सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर
उगिंया और सोराग के ग्रामीण रामाढूंगा में खड़िया खनन की लीज को लेकर आक्रोश हैं। उन्होंने सोमवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और कहा कि क्षेत्र भूस्खलन प्रभावित है। खड़िया खनन से उनके गांव, गौचर, पनघट, मकान और खेती को भारी नुकसान होगा। उन्होंने खनन लीज को निरस्त करने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

सोमवार को कपकोट तहसील के सुदूरवर्ती गांवों के लोग बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। कहा कि उगिंगया गांव के ऊपर खनन की बात हो रही है। वह स्थान 45 अंश के ढलान पर है। खनन का मलबा आदि गांव की तरफ आएगा। कृषि भूमि और मकान खतरे में होंगे। उगिंया गांव ओर रामाढूंगा के बीच गौचर, पनघट, सिवल भूमि है। कैलंग, बांज, खरसू, अखरोट के चार हजार से अधिक पेड़ हैं। सदानीरा गधेरा है। वह लोगों के साथ ही मवेशियों की प्यास बुझाता है। गांव से लेकर पिंडर नदी तक भूमि बीते दस वर्ष से धंस रही है। पांच मीटर भूस्खलन भी हो गया है। जिससे रूप सिंह, तारा सिंह, चंदन सिंह, उमराव सिंह, जीवन के मकान खतरे में हैं। जिस स्थान पर खनन के लिए आवेदन किया गया है वहां प्रताप सिंह पुत्र धरम सिंह, प्रकाश सिंह पुत्र बहादुर सिंह के मकान हैं। गांव के 35 परिवारों के जल, जंगल, जमीन, मकान आदि का खतरा है। इस मौके पर कैलाश सिंह, प्रकाश सिंह, धाम सिंह, चंदन सिंह, राजेंद्र सिंह, दीवान सिंह आदि मौजूद थे।


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