आयोग पर शासनादेश की अवहेलना का आरोप

– LT. शिक्षक भर्ती की चयन सूची में दिव्यांग अभ्यर्थियों को बाहर करने का मामला

सीएनई डेस्क

L.T. शिक्षक भर्ती 2020 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के फैसले से दिव्यांग अभ्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग ने एक तो शासनादेश का उल्लंघन किया, वहीं तीसरी बार संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करने में देरी की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग 31 दिसंबर 2021 को LT. शिक्षक भर्ती की चयन सूची जारी की गई, जिसमें विज्ञान विषय में 10, अंग्रेजी में 6 व गणित विषय में 4 दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन हुआ और फिर पूरे 6 महिने 11 दिन बाद 11 जुलाई 2022 को पुनः चयन सूची में संशोधन कर 10 दिव्यांगजन अभ्यर्थियों को बिना सूचित किये बाहर कर दिया गया।


आयोग की इस प्रक्रिया से सभी 10 दिव्यांगजनों में असंतोष व्याप्त हो गया। जिसके बाद कुछ दिव्यांग अभ्यर्थियों द्वारा प्रत्यावेदन किया गया। जिस पर आयोग द्वारा 13 जुलाई 2022 को सभी दिव्यांगजन का अभिलेख सत्यापन पर रोक लगा दी गई और पुनः संशोधित चयन सूची जारी करने की बात की जा रही है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि L.T. शिक्षक भर्ती 2020 चल रही है, जिसमें सामान्य वर्ग का अभिलेख सत्यापन हो गया है और दिव्यांग अभ्यार्थियों की सही चयन सूची अभी तक आयोग जारी नहीं कर पाया है। उन्होंने मुख्य सचिव से दिव्यांग अभ्यार्थियों का संशोधन परीक्षा परिणाम जल्द से जल्द जारी करने व आयोग सामान्य वर्ग के साथ ही दिव्यांग अभ्यार्थियों की संस्तुति विभाग को भेजने की मांग भी की।

दिव्यांग अभ्यर्थियों ने बताया कि इससे पूर्व अपर मुख्य सचिव रहीं, राधा रतूड़ी के द्वारा 11/09/2019 को एक पत्र उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा गया था। जिसमें साफ-साफ लिखा है कि दिव्यांगजनों का चयन शासनादेश संख्या 232 (दिनांक – 26/09/2018) के अनुसार होना है। यह शासनादेश शासन L.T. शिक्षक भर्ती में पहले ही लागू कर चूका है।

कार्मिक अनुभाग -2 के शासनादेश संख्या – 232 दिनांक 26/09/2018 बिंदु संख्या – 12 में साफ-साफ उल्लेख है कि यदि किसी दिव्यांगजन श्रेणी का अभ्यर्थी उपलब्ध ना हो तो इस श्रेणी को दूसरी दिव्यांगजन श्रेणी से भरा जा सकेगा, किंतु आयोग ने इस शासनादेश का बिलकुल भी पालन नहीं किया।

उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि इन सभी बिंदुओं का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से बात करें कि दिव्यांगजनों की भर्ती प्रक्रिया में देरी ना हो। सामान्य वर्ग के साथ ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाये व सामान्य वर्ग साथ ही दिव्यांगजनों को नियुक्ति दी जाये, क्योंकि यह भर्ती प्रक्रिया
एक साथ ही है। साथ ही सभी बिंदुओं पर आयोग को नियमानुसार जल्द से जल्द कार्यवाही करने के निर्देश भी देने की मांग की है।

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