-
यदि जैविक विधियों से कीटों का नियंत्रण नहीं हो पा रहा है तो फसल को बचाने हेतु रासायनिक दवाओं का प्रयोग कर सकते हैं।

इमिडाक्लोप्रिड ,क्लोरोपाइरीफास या मैलाथियान 1 मि.मि. दवा का एक लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सात दिनों के अन्तराल पर पुनः छिड़काव करें। एक ही दवा का छिड़काव बार बार न करें।

मोबाइल नंबर
9456590999

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